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जरूरत पड़ी तो बढ़ा देंगे बुक फेयर-कलेक्टर, दुकानदारों के सर से अभी भी नहीं उतर रहा मुनाफाखोरी का भूत : मेले में आने वाले लोगों को कहा जा रहा दुकान से ही देंगे किताबें

                 कलेक्टर की दो टूक चेतावनी, नहीं माने तो कठोर कार्यवाही होगी

जबलपुर (जय लोक)। प्रदेश में पहली बार जिला प्रशासन की पहल पर लगे किताबों के मेले बुक फेयर में 50 से अधिक स्टॉल समाहित किए गए हैं। लेकिन प्रशासन की इस सार्थक और सराहनीय पहल को बट्टा लगाने का काम उन्हें चुनिंदा मुनाफाखोर दुकानदारों द्वारा किया जा रहा है जो कई सालों से प्रकाशकों और  निजी स्कूलों के साथ मोनोपोली बनाकर अभिभावकों को लूटने का काम करते आ रहे हैं। मेले में भी इन मुनाफाखोर दुकानदारों के सर से लालच का भूत नहीं उतर रहा है। इनकी हिमाकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मेले में आने वाले अभिभावकों को राहत देने के बजाय पहले से ही लूट के लिए बदनाम दुकानदार यह कहकर भटका रहे हैं कि मेले में किताबें नहीं मिलेगी उनको दुकान से आकर ही किताबें लेना होंगी।
मेले का निरीक्षण करने पहुँचे कलेक्टर दीपक सक्सेना के समक्ष जब यह शिकायत आई तो उन्होंने मंच से ही सार्वजनिक तौर पर मेले में उपस्थित अभिभावकों और दुकानदारों को संबोधित करते हुए कहा कि जो किताब इस मेले में उपलब्ध नहीं होगी वह किताब स्कूलों में लागू नहीं होगी। निजी स्कूल वालों को अपने पाठ्यक्रम में शामिल पुस्तकों को बदलना होगा। किसी भी प्रकार की साठगाँठ और मोनोपॉली नहीं चलने दी जाएगी।
मेले में जो किताब उपलब्ध नहीं उन्हें स्कूल पाठ्क्रम से हटा दें
कलेक्टर दीपक सक्सेना ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मेले में जो किताबें उपलब्ध नहीं हैं वह किसी भी निजी स्कूलों में लागू नहीं होंगी। निजी स्कूल मेले में उपलब्ध होने वाली किताबों को ही अपने पाठ्यक्रम में शामिल करें। इसके लिए उन्हें जरूरत है तो वह अपने पाठ्यक्रम में किताबों का बदलाव करें और इस बात की सूचना 24 घंटे या 72 घंटे के अंदर जिला शिक्षा अधिकारी को दें।
अभिभावक थोड़ा धैर्य रखें, व्यवस्था सुधारने में समय लगेगा
कलेक्टर दीपक सक्सेना ने अभिभावकों को चिंता मुक्त रहने और थोड़ा इंतजार करने की सलाह दी है। कलेक्टर ने कहा कि प्रशासन अपना काम कर रहा है। व्यवस्था को सुधारने में थोड़ा समय लगेगा जरूरत पड़ी तो हम मेले को एक दिन या दो दिन और आगे बढ़ा सकते हैं इसमें किसी प्रकार की परेशानी नहीं हैं। हमारा उद्देश्य अभिभावकों को और बच्चों को राहत दिलाना है और इस व्यवस्था को सुधारना है।
सुधरने का एक मौका  है सुधर जाएं
कलेक्टर दीपक सक्सेना ने मेले में स्पष्ट रूप से कहा कि निजी स्कूल संचालक प्रकाशकों और किताब विके्रताओं की मिलीभगत सबके समक्ष आ चुकी है। यह प्रशासन की ओर से उन्हें अंतिम अवसर दिया जा रहा है सुधरने का। एक मौका है वह सुधर जाएं और यह मुनाफाखोरी की मोनोपोली को समाप्त कर दें अन्यथा कठोर कार्रवाई की जाएगी।

Jai Lok
Author: Jai Lok

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