
शिकायत के बाद पुलिस अधीक्षक
ने तत्परता से कराई कार्रवाही
जबलपुर (जयलोक)। आखिरकार सात दिनों बाद सिहोरा तहसील के अंतर्गत सिहोरा के ग्राम कटरा में अवैध रेत खदान धसकने से मारे गए तीन गरीब मजदूरों और 6 घायल हुए लोगों को पुलिस के प्रति इंसाफ दिलाने की उम्मीद जाग गई है। मृतकों के परिजनों और घायलों द्वारा पुलिस अधीक्षक आदित्य प्रताप सिंह से लिखित शिकायत करने के बाद अब सिहोरा अनुविभाग के गोसलपुर थाने में पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए इस मामले में तीन लोगों को आरोपी बनाया है। जिनके खिलाफ गैर इरादतन हत्या के तहत धारा 304, 308, 34 आईपीसी का मामला दर्ज किया गया है। इसमें एक भाजपा का मंडल अध्यक्ष अंकित तिवारी, मोनू भदौरिया सहित एक अन्य व्यक्ति भी शामिल है।
ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपकर यह खुलासा किया था कि पाँच जून को जिस अवैध रेत खदान धसकने से तीन लोगों की दबकर मौत हो गई थी और 6 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। उस अवैध खदान को अंकित तिवारी उर्फ कान्हा सरकार द्वारा अवैध रूप से संचालित किया जा रहा था। इस मामले में जाँच पड़ताल के दौरान एक भाजपा के स्थानीय नेता अंकित तिवारी का नाम सामने आया था इस खबर को जय लोक ने प्रमुखता से प्रकाशित कर मृतकों के पक्ष में न्याय का विषय उठाया था।
5 साल से चल रही थी अवैध खदान तो कहाँ था प्रशासनिक अमला
तीन लोगों की मौत के मामले में बहुत सारे सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक के परिजनों ने बताया कि वे पाँच साल से इस अवैध खदान में काम कर रहे थे। गरीब मजदूरों को तीन सौ रूपये मजदूरी का लालच देकर यह काम करवाया जा रहा था। अब अगर यह मान लिया जाए कि यह अवैध खदान पाँच सालों से संचालित हो रही थी तो सीधे तौर पर खनिज विभाग, एसडीएम सिहोरा, तहसीलदार सिहोरा, रक्षित निरीक्षक, हल्का पटवारी भी इन तीन मौतों के लिए उतनी ही जिम्मेदार हैं क्योंकि साम दाम के प्रभाव में आकर अगर इस अवैध खदान को इतने वर्षों से संचालत होने दिया गया तो मृतकों के परिजनों द्वारा इन सभी के विरुद्ध भी गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज करने और मृतकों को न्याय दिलाने की माँग बिलकुल उचित है।
थाने में जाँच पर उठे सवाल, बड़े अधिकारियों से कराई जाँच
तीन लोगों की मौत के मामले में राजनैतिक संरक्षण और भाजपा के संगठन पदाधिकारियों के नाम आने के बाद मृतकों और घायलों के परिजनों ने इनके द्वारा पुलिस कार्रवाही में दबाव डालकर व्यवधान उत्पन्न करने के आरोप भी लगाए और कहा कि गोसलपुर थाने में चल रही जाँच की भूमिका संदेह के दायरे में हैं। इसलिए किसी वरिष्ठ अधिकारी को जिम्मेदारी देकर इस पूरे मामले की जाँच की जाना चाहिए ताकि मृतकों और घायलों को इंसाफ मिल सके। कल यह बात भी सामने आई थी कि हादसे का शिकार हुए लोगों के परिजन जब गोसलपुर थाने पहुँचे तो उन्हें शिकायत लेने के लिए काफी भटकाया गया जिसके बाद वो अपनी गुहार लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुँचे।
आखिर विधायक, एसडीम, तहसीलदार ने क्यों नहीं सुनी शिकायतें
कल पुलिस को सौंपी गई शिकायत में इस बात का भी स्पष्ट उल्लेख था कि ग्रामवासियों, सरपंच, सचिव, कोटवार , जनपद सदस्य द्वारा विगत 5 वर्षों में सिहोरा अनुभाग के विधायक, अनुविभागीय अधिकारी सिहोरा, तहसीलदार सिहोरा आदि को सैकेंड़ो बार लिखित एवं मौखिक एवं दूरभाष पर शिकायतें दी थीं। अब बड़ा सवाल यह भी उठता है कि आखिर क्यों इन लोगों ने जिम्मेदारी से इस गंभीर शिकायत की सुनवाई नहीं की और ना ही इस शिकायत पर कोई उचित कदम उठाया।
सिहोरा में अवैध उत्खनन का सच हुआ उजागर
पाँच जून को अवैध धसकने से मारे गए तीन लोगों की मौत का हल्ला मचा तो बेशर्मी से खनन माफिया को संरक्षण देने वाला स्थानीय प्रशासनीय अमला अपनी सक्रियता प्रदर्शित करने के लिए मैदान में उतर पड़ा। वाहवाही लूटने के चक्कर में राजस्व, पुलिस और खनिज विभाग की टीम ने पाँच दिनों की कार्रवाही का आंकड़ा प्रस्तुत करते हुए यह बताया कि उनके द्वारा 121 ट्रॉली अवैध रेत जप्त की गई। यह चार सौ घन मीटर से ज्यादा रेत है। एसडीएम और एसडीओपी की अगुवाई में यह कार्रवाही की गई। अवैध खदानों के मामले में सीधी जिम्मेदारी खजिन विभाग और अनुविभागीय दंडाधिकारी की होती है क्योंकि शासन की इस संपदा की रक्षा करना उनका कर्तव्य है। उनके द्वारा सूचित करने पर पुलिस कार्रवाही करती है। लेकिन जप्ती के इस आंकड़े से यह बात तो साबित हो गई है कि सिहोरा, मझौली, पाटन क्षेत्रों में अवैध खनन माफिया प्रशासन पर हावी है। इन कार्रवाहियों के दौरान चार प्रकरण ऐसे भी बनाए गए जहाँ निजी भूमि पर बिना अनुमति के अवैध रूप से उत्खनन का कार्य किया जा रहा था। इन कार्रवाहियों से इस क्षेत्र में फैले अवैध उत्खनन का सच निकलकर सामने आ चुका है। कल प्रशासन ने मझौली तहसील के तीन स्थानों पर छापा मारकर रेत का अवैध भंडारण जप्त किया।
बस छुटपुट कार्रवाही ही की जा रही
सार्वजनिक तौर पर यह जानकारी सामने आई है कि सिहोरा की पॉलीवॉल कॉलोनी के सामने बहुत बड़ी मात्रा में रेत का भंडारण नजर आता है। इसके पीछे कुछ बड़े नाम भी सामने आते हैं। प्रशासन की टीम छोटी मोटी कार्रवाही कर टे्रक्टर ट्रॉली के नाप की रेत तो पकड़ रही है लेकिन बड़े भंडारण की जाँच करने की हिम्मत नहीं दिखा पा रही है।
प्रशासनिक लापरवाही की कौन तय करेगा जिम्मेदारी?
पुलिस ने ग्रामीणों के द्वारा अवैध खदान संचालन करने वालों के नाम से शिकायत देने के बाद उनके खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। लेकिन एक बड़ा सवाल यह भी है कि इन अवैध खदानों को संचालन की आँख बंद करके मौन सहमति देने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कौन करेगा? उन पर क्या कार्रवाही की जाएगी?

Author: Jai Lok







