
चैतन्य भट्ट
एक नेता जी के मामले में न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आप लोग तो नेता हो, आप लोगों को अपनी चमड़ी मोटी कर लेना चाहिए, अब न्यायालय को कौन बताए कि इनकी चमड़ी तो ऑलरेडी कछुआ, गैंडा, हाथी और मगरमच्छ से भी ज्यादा मोटी होती है, जिस दिन नेतागिरी में एंट्री करते हैं अपनी चमड़ी पर चमड़ी की परतें जमाना शुरू कर देते हैं और फिर देखते-देखते वो चमड़ी इतनी मोटी हो जाती है जिस पर किसी चीज का कोई असर नहीं होता। आप लाख आलोचना करते रहो, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, आप उनके दरवाजे पर जाकर अपनी मांगों का पुलिंदा थमा दो तब भी उन्हें कोई असर नहीं होता। सुबह से लेकर रात तक नेता लोग जनता से कितनी गालियां खाते हैं ये तो वे भी जानते हैं उसके बावजूद भी जब भी जनता के सामने आते हैं तो मुस्कुराते ही रहते हैं यानी वो अपनी चमड़ी इतनी मोटी बना लेते हैं जिस पर किसी चीज का कोई असर नहीं होता। नेता भी कह रहे हैं कि शायद कोर्ट को उनकी चमड़ी के बारे में कोई ज्यादा जानकारी है नहीं, वरना वे ऐसी बात नहीं करते।
शायद कोर्ट को इन नेताओं से वास्ता नहीं पड़ा होगा इसलिए उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि नेताओं की चमड़ी तो पहले से ही मोटी है, वैसे नेताओं को मोटी चमड़ी का भारी फायदा मिलता है। आप कहते रहो कुछ भी उन पर कोई असर नहीं होता, आप उनकी तमाम आलोचना करते रहो गालियां देते रहो भला बुरा कहते रहो वे इन तमाम चीजों को अपनी चमड़ी पर हाथ फेर कर साफ कर लेते हैं। किसी विवादास्पद बयान के बाद हाई कमांड की डांट के बाद भी वे नहीं सुधरते उनके मन में जो आता है वो बयान दे देते हैं, जब कभी वोट मांगने जनता के दरवाजे पर आते हैं और जब वोटर उनसे उनके पुराने कार्यकाल के बारे में तमाम प्रश्न पूछता है कि आपने ये नहीं किया, आपने वो नहीं किया, आपने ये वादे किए थे, आपने ये कहा था, तब भी उनकी मोटी चमड़ी पर कोई असर नहीं होता। वे मुस्कुराते हुए यही कहते हैं जो काम अभी तक नहीं हुआ वो इस बार हो जाएगा आप इस बार भी हमें वोट तो दे दीजिए आपकी सारी शिकायत दूर हो जाएगी। जनता भी उनके भ्रम जाल में आकर एक बार फिर उन्हें जिता देती है और फिर पांच साल इंतजार करती है।
अगर कोई पहुंच भी जाता है कि आपने इस बार भी वायदा किया था लेकिन वो भी पूरा नहीं हुआ तो वे अट्टहास करते हुए कहते हैं हम नेता हैं वादे करना और उन्हें पूरे ना करना हमारी फितरत है अब पांच साल तक आप मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते। तमाम नेताओं ने न्यायालय के समक्ष जाकर यही कहा है कि हुजूर हम तो ऑलरेडी इतनी मोटी चमड़ी लेकर बैठे हैं कि कपड़े तक फिट नहीं आ पा रहे अब और कितनी मोटी चमड़ी कर लें आप ही बता दो हुजूर…..

अभी तो आरोपी हैं
‘एडीआर’ ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें बड़ी उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि देश के 302 मंत्रियों में से 107 पर गंभीर मामले दर्ज है जैसे बलात्कार, अवैध कब्जा, अपहरण, हत्या का प्रयास। इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संसद और राज्यों के विधानसभा में दागियों की संख्या 47 प्रतिशत बढ़ गई है। ये एडीआर वालों को भी पता नहीं क्या चुलबुली मची रहती है ये सब पता लगाती रहती है, अरे भाई नेता है जिस भी पार्टी का होगा विरोधी पाटीज़् उस पर तमाम आरोप लगाएगी, गलत सलत मामले में फंसा भी देगी, जिसकी सरकार होगी वो अपने विरोधियों पर तमाम तरह की धाराओं पर अपराध कायम करवा देगा इससे क्या फर्क पड़ता है, और फिर दूसरी बात आप क्या समझते हो कि कोई सीधा-साधा आदमी राजनीति में सफल हो सकता है? साम, दाम, दंड, भेद ये सब जिसको नहीं आते उसका राजनीति से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं होना चाहिए ये बात राजनेता पहले ही कह चुके हैं। कब झुक जाओ, कब सर पर चढ़ जाओ, कब दल बदल लो, कब सरकार गिरा दो, कब दूसरी सरकार में मंत्री बन जाओ, ये सब राजनेताओं के ही धत करम होते हैं और फिर आजकल बिना गुंडागर्दी के राजनीति हो भी नहीं सकती। जिसके पास सौ दो सौ लडक़ों की फौज ना हो वह भला क्या राजनीति करेगा।
वो जमाने चले गए जब राजनेता अपने अकेले व्यक्तित्व के दम पर राजनीति में आते थे और चुनाव जीत जाते थे। अब तो पैसा और ताकत दोनों चाहिए भले ही आपने तमाम तरह के अपराध किए हों लेकिन कहने को तो रहता है कि अभी तो हम आरोपी हैं निर्णय थोड़ी हुआ है और नेता भी जानता है कि भारत में न्याय प्रक्रिया कितनी धीमी है जो आरोप आप पर लगे हैं उसका निर्णय कब आएगा किसको मालूम और फिर अदालत के ऊपर भी अदालत हैं। एक जगह से दोषी ठहरा भी दिए गए तो ऊपर पहुंच जाएंगे जिंदगी ऐसे ही निकल जाएगी। इसलिए एडीआर से अपना कहना है कि ऐसी आलतू फालतू की रिपोर्ट से कोई फर्क किसी नेता को नहीं पडऩे वाला। आप भले ही ही तमाम आंकड़े दे दो और अब तो जनता को भी इन चीजों से कोई फर्क नहीं पड़ता, उनको भी लगता है कि अपना नेता दमदार बाहुबली होना चाहिए बस इसी का फायदा तो ये नेता उठा रहे हैं।

एक लव मैरिज ऐसी भी
भोपाल के कुटुंब न्यायालय में एक बड़ा अजीबोगरीब मामला सामने आया है जिसमें पति-पत्नी के बीच में कुत्ते और बिल्ली को लेकर जंग छिड़ चुकी है दोनों एक दूसरे से इतने तंग आ चुके हैं कि मामला तलाक तक जा पहुंचा है। जबकि शादी हुए कुल जमा आठ महीने ही हुए है। दोनों को पशुओं से बेहद प्यार है और इसी प्यार के चक्कर में उन दोनों के बीच में भी प्यार हो गया दोनों ने शादी भी कर ली। पत्नी अपने साथ अपनी एक पालतू बिल्ली को ले आई इधर पति के पास ऑलरेडी दो कुत्ते, मछली और खरगोश थे। पहले तो दोनों ने सारे जानवरों की देखभाल करने का निर्णय लिया लेकिन बाद में दोनों एक दूसरे के खिलाफ हो गए पति का कहना है कि इसकी बिल्ली पूरे टाइम फर्क ‘म्याऊं म्याऊं’ करती रहती है तो बीबी का आरोप है कि इसका कुत्ता पूरे टाइम ‘भोंक भोंक’ कर मेरी बिल्ली को परेशान करता है। अब कुटुंब न्यायालय परेशान है कि उनको कैसे समझाया जाए।
पति का कहना है कि वो अपने जानवरों को नहीं छोड़ सकता तो पत्नी कहती है कि मैं पति को छोड़ दूंगी लेकिन अपनी बिल्ली से दूर नहीं रह सकती बड़ा अजीब मसला है। कुटुंब न्यायालय के जो काउंसलर हैं वे भी हलाकान हैं कि इस मामले को कैसे निपटाया जाए। अपना तो तमाम शादी करने वाले लोगों से यही निवेदन है की भैया जिससे भी शादी की बात चल रही हो पहले पता लगा लो उसको कुत्ते, बिल्ली, खरगोश, मछली, कछुआ इनसे मोहब्बत तो नहीं है और अगर है तो उससे दूर से ही नमस्ते कर लो वरना आपकी हालत भी इसी जोड़े जैसी हो जाएगी। कुटुंब न्यायालय वाले दोनों को समझाने की कोशिश तो कर रहे हैं लेकिन अपने को लगता नहीं कि दोनों को समझ में आ पाएगा।

सुपर हिट ऑफ द वीक
श्रीमान जी एक पेड़ पर उल्टे लटके हुए थे।
‘ये क्या कर रहे हो तुम्हें क्या हो गया है’
श्रीमती जी ने पूछा। इसलिए लटका हुआ हूं
श्रीमान जी ने उत्तर दिया।
दारूखाना खुला हुआ है काहे की पुलिस…रोड पर बसें खड़ी हंै.. ये क्या काम कर रही माढ़ोताल पुलिस
Author: Jai Lok







