
जबलपुर (जयलोक)। टेलिकॉम फैक्ट्री की नीलामी और इस 74 एकड़ भूमि में लगे आवासीय और हरियाली वाले क्षेत्र को लेकर पूरे शहर में हल्ला मचा हुआ है। लेकिन जब इस पूरी खबर और चल रहे घटनाक्रम को बारीकी से समझा जाये तो यह बिलकुल स्पष्ट है कि अभी टेलिकॉम फैक्ट्री की नीलामी बहुत दूर की कौड़ी है। ऐसा इसलिए है कि इस 74 एकड़ भूमि में अभी कई तरह के पेंच फंसे हुए हैं। इस भूमि में मध्य प्रदेश शासन और भारतीय संचार निगम लिमिटेड के बीच में न्यायालीन मुकदमा चल रहा है। मध्य प्रदेश शासन उच्च न्यायालय से प्रकरण जीत चुका है और भारतीय संचार निगम लिमिटेड के द्वारा इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती दी गई है। 74 एकड़ में से तकरीबन 26 एकड़ भूमि आवासीय मद के लिए मध्य प्रदेश शासन द्वारा स्वीकृत की गई थी। जिसे बाद में फैक्ट्री बंद होने एवं मूल उद्देश्य से हटकर विक्रय करने के कारण इसका आवंटन मध्य प्रदेश शासन द्वारा निरस्त कर दिया गया था। इसी बात को लेकर मुकदमा न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। टेलिकॉम फैक्ट्री की 74 एकड़ भूमि में जो 18 हजार से ज्यादा घने पड़े लगे हैं और जिनको शहर की प्राण वायु ऑक्सीजन देने वाला फेफड़ा भी कहा जा रहा है उसको तात्कालिक रूप से कोई नुकसान नहीं होने वाला है।
केंद्र सरकार ने 2021 में अपने एसेट मोनेटाइजेशन पॉलिसी के तहत बंद पड़ी टेलीकॉम फैक्ट्री की संपत्ति की नीलामी की प्रक्रिया प्रारंभ की थी। केंद्र सरकार का अनुमान है कि मध्य प्रदेश में 1934 में शुरू हुई टेलीकॉम फैक्ट्री की विभिन्न इकाइयों के अधीन आने वाली अलग आवासीय योजना के तहत आवंटित की गई भूमि को अब नीलाम करके 5000 करोड़ से अधिक की राशि एकत्रित की जा सकती है। न्यायालय मैं चल रहे प्रकरण में कई प्रकार की कमियां भी सामने आ रही हैं। बहुत सारी पुरानी फाइलें और दस्तावेज रिकॉर्ड में नहीं होने के कारण भी अड़चने बनी हुई हैं।
गाइड लाइन रेट का कभी मसला
जानकारों का कहना है कि इस पूरे मामले में एक बहुत बड़ी अड़चन यहां मौजूद संपत्ति के नीलामी के आफसेट भाव पर भी बनी हुई है। वर्तमान समय में टेलीकॉम फैक्ट्री की भूमि प्रति वर्ग फुट के हिसाब से 12 से 15000 रुपए स्क्वायर फीट की कीमत रखती है, लेकिन नीलामी सूचना में जो ऑफसेट कीमत रखी गई है वह पुरानी कलेक्ट्रेट गाइडलाइन रेट से रखी गई है। बीएसएनएल के कर्मचारियों द्वारा इस बात का भी विरोध किया जा रहा है कि पुरानी कीमतों में मूल्यवान संपत्ति की नीलामी क्यों निकाली गई है। यह सीधे तौर पर शासन को हानि पहुंचाने वाला कार्य है।
सुप्रीम कोर्ट में लंबित है मामला
इस पूरे प्रकरण में यह महत्वपूर्ण जानकारी भी सामने आई है कि भारतीय संचार निगम मध्य प्रदेश शासन के बीच भूमि आवंटन को लेकर जो विवाद की स्थिति है वह अब सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। कुल 74 एकड़ भूमि में से तकरीबन 26 एकड़ भूमि का आवंटन मध्य प्रदेश शासन ने निरस्त कर भूमि वापस ले ली है। इसी विषय को लेकर दोनों पक्ष हाई कोर्ट गए थे। हाई कोर्ट से मध्य प्रदेश शासन के पक्ष में फैसला हो जाने के बाद संचार निगम लिमिटेड ने इस पूरे मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। जहां पर यह मामला लंबित है।
नीलामी में सब कुछ एक साथ, इसलिए आएगी अड़चन
जानकारों का कहना है इस नीलामी प्रक्रिया में बहुत सारी तकनीकी खामियां अभी से नजर आ रही हैं। टेलीकॉम फैक्ट्री की ओर से जो नीलामी ऑनलाइन आमंत्रित की गई है उसमें न्यायालय में विचाराधीन 26 एकड़ भूमि को भी शामिल किया गया है। उक्त भूमि के संबंध में अभी कोई भी अंतिम निर्णय नहीं आया है। इसलिए यह बहुत स्पष्ट है कि यह नीलामी प्रक्रिया कई तकनीकी अड़चनों के कारण भी अटक जाएगी।
भूमिका का कम हुआ है रकबा
टेलीकॉम फैक्ट्री की भूमि का पहले चार नंबर गेट से स्नेह नगर की ओर जाने वाली सडक़ बनाने के लिए भूमि का अधिग्रहण किया गया। उसके बाद वर्तमान में फ्लाईओवर के लिए भी बड़े हिस्से की भूमि शासन द्वारा ली गई। यह रकबा टेलीकॉम फैक्ट्री के अधीनस्थ भूमि में से ही काम हुआ है।
कब्जे बहुत बड़ी समस्या
एक बहुत बड़ी समस्या इस भूमि पर कई सालों से या यह कहें कई दशकों से रह रहे सैकड़ो हजारों लोगों के कब्जे की भी नजर आ रही है। शासकीय जमीन पर यह कब्जे बहुत पुराने हो चुके हैं और कुछ स्थानों पर तो पक्के निर्माण भी हो चुके हैं जहां कई दशकों से परिवार रह रहे हैं। जब भी यह नीलामी प्रक्रिया पूर्ण होगी और टेलीकॉम फैक्ट्री की यह भूमि नीलाम होकर निजी हाथों की ओर जाती है तो उस समय भी बड़ी संख्या में मौजूद कब्जों को हटाना आसान बात नहीं होगी।

Author: Jai Lok







