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कहो तो कह दूँ …जिसका गुरु बलवान, उसका चेला पहलवान….

(जय लोक)
ज्योतिष शास्त्र में ‘गुरु’ ग्रह का बड़ा महत्व बताया जाता है कि जिसका गुरु बलशाली होता है वो व्यक्ति जीवन में बहुत उन्नति करता है, गुरु के बारे में तो यह भी कहा जाता है कि ‘गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागु पांव बलिहारी गुरु आपकी गोविंद दियो बताए’ यानी गुरु को गोविंद से भी ज्यादा बड़ा माना गया है क्योंकि गुरु ही गोविंद के पास ले जाने का रास्ता बताता है। गुरु की तो बचपन से ही लेकर बड़े तक इंपॉर्टेंस रहती है गुरुजी हो या, मासाब, या टीचर जी या फिर सर ये तीनों बचपन में पहाड़ा याद न करने के कारण अच्छी खासी फुड़ाई करते थे यानी गुरु का महत्व आज से नहीं बरसों से चला रहा है। कहते हैं ना कि मैंने गुरु दीक्षा ले ली है या गुरु दक्षिणा दे दी है, आजकल राजनीति में भी गुरु का बड़ा जलवा चल रहा है, जिसका भी गुरु राजनीति में बलवान होता है उसका चेला अपने आप ही राजनीति का पहलवान बन जाता है आपको कोई भले ही ना जानता हो, आपकी राजनीति में कोई औकात ना हो, आपने जिंदगी में कभी चुनाव ना लड़ा हो लेकिन यदि आपका राजनीतिक गुरु राजनीति के शिखर पर है तो फिर आपको कुछ आता जाता हो ना हो लेकिन वो गुरु आपको कहां से कहां पहुँचा दे कोई नहीं कह सकता, अपन ने तो अपने ही शहर में ऐसे कई नेता देखे हैं जिनके गुरु का जलवा राजनीति में रहा है और देखते ही देखते उनके चेले भी राजनीति के आसमान पर छा गए, वैसे भी राजनीति में योग्यता का कोई मोल तो बचा नहीं है, आप कितनी उठा पटक कर सकते हो, कितने दंद फंद के सूत्र आपके अंदर विराजमान है, आपका कहां-कहां जुगाड़ है ये सब मायने रखता है और फिर सबसे बड़ी बात जो हम पहले भी कह रहे हैं कि ऐसा गुरु पकड़ो जो ऊपर तक पहुँच रखता है जिस दिन ऐसा गुरु पकड़ लोगे उस दिन आप भी पहलवान बन जाओगे क्योंकि हर गुरु चाहता है कि उसके पचीसों चेले बने रहे जो उसकी जय जयकार करते रहें अब जब जय जयकार करवाना है तो चेलों को भी तो कुछ ना कुछ प्रसाद बांटना पड़ेगा सो गुरु भी अपने खास चेलों को कुछ ना कुछ ऐसा दे देता है कि वे चेले जिंदगी भर के लिए उसके हो जाते हैं फिर वो चेला कुछ समय बाद गुरु बनकर अपने चेले बना लेता है इस तरह से एक गुरु के सैकड़ो चेलों की एक श्रृंखला बन जाती है, लेकिन ये बात सत्य हैं कि अगर आपको राजनीति में आना है तो आपको किसी बड़े नेता को अपना गुरु बनाना ही पड़ेगा तब तो आप राजनीति में एडमिशन ले सकते हो वरना करते रहो जिंदगी भर समाज सेवा, प्रदर्शन आंदोलन कोई आपको पूछने वाला नहीं ये बात तो मान लो।
इसमें भी नंबर नहीं लग पाया
महाकौशल की राजधानी का तमगा लिए हुए घूमने वाला जबलपुर हर चीज में फिसड्डी रह जाता है इंदौर हो, भोपाल हो, ग्वालियर इन सब की तुलना में जबलपुर की स्थिति आज भी कस्बे जैसी है लोग भले ही इसे संस्कारधानी कहकर अपने आप को बड़ा गर्वित महसूस करते हों लेकिन वास्तविकता क्या है ये जबलपुर का हर व्यक्ति अच्छी तरह से जानता है। अब देखो ना सरकार कुछ शहरों को भिखारी मुक्त करना चाहती है और जो लिस्ट जारी हुई है उसमें फिर से इंदौर शामिल हो गया है यानी जबलपुर भिखारियों का शहर बना ही रहेगा और क्यों न बना रहे, यहां के नेताओं में दम ही नहीं है उन्हें हर चीज के लिए सरकारों से भीख ही तो माँगना पड़ती है यही हाल जनता का है वो अपने नेताओं से भीख माँगती है कि भैया थोड़ा बहुत डेवलपमेंट कर दो, महापौर से कहती है अतिक्रमण हटवा दो, नगर निगम से भीख मांगती है कि सडक़ें सुधनवा दो  लेकिन कोई भी भीख देने तैयार नहीं तो जब यहां भिखारियों की फौंज है तो इसे भिखारी मुक्त शहर कैसे किया जा सकता है शायद यही सोचकर सरकार ने जबलपुर को भिखारी मुक्त शहर बनाने की लिस्ट में शामिल नहीं किया अपना मानना तो ये है कि एक हिसाब से तो यह अच्छा ही हुआ कि हमें भिखारी मुक्त शहर की श्रेणी में नहीं रखा गया वरना अभी तक जो थोड़ा बहुत भीख में मिल जाता है वो भी कहो मिलना बंद हो जाता, इसलिए भैया इसे तो ‘भिखारीयुक्त’ शहर की लिस्ट में ही रहने दो हमें नहीं बनना है भिखारी मुक्त शहर।
और कर लो जाँच
कुछ सरकारी अफसरों को ईमानदारी का बड़ा शौक चढ़ जाता है, अरे भैया दुनिया जिस तरफ  चल रही है उस तरफ  आप भी चलते चलो, किसी बड़े आदमी की गड़बड़ी की तरफ झांको भी मत, अपनी दोनों आंखें बंद कर लो क्योंकि आपने अपनी आंखें खोली और उस पर तरेरी तो समझ लो आपका काम डल गया, इसी तर्ज पर सिहोरा की एसडीएम एक विधायक के प्लांट की जाँच करने क्या पहुँच गई विधायक जी का पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया। मेरे प्लांट की जाँच, ये एसडीएम समझती क्या है अपने आप को, तत्काल एसडीएम साहिबा को फोन लगाया और निर्देश दिए कि वापस लौट जाओ लेकिन लगता है एसडीएम साहिबा नई-नई आई थी उन्हें राजनीति के कायदे कानून शायद मालूम नहीं थे सो अड़ गई कि नहीं बिना जांच किया तो वापस लौटने वाली नहीं, विधायक जी ने और एक बड़े नेता से फोन करवा दिया लेकिन एसडीएम साहिबा तब भी नहीं मानी और जांच करके ही लौटी इधर वे जाँच करके लौटी उधर उनका तबादला आदेश उनकी टेबल पर रखा मिल गया, उधर कलेक्टर साहब ने भी एक मिनट नहीं लगाया और तत्काल एसडीएम साहिबा को रिलीव भी कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद अब एसडीएम साहिबा भी समझ गई होंगी कि अगर नौकरी करना है तो विधायकों, सांसदों, नेताओं के काम काज पर निगाह भी मत डालना वे आजकल धरती के भगवान से कम नहीं है, आपने उनसे पंगा लिया और आपकी लाई लुटी अपना तो यह मानना है कि जैसे ही कोई सरकारी अफसर भरती होता है उसे पहले से ही ऐसीद्य लिस्ट पकड़ा देना चाहिए कि इनके कामों में आपको कोई खलल नहीं डालना है वे कुछ भी करें लेकिन आप अपनी आंखें उनकी तरफ  से मोड़ कर रखना उससे ये झंझट भी नहीं खड़ी होगी, ना तो अफसर जाँच करने जाएगा ना तबादले का आदेश जारी करना होगा सब कुछ आराम से चलता रहेगा।
सुपरहिट ऑफ  द वीक
श्रीमान जी के दोस्त ने उन्हें बताया कि ‘मैं सुबह जल्दी उठकर रोज घूमने जाता हूं क्या आप भी जाते हो’
‘नहीं मैं सुबह उठकर कभी घूमने नहीं जाता’ श्रीमान जी ने कहा
‘पर क्यों’ दोस्त ने फिर सवाल किया ‘अरे भैया जब धरती खुद घूम रही हो तो मुझे घूमने की क्या जरूरत पड़ी है’ श्रीमान जी का उत्तर था।

Jai Lok
Author: Jai Lok

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