
शासकीय आवास खाली करने का नोटिस एक साल पुराना
जबलपुर (जयलोक)
जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर को जेल मुख्यालय से जारी नोटिस की अफवाह ने जेल प्रबंधन को आज काफी परेशान कर दिया। अफवाह में यह बात कही गई कि जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर को जेल मुख्यालय से नोटिस जारी कर भोपाल जेल का बंगला खाली करने का आदेश दिया गया। इस बात में कितनी सच्चाई है जब इस मामले में जयलोक ने जेल अधीक्षक अखिले तोमर से चर्चा की तो उन्होंने बताया कि वे जबलपुर जेल अधीक्षक के अलावा जेल डीआईजी के पद पर भी हैं। ऐसे में उनका भोपाल भी आना जाना लगा रहता है। ऐसी स्थिति में जेल मुख्यालय से उन्हें भोपाल और जबलपुर जेल के दोनों ही बंगले में रहने की अनुमति दी गई है। इस प्रकार को कोई भी नोटिस जारी नहीं किया गया है।
दरअसल आज सुबह अचानक एक खबर वायरल हुई जिसमें कहा गया कि जबलपुर जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर को भोपाल मुख्यालय से नोटिस जारी कर भोपाल जेल के बंगले को खाली करने का आदेश जारी किया गया है। इस संबंध में जब अखिलेश तोमर से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि आदेश तो सही है लेकिन एक वर्ष पुराना है। पिछले वर्ष यह आदेश जारी किया गया था लेकिन इस आदेश के जारी होने के दो माह बाद फिर से एक और आदेश जारी किया गया जिसमें अखिलेश तोमर को भोपाल और जबलपुर जेल बंगले में रहने की अनुमति दी गई थी।
सागर जेल अधीक्षक सहित दस कर्मचारियों के भी नाम – जो खबर फैलाई गई है उसमें जबलपुर जेल अधीक्षक के अलावा सागर जेल अधीक्षक और दस जेल कर्मचारियों का भी नाम है। नोटिस में कहा गया है कि जबलपुर जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर का तबादला 2019 में भोपाल से जबलपुर हुआ था। उन्होंने जबलपुर जेल का चार्ज भी ले लिया और पिछले चार सालों से जबलपुर जेल अधीक्षक का पद संभाल रहे हैं। लेकिन भोपाल सेंट्रल जेल में बने बंगला नंबर ई-02/02 में कब्जा जमा रखा है। जबकि उन्हें जबलपुर में बंगला मिला हुआ है। यहीं बात सागर जेल अधीक्षक के लिए भी कही गई है। सागर जेल अधीक्षक और दस जेल प्रहरी के बारे में तो यह बात पता नहीं चली कि जारी नोटिस में कितनी सच्चाई है। लेकिन जबलपुर जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर ने इस नोटिस को एक वर्ष पुरानान बताते हुए इस बात को गलत बताया।
अखिलेश तोमर के पास जेल डीआईजी का भी प्रभार – वर्तमान में जबलपुर जेल अधीक्षक के पद पर पदस्थ अखिलेश तोमर के पास जेल डीआईजी रेंज का भी प्रभार है। ऐसे में उनका भोपाल आना जाना लगा रहता है। वहीं इस समय अखिलेश तोमर भोपाल में ही है।
ये है नियम – नियम के अनुसार ट्रांसफर या सेवानिवृत्त होने पर शासकीय आवास खाली करने के लिए 6 माह का समय दिया जाता है। अगर इसके बाद भी जेल विभाग के अधिकारी या कर्मचारी शासकीय आवास खाली नहीं करते हैं तो इसका आर्थिक दंड लगाया जाता है।
जबलपुर जेल में भी जमे कर्मचारी – जबलपुर जेल परिसर में बने शासकीय आवास में भी कई पुलिस कर्मियों ने स्थानांतरण या सेवानिवृत्त हो जाने के बाद भी अब तक आवास खाली नहीं किए। हालांकि जेल प्रशासन की ओर से इन्हें कई बार नोटिस भी जारी किया गया। लेकिन कार्रवाही ना होने से कर्मचारी शासकीय आवास छोडऩे को तैयार नहीं हैं।
सुविधाओं से नहीं छूट रहा मोह – जेल परिसर में बने शासकीय आवास में ऐसी तमाम सुविधाएं फ्री में दी जा रही है जो जेल प्रहरियों के जेबों पर काफी भारी पड़ती है। इसमें फ्री में पानी मिलना, मकान के देखरेख का खर्चा सहित परिवार की सुरक्षा संबंधी कई सुविधाएं जेल परिसर में बने शासकीय आवास में मिल रहीं हैं। अगर बाहर किराए पर घर लेने पर इसके लिए जेल कर्मचारियों को अतिरिक्त खर्चा करना पड़ेगा। हालांकि जेल कर्मचारियों का भी इसमें एक अलग ही तर्क है उनका कहना है कि ट्रांसफर हो जाने से अचानक ही वे परिवार को लेकर स्थानांतरण वाली जगह पर नहीं जा सकते। उनके बच्चों की पढ़ाई सहित कई प्रकार की परेशानियाँ सामने आती हैं। जिसके लिए उन्हें कम से कम बच्चों की परीक्षा होने का इंतजार करना पड़ता है।
इनका कहना है
मैं जबलपुर जेल अधीक्षक के साथ साथ जेल डीआईजी के पद पर भी हूँ। जिसके लिए मुझे भोपाल भी जाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में जेल मुख्यालय की ओर से आदेश दिया गया है कि वे जबलपुर और भोपाल के बंगले में रह सकते हैं।

अखिलेश तोमर, जेल अधीक्षक

Author: Jai Lok







