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Home » अपराध » ऐसे अस्पताल जूते की नोंक पर रखते हैं शासन प्रशासन के नियम कानून साल भर से अवैध रूप से संचालित है संस्कारधानी अस्पताल, मरीजों की भर्ती पर लगी रोक

ऐसे अस्पताल जूते की नोंक पर रखते हैं शासन प्रशासन के नियम कानून साल भर से अवैध रूप से संचालित है संस्कारधानी अस्पताल, मरीजों की भर्ती पर लगी रोक

 

अवैध अस्पताल चला रहे डॉक्टरों ने भर्ती कर लिए 40 मरीज, इनसे पैसे वसूलने की मिली छूट, प्रशासन असहाय

जबलपुर (जयलोक)। शहर के निजी अस्पतालों में पैसे कमाने की भूख इतनी अधिक बढ़ चुकी है कि वह शासन प्रशासन के नियम कार्यों को भी खुले आम ताक पर अपने जूते की नोंक पर रख रहे हैं, इस बात को साबित किया है संस्कारधानी अस्पतल ने। जिसे ना तो सरकार का भय है और ना ही प्रशासन का। यहां बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर कैसे एक साल से बिना नवीनीकरण के संस्कारधानी अस्पताल संचालित हो रहा था, जबकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस अस्पताल को कई बार नोटिस दिया जा चुका है। सरकार को और प्रशासन को खुली चुनौती देते हुए हमेशा विवादों में रहने वाले कटंगी मार्ग करमेता में स्थित संस्कारधानी अस्पताल पिछले 1 साल से अवैध रूप से संचालित हो रहा है। लेकिन इसके खिलाफ  कोई भी ठोस कार्यवाही सरकार या प्रशासन ने नहीं की है। लगातार मिल रही शिकायत के बाद प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग, एसडीम की टीम और पुलिस टीम के साथ उक्त अवैध संस्कारधानी अस्पताल पर छापा मारा।  इस अस्पताल का संचालन अवैध होना पाया गया उसके बावजूद भी यहां पर इसको संचालित कर रहे डॉक्टरों ने 40 मरीजों को भर्ती कर रखा था। 1 साल से यह अस्पताल बिना नवीनीकरण पंजीयन के अवैध रूप से संचालित हो रहा है। यह अस्पताल प्रबंधन की दबंगई ही है कि वह शासन के नियमों को ताक पर रखकर अपनी मनमर्जी से अवैध रूप से अस्पताल संचालित कर मरीजों के जीवन से लगातार खिलवाड़ कर रहा है।  जिला प्रशासन, स्वास्थ विभाग और पुलिस विभाग की संयुक्त कार्यवाही के दौरान वहां भर्ती मरीजों का पंचनामा किया गया। अस्पताल प्रबंधन को लापरवाही करने पर सख्त हिदायत दी गई है कि वो अब नए मरीजों की भर्ती नहीं करेगा।
40 मरीजों से पैसा वसूलने क्यों दी गई छूट
संस्कारधानी अस्पताल में छापे के दौरान यह पाया गया कि यहां बिना अनुमति के संचालित अस्पताल में 40 मरीजों को भर्ती करके रखा गया है। जब अस्पताल अवैध है तो कैसे इन 40 मरीजों के आगे के ईलाज को जारी रखने की अनुमति इस अस्पताल को दी गई। यानी इतनी घोर अनियमिताएं पाए जाने के बाद भी अवैध रूप से संचालित संस्कारधानी अस्पताल को इन 40 मरीजों का इलाज जारी रखने की अनुमति मिल ही गई।
 विक्टोरिया और मेडिकल में क्यों नहीं रखे जा सकते मरीज
जब संस्कारधानी अस्पताल अवैध घोषित हो चुका है तो फिर मरीजों को तत्काल किसी और अस्पताल में शिफ्ट क्यों नहीं किया गया। यानी 40 भर्ती मरीजों को अभी यह अवैध अस्पताल इलाज, दवाई और जाँच के नाम पर अपनी कमाई करता रहेगा। प्रशासन चाहे तो शासकीय विक्टोरिया अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में संस्कारधानी अस्पताल में इलाज करा रहे मरीजों को शिफ्ट किया जा सकता है। सवाल यह उठ रहा है कि जब अवैध अस्पताल में 40 मरीजों का इलाज चल रहा है और यदि इन मरीजों के उपचार को लेकर किसी तरह की अनहोनी होती है तो इसकी जवाबदारी किसकी होगी।
इनका कहना है
अस्पताल प्रबंधन द्वारा अस्पताल की बिल्डिंग को कहीं और शिफ्ट करने की जानकारी दी गई है। यहां 40 मरीज भर्ती पाए गए जिनका पंचनामा किया गया है। आपातकाल या जीवन रक्षक स्थिति को छोडक़र किसी भी सामान्य मरीज को भर्ती करने पर रोक लगा दी गई है। अन्य बिंदुओं को भी देखा जा रहा है।
                                                                                                                     शिवाली सिंह, एसडीएम अधारताल

वर्तमान में संस्कारधानी अस्पताल का संचालन अवैध है क्योंकि 1 साल की अवधि हो चुकी है इसका पंजीयन का नवीनीकरण नहीं हुआ है। पूर्व में अस्पताल के संचालकों द्वारा दिया गया आवेदन दस्तावेज पूरे नहीं होने के कारण निरस्त कर दिया गया था। इन्हें कई बार नोटिस दिया जा चुका है लेकिन फिर भी यह अवैध रूप से मरीजों को भर्ती कर रहे हैं। जिला प्रशासन के अधिकारियों को पत्र लिखकर पूरी स्थिति से अवगत करा दिया गया है। अवैध अस्पताल पर आगे की कार्यवाही जिला प्रशासन के अधिकारियों की ओर से होना है।

            डॉ. संजय मिश्रा,
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी

Jai Lok
Author: Jai Lok

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