
जबलपुर (जयलोक)। कल कलेक्टर कार्यालय में एक ऐसा वाक्य घटित हुआ जिसमें सहज एवं सरल स्वभाव वाले अधिकारी कलेक्टर दीपक सक्सेना को एक चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की अति उत्साह में की गई गलती के कारण असमंजस की स्थिति में डाल दिया। चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी मूल रूप से अधारताल छात्रावास में चपरासी के पद पर कार्यरत है लेकिन पूर्व के एक कलेक्टर की कृपा प्रकार कोरोना कल के समय इस कर्मचारी को कलेक्ट्रेट कंट्रोल रूम का प्रभारी बना दिया गया। लेकिन अपने क्रियाकलाप के कारण कल इसके कारण जिला कलेक्टर एवं अन्य अधिकारियों के समक्ष असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई और वे बेमन से एक सम्मान कार्यक्रम का हिस्सा बन गए।
इस चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी ने खुद को स्वयं भू-जनसंपर्क अधिकारी के रूप में प्रस्तुत करते हुए खुद ही यह तय कर लिया कि इसे कुछ लोगों का सम्मान कलेक्टर महोदय के हाथों करवाना है। आश्चर्य की बात यह है कि इस व्यक्ति ने जिले के जनसंपर्क अधिकारियों को भी इस बारे में कुछ नहीं बताया और स्वयं ही प्रशस्ति पत्र तैयार करवा लिए। चार पाँच लोगों को सम्मानित करवाने के बाद इस चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी ने खुद भी कलेक्टर के हाथों सम्मान पत्र लेने की तस्वीर बड़े शौक से खिंचवा ली।
जिन लोगों का सम्मान हुआ वह तो नि:सदेह सम्माननीय हैं ही लेकिन स्वयंभू जनसंपर्क अधिकारी ने खुद की वाह वाही के चक्कर में स्वयं अपना भी सम्मान कलेक्टर के हाथों करवा लिया। जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों को इस बात की भनक भी नहीं पड़ी थी कि कुछ बौद्धिक जगत के सम्माननीय लोगों को गलत तरीके से झांसा देकर बुला लिया गया और इस व्यक्ति की सबसे शर्मनाक हरकत यह थी कि इसने जिलाधिकारी को भी धोखा दिया और पूर्व में पूरी बातें बताकर ना तो अनुमति ली और ना ही सही तरीके से यह कार्य किया। खुद के नंबर बढ़ाने और अपनी वाह वाही करवाने के चक्कर में इस कर्मचारी ने सभी अधिकारियों को असमंजस की स्थिति में डाल दिया और इसकी हरकत के लिए बाद में जिलाधिकारी को खेद प्रकट करना पड़ा।
मजे की बात तो यह है कि कंट्रोल रूम का प्रभारी बना यह चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी खुद को अधिकारी बताता फिरता है। लेकिन कल की घटना के बाद यह पता चला कि स्वयं कलेक्टर को भी कल ही पता चला कि यह शासकीय कर्मचारी है। जिले के स्वीप अधिकारी के माध्यम से यह बात कलेक्टर तक पहुँची थी कि कुछ लोगों का सम्मान करवाना है जिन्होंने पुस्तक मेले के आयोजन में अपने स्तर पर अच्छा सहयोग दिया है। लेकिन अति उत्साह में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी ने जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों को ही दर किनार कर दिया और एक नई परिपाटी की शुरुआत करने का प्रयास किया उसकी इस हरकत को लेकर नाराजगी भी सामने आई। जब पूरा मामला खुला तो पता चला कि जिला कलेक्टर को इस बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी और ना ही जनसंपर्क विभाग को इस बारे में जानकारी देकर विश्वास में लिया गया था।
इस अधिकारी के बारे में पूरे कलेक्ट्रेट में प्रचलित है कि यह कंट्रोल रूम कार्यालय में बैठकर केवल दलाली का काम करता है। इसके कार्यालय में हमेशा दरबार लगा रहता है और यहीं से कलेक्ट्रेट के अन्य विभागों की चल रही गतिविधियों में हस्तक्षेप करना, रिकॉर्ड निकालना, सीलिंग के काम करवाना एवं अन्य प्रकार के दलाली के कार्यों का संचालन होता रहता है।
पूर्व के कलेक्टर कर चुके हैं कार्रवाई
पूर्व कलेक्टर भारत यादव ने भी इस व्यक्ति के संबंध में शिकायत मिलने पर कार्रवाई करते हुए कई कार्यों से इसे मुक्त कर दिया था। बाद में कुछ अधिकारियों की चापलूसी कर कर पुन: इस पद पर आ गया। पिछले कलेक्टर सौरभ सुमन ने भी इसके बारे में पूरी जाँच पड़ताल करवाई थी और इसे कंट्रोल रूम प्रभारी के पद से हटाने के लिए कह दिया था। लेकिन इस बीच उनका ही तबादला हो गया और इसके क्रियाकलाप यथावत बने रहे।

Author: Jai Lok







