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आदिवासियों के उत्थान के लिए स्थापित किया गया था आध्यात्मिक उत्थान मंडल

परमहंसी गंगा आश्रम में मंडल का वार्षिक अधिवेशन आयोजित हुआ

जबलपुर (जयलोक)। ब्रह्मलीन द्वि पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज श्री जी के द्वारा अखिल भारतीय आध्यात्मिक उत्थान मण्डल की स्थापना सन 1966 में आदिवासी वनवासी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के धार्मिक उत्थान सामाजिक उत्थान हेतु की थी। अखिल भारतीय आध्यात्मिक उत्थान मंडल का वार्षिक अधिवेशन परमहंसी गंगा आश्रम झोंतेश्वर में जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी सदानंद जी सरस्वती की गरिमामय उपस्थिति में आयोजित हुआ।
आध्यात्मिक उत्थान मंडल की स्थापना के संबंध में शंकराचार्य सदानंद जी ने बतलाया कि शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी सरस्वती ने जब ग्रामीण अंचलों में निवास करने वाले आदिवासी वनवासी भाइयों बहनों की वस्तु स्थिति को देखा तो उन्होंने उनके उत्थान के लिए सम्पूर्ण भारत वर्ष में अखिल भारतीय आध्यात्मिक उत्थान मण्डल की अनेकों शाखाओं की स्थापना की जो अपने अपने क्षेत्रों में निवासरत आदिवासी वनवासी भाइयों बहनों के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं। आध्यात्मिक उत्थान मंडल के गठन का मुख्य उद्देश्य समाज से दूर, ऐसे क्षेत्रों में जहां पर लोगों की पहुँच आवागमन संचार आदि के साधनों संसाधनों तक की पहुँच नहीं थी तथा आदिवासी वनवासी क्षेत्र के लोगों में धार्मिक चेतना का अभाव था उनमें धार्मिक जन जागृति का संचार कर उन्हें सत्य सनातन धर्म का ज्ञान एवं परम ब्रह्म परमात्मा की शरण में लाना था। इस हेतु उनके द्वारा गाँव गाँव में देवालयों का निर्माण कराया गया तथा देवालयों में धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन जैसे रामायण पाठ, श्री रामचरित मानस पाठ (मुण्डारी भाषा में)सुंदरकांड पाठ, श्री हनुमान चालीसा पाठ के लिए प्रेरित किया। जिससे लोगों में धार्मिक जन चेतना का विस्तार हो। अखिल भारतीय आध्यात्मिक उत्थान मण्डल के गठन का दूसरा मुख्य उदेश्य स्वधर्मानयन अर्थात अपने धर्म का पालन करने हेतु प्रेरित करना था। अनेक षड्यन्त्रकारियों एवं ईसाई मिशनरियों द्वारा आदिवासी वनवासी क्षेत्रों में निवासरत भोले भाले भाइयों बहनों को अपने कुतर्कों से लगातार उन्हे सत्य सनातन धर्म से भटकाने के प्रयास किया जा रहा था। उनके इन प्रयासों को असफल करने के लिए पूज्य गुरुदेव भगवान ने इस समिति द्वारा आदिवासी भाइयों में जन जागृति फैलाई। ताकि वो अपने धर्म का निष्ठा पूर्ण रूप से पालन करते रहें।
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी के बाद आज अनंत श्री विभूषित पश्चिमाम्नाय द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानन्द सरस्वती जी महाराज श्री द्वारा इस समिति का संरक्षण किया जा रहा है एवं सम्पूर्ण भारत वर्ष में अखिल भारतीय आध्यात्मिक उत्थान मण्डल की लगभग 1200 शाखाएं निरंतर इस कार्य को पूरी निष्ठा के साथ कर रही हैं। आध्यात्मिक उत्थान मण्डल (आ.उ.म.) नामकरण करने के पीछे का रहस्य था इन 3 शब्दों के प्रथम अक्षरों आ.उ.म. से शब्द का उच्चारण होता है जो की साक्षात पर ब्रह्म परमात्मा की अनुभूति है। एवं यह समिति समिति सम्पूर्ण भारत के आदिवासी वनवासी क्षत्रों में कार्य कर रही है। तभी इसका समिति का नाम अखिल भारतीय आध्यात्मिक उत्थान समिति रखा गया।
आज इस समिति द्वारा प्रतिवर्ष विशाल आदिवासी वनवासी अधिवेशन का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष भी इस महाअधिवेशन का आयोजन द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जी महाराज श्री के सानिध्य में परमहंसी गंगा आश्रम में किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ पं. राजकुमार शास्त्री एवं दीपक शास्त्री द्वारा मंगलाचरण कर किया गया। तत्पश्चात गोटेगांव विधायक महेंद्र नागेश, रूप सिंह, दुरग सिंह नारायण सिंह टीकाराम ठाकुर बैनी सिंह काशीराम ठाकुर द्वारा पूज्य महाराज श्री जी का पादूका पूजन किया गया।
फिर महेंद्र नागेश (विधायक गोटेगांव) दशरथ ठाकुर राम दयाल ठाकुर निरपत सिंह ठाकुर लाल ठाकुर हुकूम सिंह ठाकुर नरेंद्र पाण्डेय रमेश प्रसाद पटेल गजराज पटेल गणपत ठाकुर द्वारा पूज्य महाराज श्री का माल्यार्पण कर अभिनंदन किया गया। तत्पश्चात दुर्गा सिंह ठाकुर, रूप सिंह उईके (जिला पंचायत सदस्य), परम पटेल, नारायण ठाकुर (सरपंच झोंत), मेलाराम जी (सरपंच भामा), विनोद उईके, जगत सिंह ठाकुर (सरपंच बुड़ेना), महेंद्र नागेश (विधायक गोटेगांव), नटवर लाल जोशी (अध्यक्ष), ब्रह्मचारी श्री सुबुद्धानन्द जी महाराज जी ने अपना उद्बोधन दिया।

Jai Lok
Author: Jai Lok

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