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अधिवक्ता संघ चुनाव : फिर मनाना पड़ेंगे जन्मदिन फिर उठाना पड़ेगा 3 दिन पार्टी का खर्च दुबारा चुनाव से प्रत्याशी वकीलों पर बढ़ गया आर्थिक बोझ, अंदुरुनी खींचतान चरम पर एक प्रत्याशी के खिलाफ तीन प्रत्याशियों की बनी लॉबी

जबलपुर (जयलोक)। जिला अधिवक्ता संघ का चुनाव निरस्त हो जाने से चुनाव मैदान में उतरे अधिवक्ताओं को आर्थिक क्षति झेलनी पड़ रही है। सबसे कठिन परिस्थिति उन अधिवक्ताओं के सामने निर्मित हुई हैं जो चुनाव मैदान में तो उतर गए हैं लेकिन उनकी आर्थिक पृष्ठभूमि मजबूत नहीं हैं। कल जिला अधिवक्ता संघ के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में दोबारा चुनाव कराने की जिम्मेदारी उठा रहे अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने अधिसूचना जारी करते हुए चुनाव की अगली तिथि 28 जुलाई घोषित कर दी है। अगले दिन 29 जुलाई को मतों की गणना कर परिणाम सामने आ जाएंगे। अब जिला अधिवक्ता संघ के विभिन्न पदों पर चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों के सामने फिर से चुनावी पंरपराओं को निभानें की जिम्मेदारी आ गई है। सूत्रों का कहना है कि कल से ही परिसर में इस बात की चर्चाएं जोरशोर से शुरू हो गईं कि अब प्रत्याशियों को परंपराओं का निर्वाहन करते हुए फिर से साथियों की जन्मदिन की पार्टी आयोजित करने के साथ ही बेहतर से बेहतर आवभगत करने के इंतजाम करने पड़ेंगे। आने वाले तीन दिन मतदाता के रूप में अधिवक्ता साथियों की चांदी के दिन रहेंगे और उनकी पूछ परख चरम पर रहेगी। एक अधिवक्ता ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि पिछले चुनाव के पहले के तीन दिनों में मतदाताओं के रूप में उन्हें एक दिन में तीन चार पार्टियों में शामिल होना पड़ा था। सभी प्रत्याशी अपने हर मतदाता अधिवक्ता को खुश करने में लगे हुए हैं। महिला प्रत्याशी भी इन परंपराओं को निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहीं हैं और उनकी भी पार्टियाँ अलग अंदाज में चर्चाएं बटोर रहीं हैं।

यह बात अलग है कि अब चुनाव मैदान में डटे प्रत्याशियों के समक्ष आर्थिक बोझ दोगुना हो गया है। जो शिद्दत से चुनाव लड़ रहे हैं वे इसे चुनौती मानकर सामना कर रहे हैं। जो सक्षम हैं वे किसी प्रकार का अफसोस नहीं कर रहे हैं। लेकिन जो अभाव में चुनाव का सामना कर रहे हैं उनके समक्ष संकट अधिक हैं। जिन प्रत्याशियों की काबलियत प्रचलित है उन्हें चुनाव में उनके साथी हर प्रकार से सहयोग करने में जुटे हैं।

गुटबाजी की चर्चाओं के साथ लॉबी बनने की चर्चा

इसी बीच पहला चुनाव निरस्त होने के कारणों का मंथन अभी भी जारी है। वरिष्ठ अधिवक्ता पहले चुनाव के निर्वाचन अधिकारी बनाए गए जीएस ठाकुर पर विभिन्न अधिवक्ताओं के द्वारा आरोप लगाए गए। इन आरोपों के जवाब में अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर अधिवक्ता जीएस ठाकुर की पोस्ट सुर्खियाँ बटोर रही हैं। उन्होंने इशारों में अपने विरोधियों को इंगित करते हुए लिखा है कि ‘हम आपके दोगलेपन के बारे में क्या जान गए.. बस आपतो बुरा मान गए’। इस जुमले के पीछे एक कहानी यह भी चर्चाओं में बनी हुई है कि अधिवक्ताओं के बीच में लोकप्रिय प्रत्याशी को हराने के लिए दो घोर प्रतिद्ंदी माने जाने वाले प्रत्याशी ने समझौता करके हाथ मिला लिया। इनके साथ महिलाओं का एक समूह भी जुड़ गया। इस लॉबी को निर्वाचन समिति के सदस्यों से व्यक्तिगत दुर्भावना रखने वालों का भी समर्थन मिल गया।
चुनाव को टालने की इच्छा रखने वालों की एक सामान्य मंशा भी चर्चा में बनी हुई है जिसमें यह चर्चित है कि स्टेट बार चुनाव का फैसला आने के पूर्व कुछ लोग जिला अधिवक्ता संघ के चुनाव हो जाने के पक्ष में नहीं थे।

इसके पीछे यह कारण चर्चा में बना हुआ है कि संविधान में संसोधन के अनुसार हाईकोर्ट बार या स्टेट बार का पदाधिकारी जिला बार में चुनाव नहीं लड़ सकता। इसी प्रकार जिला बार के पदाधिकारी भी स्टेट बार के चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकते। यही कारण था कि पिछले चुनाव प्रक्रिया के दौरान जिला बार के कई पदाधिकारियों के नामांकन निरस्त कर दिए गए थे। संविधान में संसोधन के प्रयासरत लोगों की मंशा के विपरित जिला अधिवक्ता संघ का चुनाव कार्यक्रम पहले घोषित हो गया। चूंकि एक लॉबी चुनाव के खिलाफ थी और वह प्रारंभ से ही एकजुट होकर उक्त चुनाव को टलवाना चाहते थे इसी की रूपरेखा के तहत विगत 20 जुलाई को हुए मतदान प्रक्रिया के दौरान हंगामा खड़ा किया गया। अब इस हंगामे के पीछे कौन दोषी थे, किसकी मंशा क्या थी यह अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। सिर्फ कयासों में नाम और बातें चल रही हैं।
अब 28 जुलाई को दोबारा रणभूमि सजेगी और 29 को राजतिलक का निर्णय होगा।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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