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अतीत की धरोहर को वर्तमान से जोडऩे की अच्छी पहल है ‘जल मंदिर’ : बेहतर मार्केटिंग से लग सकते हैं पर्यटन को चार पँख ,एक बार अवश्य जाएँ

जबलपुर (जय लोक)/परितोष वर्मा
जबलपुर में गोंडवाना कालीन ऐसी बहुत सारी पुरातत्व धरोहर मौजूद हैं जिनका संरक्षण ही जबलपुर के पर्यटन को, जबलपुर की ब्रांडिंग को एक नई दिशा देकर  4 गुना पंख लगा सकता है।  पूर्व सांसद एवं वर्तमान लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने सांसद मद से शहर की दो प्राचीन बावडिय़ों का जीर्णोद्धार करवाया है। आगा चौक से उजारपुरवा  वाले मार्ग पर स्थित प्राचीन बावड़ी को संरक्षित और नया स्वरूप देने के बाद जल मंदिर का नाम दिया गया है। यह नाम इस जगह के अनुरूप और सम्यक प्रतीत होता है।
जबलपुर शहर के हर निवासी को एक बार इस स्थान का अवलोकन अवश्य करना चाहिए। इस स्थान पर आने से हमें इस बात का एहसास होगा कि अतीत की धरोहर को वर्तमान से कैसे जोड़ा जा सकता है। कैसे यह रमणीक स्थल जबलपुर के पर्यटन की पहचान बन सकते हैं। जनप्रतिनिधि के रूप में राकेश सिंह ने सराहनीय कार्य करके दिखाया है। उजार पुरवा के साथ ही गढ़ा बाजार की बावड़ी का भी जीर्णोद्धार किया गया है।
कुछ महीना पहले तक कचरा घर और गंदगी से लबरेज रहने वाली यह बावड़ी आज जल के मंदिर के रूप में केवल  सकारात्मक इच्छा शक्ति के स्वरूप पुन: अपने मूल स्वरूप में स्थापित हुई है। पूर्व सांसद वर्तमान कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह कहते हैं कि जब विश्व में जल संकट के बादल  घिरने लगे थे तो दूरदर्शी सोच के धनी देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्राचीन भारतीय जल संरक्षण की पद्धति को पुन: स्थापित करते हुए जल स्त्रोतों को जल मंदिर की तर्ज पर विकसित करने का आवाह्न किया। इसी आवाह्न को ध्यान में रखते हुए राकेश सिंह ने शहर की दो बावडिय़ों का कायाकल्प कराकर प्राचीन धरोहरों को संजोने का महत्वपूर्ण कार्य कराया है। राकेश सिंह ने महीनों पहले अपने सैकड़ों साथियों के साथ श्रमदान कर गंदे काले कीचड़ से लथपथ इन बावडिय़ों को पहले स्वयं साफ किया और श्रमदान भी किया। फिर इनकी मरम्मत का कार्य शुरू कराया गया।
300 साल पुरानी बावड़ी
रानीताल के उजारपुरवा सर्वोदय नगर में स्थित  बावड़ी 300 साल पुरानी है। यह कई जगह से क्षतिग्रस्त और टूट गई थी। इसी प्रकार गढ़ा बाजार में राधा कृष्ण मंदिर के समीप स्थित गोंडवाना कालीन दुर्गावती के शासनकाल की 16वीं शताब्दी की बावड़ी भी टूट फूट गई थी। इन दोनों ही जीर्ण-शीर्ण बावलियों को पुनर्जीवित करने का संकल्प लेकर कार्य किया गया और अब ये दोनों धरोहर हम सबके बीच नये स्वरूप में स्थापित हुई हैं। सही प्रचार मिल जाए तो यह बावलियां जबलपुर के पर्यटन का एक अहम हिस्सा बन  सकती हैं।
वास्तु कला का अद्भुत नमूना
इन जल मंदिरों को देखने से यह ज्ञात होता है कि उस वक्त के कारीगरों के हाथों में भी क्या जादू रहा होगा, विज्ञान के ज्ञान की परिभाषा ही दूसरी रही होगी जो इतनी सफल और सुंदर आकृतियों का निर्माण किया गया। जो आज सैकड़ों साल बाद भी पूरी तरह से जल स्त्रोत के रूप में कार्य कर रही है। यह प्राकृतिक रूप से जल संरक्षण के कार्य में भी अहम भूमिका अदा करती है।
सही मार्केटिंग की आवश्यकता
जनप्रतिनिधि का काम होता है विकास करना शासन प्रशासन का काम है कि जो विकास कार्य हुए हैं और जिस नियति से हुए हैं उसके अनुरूप ही योजना बनाकर कार्य किया जाए। जबलपुर में पर्यटन की असीम संभावना है, यह बातें तो दशकों से हो रही है लेकिन इन असीम संभावना को अच्छी मार्केटिंग की बेहद आवश्यकता है। आज जबलपुर में इतने पर्यटन स्थल मौजूद है की दो तीन दिन का टूर पैकेज गाइड के साथ उपलब्ध कराया जा सकता है।  अब इसी दिशा में मजबूत और सफल लक्ष्य निर्धारित कर संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता है।

Jai Lok
Author: Jai Lok

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