
जबलपुर (जयलोक)। समाज को मानवता का संदेश देना सार्थक सृजन है। वर्तमान पीढ़ी को दिशाबोधी साहित्य की महती आवश्यकता है, इसी संकल्पभाव से विजय किसलय सतत साहित्य सृजनरत हैं। उक्ताशय के भाव प.पू. रामेश्वरदास महाराज द्वारा अपने उद्बोधन में व्यक्त किए गए। हिन्दी साहित्य संगम के तत्वावधान में आयोजित काव्य कृतियों के विमोचन कार्यक्रम का शुभारंभ काशी के विद्वान मनीषियों द्वारा लयबद्ध स्वस्ति वाचन से हुआ। अखनूर (जम्मू) के कामेश्वर प्रेक्षागृह में कार्यक्रम अध्यक्ष प.पू. स्वामी रामेश्वर दास महामंडलेश्वर जम्मू, मुख्य अतिथि राजीव शर्मा पूर्व विधायक अखनूर, विशिष्ट अतिथि विनोद बिलौहाँ डायरेक्टर बारडोली महाविद्यालय एवं पूर्व परि. अधि. श्रीमती सुमन तिवारी द्वारा संस्कारधानी के कवि विजय तिवारी किसलय की किसलय के मन में आया तथा किसलय की आद्याक्षरी कवितायें नामक उक्त दो काव्य कृतियों का विमोचन किया गया। वाराणसी से पधारे संस्कृत महाविद्यालय के प्रवक्ता आचार्य रंगनाथ उपाध्याय के उत्कृष्ट संचालकत्व में संपन्न कार्यक्रम में अतिथियों द्वारा किसलय की सृजनशीलता एवं दीर्घकालिक साहित्य सेवा का उल्लेख किया गया। साथ ही किसलय को साहित्य जगत का जाना पहचाना नाम बताया। इस अवसर पर डॉ. कृष्ण लाल भगत, राजेन्द्र शर्मा, राजपूत सभा प्रधान नारायण सिंह, घनश्याम शर्मा, उद्योगपति रसपाल मगोत्रा, प्रदीप शर्मा दिल्ली के साथ ही वाराणसी एवं जम्मू के साहित्य अनुरागी उपस्थित रहे






