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एमपी में हर विधायक गोद लेगा एक गाँव

सीएम के मास्टर प्लान से किसानों की बढ़ जाएगी आय
भोपाल (जयलोक)। कृषक कल्याण वर्ष में मध्य प्रदेश सरकार ने विधायकों की इसमें भागीदारी सुनिश्चित करते हुए उन्हें अपने विधानसभा क्षेत्र में एक गांव गोद लेने के लिए कहा है। इसे विधायक ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा। यह आदर्श कृषि ग्राम होगा, जिसमें किसानों की आय बढ़ाने के लिए उन्हें परंपरागत खेती के साथ-साथ पशुपालन, उद्यानिकी फसल उत्पादन और प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाएगा। ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती को हतोत्साहित करने के साथ उड़द की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। किसानों को यह भी बताया जाएगा कि पहली बार प्रदेश में उड़द पर सरकार 600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रोत्साहन राशि देने जा रही है। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने इस संबंध में विधायकों को निर्देश दिए हैं। उन्हें अलग से बजट भी आवंटित किया जाएगा। राष्ट्रकुल संसदीय संघ (भारत क्षेत्र छह) के तीन राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के युवा विधायकों का दो दिवसीय सम्मेलन 30 और 31 मार्च को भोपाल में विधानसभा के सभागार में होगा। सम्मेलन में मध्य प्रदेश के 18, छत्तीसगढ़ के 15 और राजस्थान के 22 विधायक शामिल होंगे। 30 मार्च को लोकतंत्र और नागरिकों की भागीदारी को मजबूत करने में युवा विधायकों की भूमिका पर मंथन होगा। उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डा. रमन सिंह उपस्थित रहेंगे। इसमें वक्ताओं के संबोधन भी होंगे। सम्मेलन में दूसरे दिन 31 मार्च को विकसित भारत 2047-युवा विधायकों के दायित्व एवं चुनौतियां पर मंथन होगा। इस दिन विभिन्न सत्रों के अलावा एमआइटी पूना के चेयरमैन डा. राहुल वी. कराड का संबोधन होगा। समापन सत्र में राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश, कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार उपस्थित रहेंगे।
ये काम भी करने होंगे
विधायकों को कृषक कल्याण के लिए विधानसभावार वार्षिक कार्ययोजना बनाने के लिए कहा गया है। इसके तहत कृषि मेला, कृषक संगोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा। विधानसभा क्षेत्र में किसान रथ का भ्रमण कराया जाएगा। बैलगाड़ी और ट्रैक्टर रेस का आयोजन किया जाएगा। जैविक उत्पादों के विपणन के लिए विशेष हाट-बाजारों का आयोजन किया जाएगा। विधायक अपने क्षेत्र के सभी किसानों का एग्रीटेक में शत-प्रतिशत ऑनबोर्डिंग कराना एवं ई-विकास (वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान) प्रणाली के माध्यम से 100 प्रतिशत वितरण करवाना भी सुनिश्चित कराएंगे।
ग्रीष्मकालीन मूंग का उपार्जन चुनौती
सूत्रों का कहना है कि सरकार ग्रीष्मकालीन मूंग के उपार्जन को प्रोत्साहित नहीं करना चाहती है। भारत सरकार ने पिछले साल 3.51 लाख टन उपार्जन का लक्ष्य निर्धारित किया था लेकिन 7.65 लाख टन उपार्जन किया गया। इससे सरकार पर 3,594 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त वित्तीय भार आया। काफी प्रयास के बाद अधिकतर उपज भारत सरकार ने ली अन्यथा सारा बोझ राज्य सरकार पर आ जाता। किसान ग्रीष्मकालीन फसल के रूप में मूंग की खेती करते हैं लेकिन जब सरकार खरीदी नहीं करती तो व्यापारी काफी कम दर पर इससे खरीदते है।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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