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मुख्यमंत्री की मंशा अनुरूप जिला प्रशासन का पायलट प्रोजेक्ट, प्रशासनिक कैलेंडर का हिस्सा बनेगा पुस्तक मेला, अगले वर्ष से रहेगी हर सुविधा

उम्मीद से अधिक सफल हुआ पुस्तक मेला, तिथि 

बढ़ाने शाम को हो सकता है निर्णय

जबलपुर (जयलोक)। पूरे प्रदेश में शिक्षा माफिया द्वारा अभिभावकों को लूटने की शिकायत के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने प्रदेश के सभी जिले के अधिकारियों को निर्देशित किया था कि वह अपने-अपने क्षेत्र में शिक्षा को व्यापार बनाकर और माफिया के रूप में काम कर रहे लोगों को चिन्हित करें और उनके सिंडिकेट को तोडऩे का कार्य करें। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप शिक्षा को व्यापार बनाकर कार्य कर रहे लोगों के खिलाफ  पूरे प्रदेश भर में कार्यवाही की गई। जबलपुर इस कार्यवाही में अग्रणी भूमिका में नजर आ रहा है क्योंकि जिला कलेक्टर दीपक सक्सेना ने इस समस्या से निपटने के लिए इसकी जड़ पर प्रहार करते हुए एक ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था बनाने का जिम्मा उठा लिया जिससे भविष्य में भी बच्चों और उनके अभिभावकों को शिक्षा के क्षेत्र में माफिया के रूप में कार्य कर रहे लोगों के चंगुल में ना फंसना पड़े। सकारात्मक सोच के साथ पुस्तक मेले का आयोजन पायलट प्रोजेक्ट के रूप में किया गया। जिला प्रशासन के इस अभिनव प्रयास को शहर की जनता ने अपेक्षा से अधिक समर्थन दिया और हजारों की संख्या में लोग इस मेले में कॉपी किताबें, स्टेशनरी का सामान, यूनिफॉम लेने पहुँचे। इस मेले को आगे बढ़ाया जाना है या नहीं इस बात का निर्णय आज शाम को जिला प्रशासन द्वारा समीक्षा के उपरांत लिया जाएगा। लेकिन यह बात तय है कि अगले वर्ष से पुस्तक मेले को प्रशासनिक कैलेंडर का अधिकृत रूप से हिस्सा बनाया जाएगा और जनवरी से इसकी तैयारियाँ प्रारंभ होगी स्कूलों से उनके पाठ्यक्रम में शामिल पुस्तकों का विवरण दिया जाएगा और मार्च में व्यवस्थित रूप से पुस्तक मेले का आयोजन होगा।
कलेक्टर दीपक सक्सेना की मंशा बिल्कुल स्पष्ट थी कि निजी स्कूल प्रकाशकों और पुस्तक विके्रताओं के सिंडिकेट को तोडऩा है। ऐसी व्यवस्था निर्मित करना है जिससे इस वर्ष भी और आने वाले वर्षों में भी बच्चों और उनके अभिभावकों को इस लूट का शिकार होने से बचाया जा सके। कलेक्टर की मंशा अनुरूप सुनियोजित ढंग से इस पूरी कार्यवाही को आगे बढ़ाया गया। निजी स्कूल के संचालकों के साथ बैठक की गई, उन्हीं की समिति का गठन कर सुझाव आमंत्रित किए गए, पुस्तक विके्रताओं के यहां ताबड़तोड़ तरीके से जाँच की कार्यवाही की गई, अभिभावकों से विभिन्न स्कूलों और सामने आ रही वास्तविक परेशानियों से संबंधित शिकायतों को सीधे कलेक्टर ने अपने व्हाट्सएप नंबर पर आमंत्रित किया। इन सब बातों के बाद जो सर्वाधिक विवादित बिंदु निकलकर सामने आए उनके निष्कर्ष के लिए पुस्तक मेले का आयोजन किया गया।

                                    खुली चेतावनी देकर स्पष्ट की प्रशासन की मंशा

मेले के आयोजन के दौरान इस प्रकार की बातें सामने आई की कुछ पुस्तक विके्रता मेले में स्टॉल लगाने के बावजूद भी अभिभावकों को मेल के बाद दुकान से ही पुस्तक लेने के लिए विवश कर रहे थे। इसके बाद कलेक्टर दीपक सक्सेना ने मेले में ही मंच से प्रशासन की मंशा को स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की मोनोपोली नहीं चलने दी जाएगी और जो किताब इस मेले में उपलब्ध नहीं होगी वह किसी भी स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल भी नहीं होगी। इस स्थिति के बाद सिंडिकेट चलाकर अभिभावकों को लूटने की मंशा रखने वाले लोगों के हौसले पस्त हुए और बड़ी संख्या में मेले में शामिल होने आ रहे अभिभावकों को राहत मिल सकी।

                  70 प्रतिशत अभिभावक पहले ही कर चुके हैं खरीदी

यह बात भी सामने आई कि इस बार पुस्तक मेले का आयोजन कुछ विलंब से हो पाया जिसके कारण जिले के तकरीबन 70 प्रतिशत अभिभावकों ने पहले ही महंगे दामों पर कॉपी किताब और स्टेशनरी खरीद ली थी। उनके सामने प्रशासन ने यह विकल्प उपलब्ध कराया है कि वे चाहे तो किताबों को वापस कर न्यूनतम दर पर उपलब्ध हो रही किताबों को खरीद सकते हैं।

इनका कहना है

प्रशासनिक कैलेंडर का हिस्सा बनेगा पुस्तक मेला

हमारा स्पष्ट उद्देश्य है कि एक ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे ना तो अभिभावकों को और ना ही बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़े। किसी की मिलीभगत या मोनोपॉली ना चले और सामान्य दरों पर कॉपी किताब स्टेशनरी, यूनिफॉर्म आम आदमी को उपलब्ध हो सके। पुस्तक मेले के सफल परिणाम के बाद हम इस तैयारी की ओर बढ़ रहे हैं कि इस पुस्तक मेले को प्रशासनिक कैलेंडर में शामिल किया जाए और प्रतिवर्ष तय समय पर नए शैक्षिक क्षेत्र की शुरुआत के पूर्व इसका आयोजन हो सके। इस स्थाई व्यवस्था से भविष्य में अभिभावकों को लाभ मिलेगा।
                                                                                                                                            दीपक सक्सेना, कलेक्टर जबलपुर

मील का पत्थर साबित होगा यह मेला

जबलपुर कलेक्टर की मंशा अनुरूप पुस्तक मेले को जिला प्रशासन ने पायलट प्रोजेक्ट के रूप में क्रियान्वित किया। प्रदेश में पहली बार इस दिशा में प्रयास हुआ है। जिन बातों की कमी रह गई है उन्हें अगले वर्ष से समय पूर्व पूरा करते हुए पूरी व्यवस्थाओं के साथ इस मेले का आयोजन होगा। प्रशासन की मंशा स्पष्ट है कि अभिभावकों और बच्चों को किसी भी प्रकार की लूट से बचाना है और अच्छी शिक्षा व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करवाना है। मेले को अभिभावकों के सहयोग ने सफल बनाया है। मेले की तिथि बढ़ाई जाने का निर्णय आज शाम को कलेक्टर महोदय की समीक्षा बैठक के बाद लिया जाएगा।                                                                  मीशा सिंह, एडीएम जबलपुर

Jai Lok
Author: Jai Lok

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