
इस्राइल और अमेरिका की तरफ से ईरान पर हमले शुरू किए जाने के एक महीने बाद भी युद्ध खत्म नहीं हुआ है। हालांकि, इस बीच ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य बंद किए जाने की वजह से दुनिया में ऊर्जा संकट जरूर खड़ा हो गया। यूरोप से लेकर एशिया तक कई देशों को होर्मुज के बंद होने की वजह से अपनी ऊर्जा जरूरतों को प्रबंधित करना पड़ रहा है। साथ ही तेल-गैस की आपूर्ति करने वाले देशों को भी मुश्किलें झेलनी पड़ रही हैं।
नई दिल्ली (जयलोक)।इस्राइल-अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार (2 अप्रैल) को एलान किया कि ईरान में अपने लक्ष्य पूरे करने के बाद ही उनकी सेना इस युद्ध से बाहर निकलेगी। उन्होंने कहा कि इस काम में दो से तीन हफ्ते का समय लग सकता है। इस बीच अपनी ऊर्जा सप्लाई के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर खाड़ी देश, जैसे- संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत, आदि इसके आगे भी बंद रहने की संभावना को देखते हुए तेल-गैस पहुंचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर विचार कर रहे हैं। जिन योजनाओं पर विचार किया जा रहा है, उनमें से एक योजना खुद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से बनाई गई थी। हालांकि, इस पर लंबे समय से काम अटका है।

खाड़ी देश अब होर्मुज से आगे व्यवस्था पर विचार क्यों कर रहे हैं?
खाड़ी देश होर्मुज जलडमरूमध्य को बायपास करने के लिए नए तेल परिवहन मार्गों और पाइपलाइन नेटवर्क पर विचार कर रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यही है कि युद्ध की वजह से यह अहम समुद्री मार्ग बेहद संवेदनशील हो गया है। यहां न सिर्फ ईरान खाड़ी देशों के तेल-गैस और आपूर्ति से जुड़े टैंकरों-जहाजों को निशाना बना रहा है, बल्कि अपनी मर्जी से कुछ देशों को ही यहां से निकलने की अनुमति दे रहा है। इसके चलते खाड़ी देशों को खासा नुकसान उठाना पड़ा है।

ईरान का बढ़ता नियंत्रण और व्यवधान
अमेरिका-इस्राइल हमलों के बाद ईरान ने इस संकरे जलमार्ग को चुनिंदा तरीके से बंद घोषित कर दिया। इसका असर यह हुआ कि यहां से गुजरने वाले यातायात में 95 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई। अब इस मार्ग से गुजरने वाले किसी भी जहाज को तेहरान की पूर्व-मंजूरी लेनी पड़ती है, जिससे खाड़ी देशों के निर्यातकों पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट
शांति के समय में दुनिया भर के 20त्न तेल और गैस (लगभग 20 मिलियन बैरल प्रतिदिन) की आपूर्ति इसी जलडमरूमध्य से होती है। इस मार्ग में रुकावट पूरी दुनिया की आपूर्ति और खाड़ी देशों के खजाने को प्रभावित कर रही हैं। इसके कारण कच्चे तेल की कीमतों के साथ-साथ शिपिंग और बीमा की लागत में भी भारी उछाल आया है। इसका पूरा असर यह है कि अधिकतर देशों में तेल-गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं।
एकल चोकपॉइंट पर निर्भरता खत्म करना
अधिकारियों और उद्योग जगत के दिग्गजों को एहसास हो गया है कि वे अपने निर्यात के लिए केवल एक चोकपॉइंट पर निर्भर नहीं रह सकते हैं। उनका मानना है कि भविष्य की स्थिरता के लिए पाइपलाइनों, रेलवे और सडक़ों का एक वैकल्पिक और व्यापक नेटवर्क बनाना ही एकमात्र व्यावहारिक उपाय है। इससे ये देश दूसरों की तरफ से खड़ी की गई रुकावटों से निपट सकेंगे और अपने फैसले खुद कर सकेंगे।
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Author: Jai Lok






