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क्या हाईकोर्ट से बड़ी है पुलिस : हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी दर्ज नहीं हुई एफआईआर, आवेदक ने खुद दी पुलिस को प्रमाणित प्रति

जबलपुर (जयलोक)
शहर में चर्चित हाई प्रोफाइल बिल्डरों के बीच हुई धोखाधड़ी के मामले में ओमती पुलिस की भूमिका संदिग्ध बनी हुई है। कल रात ओमती थाने में इस बात को लेकर जमकर हो हंगामा भी हुआ था। इस हंगामें के बाद पुलिस के अधिकारियों ने आवेदक को आश्वासन दिया था कि वह आज सुबह उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार एफआईआर दर्ज कर लेंगे।
इस बीच में पुलिस द्वारा यह भी कहा जा रहा था कि उन्हें उच्च न्यायालय से जारी हुए आदेशों की प्रति प्राप्त नहीं हुई है। जिस पर आवेदक राजेश जैन की ओर से उच्च न्यायालय के आदेश की प्रमाणित प्रति पुलिस अधीक्षक कार्यालय से लेकर सीएसपी ओमती और थाना प्रभारी ओमती तक को सौंप दी गई है। लेकिन इसके बावजूद भी धोखाधड़ी के आरोपी बिल्डर चैतन्य सिटी के मालिक आरके प्रमोटर एवं डेवलपर फर्म के पार्टनर आदर्श अग्रवाल और सुशील निगम के खिलाफ  एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।
किस बात का दबाव है पुलिस पर
आवेदक राजेश जैन पिंकी, नीरज गुप्ता और ओमप्रकाश अग्रवाल को एक ही जमीन बेचने एवं धोखाधड़ी करते हुए इनसे 20 लाख, 45 लाख, 65 लाख रुपये हड़प कर लेने के आरोपी बिल्डरों पर कार्यवाही करने से पुलिस बचती नजर आ रही है। सामान्य मामलों में तो कोर्ट का आदेश होते ही तत्काल उसका परिपालन पुलिस द्वारा कर दिया जाता है। लेकिन बिल्डर के  खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश के इस मामले में ओमती थाना पुलिस उच्च न्यायालय के निदेर्शों से ज्यादा अपने वरिष्ठ अधिकारियों की टिप्पणी लिखवाने को ज्यादा महत्व दे रही है। हाईकोर्ट के आदेश पर परिपालन करने के लिए पुलिस के उच्च अधिकारी की ओर से अभी तक कोई टिप्पणी नहीं लिखी गई है। जिसके कारण 4 दिन बाद भी उच्च न्यायालय के निदेर्शों का पालन नहीं किया जा रहा है।

Jai Lok
Author: Jai Lok

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