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कहो तो कह दूँ ….पुलिस जनता की नहीं, नेताओं की सेवा के लिए होती है हुजूर…

@चैतन्य भट्ट
प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने पुलिस के सबसे बड़े अफसर डीजीपी साहब को आदेश दिया कि पूरे प्रदेश में जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित करें जिसमें व्यापारियों, बुद्धिजीवियों, गणमान्य नागरिकों, मीडिया कर्मियों को बुलाएं उनसे संवाद करें और पूछें कि पुलिस से उनकी क्या अपेक्षा है। मुख्यमंत्री जी का आदेश था सो डीजीपी साहब ने भी पूरे प्रदेश के थानों में ‘जनसंवाद कार्यक्रम’ आयोजित कर दिया खुद भी एक जन संवाद कार्यक्रम में पहुंच गए और बोले कि पुलिस की वर्दी जनता की सेवा के लिए होती है रौब जमाने के लिए नहीं। इतने बरस पुलिस में काम करने के बाद भी  डीजीपी साहब ये नहीं समझ पाए कि पुलिस की वर्दी जनता की सेवा के लिए नहीं बल्कि नेताओं की सेवा के लिए बनी है, अंग्रेजों के जमाने में भी पुलिस सरकार के इशारे पर काम करती थी जो विरोधी होता था उसे दबाने का पूरा जुम्मा पुलिस के हाथों में रहता था, अंग्रेज चले गए लेकिन अपनी तमाम परिपाटी यही छोड़ गए तो आज की पुलिस भी इस परिपाटी पर काम करते हुए दिखाई देती है, और फिर नेताओं की सेवा करें तो क्यों ना करें जनता की सेवा से क्या हासिल होने वाला है? राजनेताओं की सेवा करेंगे तो मलाईदार थाने में पोस्टिंग हो जाएगी, गड़बड़ी करोगे उसके बाद भी यदि किसी बड़े नेता से सेटिंग है तो बचा लिए जाओगे, नेताओं की सेवा से पदक भी मिल सकता है क्योंकि सरकार ही तो पदक के लिए नॉमिनेशन भेजती है और फिर दूसरी बात ये भी तो है कि कौन सा नेता कब किसी बड़ी पोस्ट पहुँच जाए, कब मंत्री बन जाए, कब मुख्यमंत्री बन जाए कोई नहीं जानता इसलिए हर नेता की सेवा करना पुलिस वाले अपना धर्म समझने लगे हैं। जनता का क्या है जनता तो भेड़ बकरी है जैसा चाहे हांक दो, हाल ये है कि कोई भी शरीफ  आदमी थाने में पैर रखने के पहले 100 बार सोचता है कि थाने की बाउंड्री के भीतर जाएं कि ना जाए। अभी देखा नहीं एक महिला अपनी बेटी के रेप की कोशिश करने के खिलाफ  पुलिस में जब रिपोर्ट करवाने गई तो थानेदार साहब ने कहा इससे तुम्हारी बदनामी होगी तुम तो अपना हाथ पकडऩे वाली रिपोर्ट लिखवा दो जब एक नेता ने दम दी तब जाकर मामला कायम हुआ और थानेदार साहेब को लाइन अटैच कर दिया गया। अपने को तो नहीं लगता कि कोई पुलिसवाला जनता की सेवा के बारे में सोचता होगा और जो करना भी चाहता होगा हैं उसे बहुत जल्द लूप लाइन में भेज दिया जाता है, ये भी आप अच्छी तरह से जानते होंगे फिर भी चलिए औपचारिकता के लिए ही जन संवाद हो गया यही जनता के लिए बहुत बड़ी चीज है।
कुर्सी गई और भिनिष्ठा हुई
लोग बात कहते हैं कि नेता लोग कुर्सी के पीछे जान दिए देते हैं येन केन प्रकारेंन कुर्सी को हासिल करने की कोशिश में लगे रहते हैं जब कुर्सी मिल जाती है तो हमेशा उन्हें इसी बात की चिंता रहती है कि कोई उनके नीचे से कुर्सी ना खिसका दे। अपने को भी बड़ा अचरज होता था कि आखिर कुर्सी के लिए ये नेता इतनी माथा-पच्ची और मारामारी क्यों करते हैं अब समझ में आया कि कुर्सी का कितना इंर्पोंटेस है। अपने मध्य प्रदेश के गृह विभाग ने उन तमाम पूर्व मंत्रियों और पूर्व विधायकों को नोटिस दे दिया है कि चूंकि आपकी कुर्सी चली गई है इसलिए आप लोग अपना-अपना बंगला खाली कर दो अभी तक तो ‘जिला बदर’ सुना था अब ‘घर-बदर’ एक नई चीज सामने आई है, पता चला है कि नोटिस में लिखा गया है कि आप लोग अब न  मंत्री हो ना विधायक इसलिए जो सरकारी बंगला आपको मिला था उसे आप तत्काल खाली करने अपना सामान आटो में रखकर जहां मर्जी ले जाना है ले जाओ इसके बाद आपको एक और नोटिस दिया जाएगा और उसके बाद भी यदि आपने बंगला खाली नहीं किया तो ताला तोडक़र बंगले पर कब्जा कर लिया जाएगा। अब सोच लो कि क्या दिन थे उन मंत्रियों और विधायकों के जिनके सामने अफसर लोग सर झुकाए हाथ जोड़ खड़े रहते थे लेकिन कुर्सी क्या गई ऐसे नोटिस भेज रहे हैं, जैसे उनकी कोई बखत ही ना बची हो, अरे भाई थोड़ा टाइम तो दो, बेचारे किराए का मकान ढूंढेंगे अपना सामान शिफ्ट करेंगे और फिर अब तो फ्री फोकट में सामान भी शिफ्ट नहीं हो पाएगा मंत्री रहते तो कोई भी ठेकेदार सामान शिफ्ट कर देता करवा देता अब जो कुछ है अपने पैसे से ही करवाना पड़ेगा। इसलिए कहते हैं कि कुर्सी सबसे बड़ी चीज है, इधर आपकी कुर्सी गई और उधर आपकी भिनिष्ठा शुरू।
खबरदार जो डार्लिंग कहा
कोलकाता हाई कोर्ट की एक बेंच ने  एक मामले में निर्णय देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी अनजान महिला को यदि ‘डार्लिंग’ के नाम से संबोधित किया गया तो वो दंडनीय अपराध होगा, अब इस घटना के बाद डार्लिंग शब्द को लेकर भारी विवाद की स्थिति बन गई है डार्लिंग का हिंदी अर्थ होता है ‘प्रेयसी’ और उर्दू में ‘महबूबा’।  तो सही कहा हाई कोर्ट ने अरे भाई कोई अनजान महिला को आप अपनी प्रेमिका या महबूबा कैसे बोल सकते हां आपकी बीवी हो या सचमुच आपकी प्रेमिका उसे आप भले ही डार्लिंग कहो लेकिन किसी अनजान महिला को डार्लिंग कहना तो वास्तव में गुनाह है वैसे तो आजकल कौन कब डार्लिंग बन जाए और साल दो साल में कब तलक लेकर डार्लिंग शब्द से पीछा छुड़ा ले कोई नहीं जानता और तो और अब तो बीस बीस साल बाद तलाक की नौबत आ रही है। वैसे डार्लिंग शब्द जो है वह प्रेम का सूचक माना जाता है यानी जिसे हम बहुत प्यार करते हैं उसे डार्लिंग पुकारते हैं लेकिन आजकल तो दोस्त भी एक दूसरे को डार्लिंग कहने लगे हैं लेकिन कहीं ऐसा ना हो कि अब दोस्तों को भी डार्लिंग कहने पर भी रोक लगा दी जाए। अपना तो सुझाव ये है कि डिक्शनरी से डार्लिंग शब्द हटा दिया जाए ना रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी।
सुपर हिट ऑफ  द वीक
‘मैडम जी दरवाजा खोलिए आपके श्रीमान जी ट्रक के नीचे आकर ‘पापड़’ बन गए हैं, पुलिस वाले ने दरवाजा खटखटाते हुए श्रीमती जी से कहा
‘इसमें दरवाजा खोलने की क्या जरूरत है पापड़ बन गए हैं तो नीचे से ही सरका दो’ श्रीमती जी ने पुलिस वाले को उत्तर दिया।

Jai Lok
Author: Jai Lok

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