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कहो तो कह दूँ ….

रोटी पलटना जरूरी होता है वरना वो जल जाती है, नीतीश उवाच…
‘रोटी पलटना जरूरी होता है वरना वो जल जाती है’ इस वाक्य पर अपने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बड़ा भरोसा है उनका मानना है कि पलटना और कुलाटी खाना स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर होता है और राजनीति के लिए भी। कल तक जिस गठबंधन के संयोजक बनने वाले थे और कहते थे ‘मैं मर जाना पसंद करूंगा लेकिन बीजेपी के साथ नहीं जाऊंगा’ वे ही आज बीजेपी की गोद में बैठकर मंद मंद मुस्कुरा रहे हैं और उनके साथी, दूसरी पार्टी के लोग अवाक हैं। वैसे भी राजनीति की डिक्शनरी में भरोसा, सुचिता, सिद्धांत ये तमाम शब्द पहले से ही निकाल दिए गए हैं जो कुछ है वो है सत्ता का सुख और उसके लिए जो कुछ भी करना पड़े उसके लिए राजनेता तैयार रहते हैं और क्यों ना रहें, सत्ता की मलाई की जो आदत पड़ जाती है वो कैसे छूट सकती है, नौवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार के बारे में तो बिहार के लोग कहते हैं कि वोट चाहे आरजेडी को दो, जदयू को दो, कांग्रेस को दो, बीजेपी को दो लेकिन मुख्यमंत्री तो नीतीश कुमार ही बनेंगे और इस बात को सिद्ध भी कर दिया है अपने नीतीश कुमार जी ने। पहले यह कहा जाता था की रामविलास पासवान बड़े भारी मौसम विज्ञानी हैं राजनीति का मौसम देखते ही ऐसी पलटी मारते हैं कि घूम फिर कर सत्ता उनके साथ होती है लेकिन उनके रिकॉर्ड को भी नीतीश बाबू ने तोड़ दिया, लालू हों, राहुल हों, ममता हों सीताराम येचुरी हों, उद्धव ठाकरे हों, या फिर अरविंद केजरीवाल हों सबको ऐसा ठेंगा दिखाया कि वे सोच भी नहीं पाए कि ‘ये क्या हुआ, कैसे हुआ, कब हुआ, क्यों हुआ’ मानते हैं अपन नीतीश बाबू को, राजनीति तो होती ही राज करने के लिए और उसमें सिद्ध हस्त अगर कोई नेता है तो वो हैं सुशासन बाबू नीतीश कुमार। राजनीति में तो यह कहा जाता है कि सुबह आप किसी को गाली देते हो तो हो सकता है शाम को उसके गले लग जाओ दूसरे दिन सुबह फिर हो सकता है आप उसको गिन-गिनकर गालियां दो। अपने को तो लगता है बीजेपी को छोडक़र तमाम राजनीतिक दलों को अब राजनीति करना ही छोड़ देना चाहिए क्योंकि उनके हाथ में अब कुछ बचा नहीं है जो कुछ बचा था वह नीतीश बाबू ले गए। बीजेपी तो उन पर लंबे समय से डोरे डाल ही रही थी क्योंकि वह जानती थी कि नीतीश बाबू के लिए पलटी लेना बाएं हाथ का खेल है, और यही हुआ बेचारे गठबंधन के नेता देखते ही रह गए और नीतीश बाबू सुबह इस्तीफा देखकर शाम को फिर से मुख्यमंत्री की शपथ लेकर गद्दी पर बैठ गए अपना सोचना तो ये है कि तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं को नीतीश बाबू को अपना गुरु मान लेना चाहिए और उनके चरण पडक़र उनसे यह गुण सीखना चाहिए की सत्ता में कैसे बना रह सकता है।
अब कथा ही करना बेहतर
दस बार के विधायक गोपाल भार्गव जी आजकल भगवा वस्त्र पहनकर कथा वाचक बन गए हैं उनका कहना है की सब कुछ झूठा है, झूठी दुनिया झूठे वादे, सब कुछ झूठ ही झूठ है। इस कलयुग में अब भार्गव जी करें भी तो करें क्या? क्या-क्या सपने देखे थे कि एक बार मुख्यमंत्री की कुर्सी उनके नीचे आ जाएगी कहते भी थे कि इतने बार का विधायक हूँ किसी मुख्यमंत्री से कम थोड़ी ना हूं लेकिन पार्टी ने ऐसा झटका दिया कि मुख्यमंत्री तो छोड़ो मंत्री बनने तक के लाले पड़ गए, तो करें क्या सो कथा सुनाना शुरू कर दिया। कथा में यही बताया जाता है कि माया मोह में कुछ नहीं रखा है, किसी भी चीज के पीछे भागो मत, जो मिला है उसी को मुकद्दर समझ लो, जिंदगी चार दिन की है काहे के लिए इतनी मारामारी करते हो, अब यही सब वे जनता को बता रहे हैं और इसे अपने लिए भी महसूस कर रहे हैं। राजनीति में भी इंसान सोचता कुछ है और होता कुछ है अपने मामा को ही देख लो सत्रह साल मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान होने के बाद आज उनकी हालत कितनी पतली है। दर्द और पीड़ा इतनी है जो उनके बयानों से निकल निकल कर आ रही है लेकिन अब क्या होगा जो कुछ होना था वह हो गया अब पांच साल तक विधायक बने रहो अगली बार देखा जाएगा कि आपको क्या मिल सकता है भार्गव जी आप तो कथा करो, आजकल कथा वाचकों का भी जलवा किसी राजनेता से कम नहीं है एक बार दुकान चल पर निकले फिर देखो जो आज आपको इग्नोर कर रहे हैं वे आपका कैसे चरण चुंबन करते हैं।
और पहनो बरमूडा और हाफ  पैंट
एक नई खोज सामने आई है जिसमें बताया गया है कि डेंगू का मच्छर महिलाओं की तुलना में पुरुषों को ज्यादा काटता है, अब पुरुष भारी परेशान है कि अभी तक तो ये सुना था कि महिलाओं का खून ज्यादा मीठा होता है फिर ये डेंगू वाले मच्छर हमारे पीछे क्यों लगे हैं तो भैया हम बताएं देते हैं आप पहनते हो हाफ पेंट और बरमूडा डेंगू का मच्छर घुटने से ऊपर जा नहीं पाता, महिलाएं पहनती है सलवार सूट, साड़ी उसमें उनकी टांगें ढकी रहती है आप अपनी टांगें खोल कर बैठोगे तो डेंगू का मच्छर आपको नहीं तो किसको काटेगा? किसने कहा था कि बरमूडा या हाफ  पेंट पहनो, फुल पेंट, पजामा जींस ये भी तो आप ही के लिए बनाए गए हैं लेकिन आपको तो बरमूडा और हाफ  पेंट में ही आनंद आता है तो फिर भोगो। जब डेंगू के मच्छरों को खुद ही निमंत्रण दोगे तो वो आपको क्यों छोड़ेंगे, आज से कसम खा लो कि चाहे कुछ भी हो जाए ना तो हम हाफ  पेंट पहनेंगेऔर ना ही बरमूडा। फुलपेंट, पजामा, जींस पहनो और खुलेआम डेंगू के मच्छरों को चुनौती दे दो कि आओ बेटा, देखें कैसे हमारा खून चूसते हो ना वह आपके चरणों पर गिर के माफी मांगने लगे तो कहना।
सुपरहिट ऑफ  द वीक
‘तुमने ऐसा क्या मुझमें देखा था कि तुम पहली बार में ही मुझसे शादी के लिए तैयार हो गई’। श्रीमान जी ने श्रीमती जी से पूछा
‘दरअसल, मैंने शादी से पहले आपको बालकनी में एक-दो बार कपड़े धोते और बर्तन मांजते हुए देखा था’। श्रीमती जी ने उत्तर दिया

Jai Lok
Author: Jai Lok

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