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अब नगर निगमों और नगर पालिकाओं में कमजोर नेता प्रतिपक्ष को बदलने की कवायद शुरूआत होगी

कई स्थानों पर दिखेगा असर, मजबूत विपक्ष के लिए वरिष्ठों को मिलेगा मौका
भोपाल (जयलोक)। मध्य प्रदेश कांग्रेस अब कांग्रेस के केन्द्रीय नेतृत्व के निशाने पर है। केंद्रीय नेतृत्व ने ही इस बार मध्य प्रदेश में सभी 71 जिलों में कांग्रेस के अध्यक्षों की नियुक्तियां कर्रवाई हैं और इन अध्यक्षों के कामकाज को 6 माह तक परखने का निर्णय भी लिया गया है। मध्य प्रदेश विधानसभा के 2028 में होने जा रहे चुनाव को लेकर कांग्रेस संगठन अभी से चौकन्ना और सक्रिय है। जिलों के अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद कांग्रेस संगठन मध्य प्रदेश के नगर निगमों तथा नगर पालिकाओं में कांग्रेस के पार्षद दल के नेताओं के कामकाज पर भी गौर करने जा रहा है।
प्रदेश की कई नगर निगम और पालिकाओं में अब कांग्रेस के कमज़ोर नेता प्रतिपक्षों को बदलने की कवायद शुरू होने जा रही है। यह कवायद इसलिए शुरू की जा रही है क्योंकि गुटबाजी, जातिगत समीकरण और अपनों को उपकृत करने के चक्कर में कांग्रेस ने कई स्थानों पर ऐसे लोगों को नेता प्रतिपक्ष पद पर बैठा दिया है जो सिर्फ हर तरह से सिर्फ अपनी ब्रांडिंग करने में लगे हुए हैं।
कई नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष का विरोध और उनके बदले जाने की मांग उनके ही दल के पार्षदों ने अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के समक्ष उठाई है।
कांग्रेस के कुछ पार्षदों ने भोपाल जाकर ये शिकायतें की हैं तो कुछ ने गोपनीय तरीके से पत्र लिख कर ये मामला उठाया है। कई स्थानों के नेता प्रतिपक्ष अब जल्द ही इस कार्यवाही की सुगबुगाहट की जद में आयेंगे। इनके बारे में संगठन अपने स्तर पर भी जाँच पड़ताल कर वस्तुस्थिति की जानकारी लेने जा रहा है।
कुछ स्थानों पर तो नेता प्रतिपक्ष केवल सत्ता पक्ष के इशारे पर सेट होकर चल रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि वो अपने ही दल के पार्षदों को कम महत्व दे रहे है और अपने भविष्य को मजबूत करने में सबको पीछे छोड़ कर कार्य कर रहे हैं।
संगठन के वरिष्ठ नेताओं तक इस बात की भी शिकायतें आईं हैं कि कुछ स्थानों पर जबरदस्ती नेता प्रतिपक्ष बनाये गए हैं।अनुभवहीन पार्षदों को उनके ही दल के वरिष्ठ पार्षद अपना नेता प्रतिपक्ष मानने से सार्वजनिक रूप से भी कई बार इनकार कर चुके हैं। कुछ नेता नगर निगम में अपने रिश्तेदारों और साथियों को ठेकेदार बना कर अर्थ लाभ का खेल भी खेल रहे हैं। कुछ सिर्फ अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के कारण क्षेत्र विशेष की राजनीति ही कर रहे हैं।
अब दो साल किसी वरिष्ठ को मिलना चाहिए अवसर ताकि जनता के बीच पहुँचे विपक्ष
यह बात भी उठ रही है अब अगले नगर निगम चुनाव को केवल दो वर्ष बचे हैं। इसलिए विपक्ष भी चाहता है नगर निगम के विषय सीधे जनता से जुड़े विषय होते हैं । ऐसे में अब बड़े शहरों की नगर निगमों में नेता प्रतिपक्ष किसी अनुभवी और वरिष्ठ पार्षद को बनाये जाने की मांग भी उठ रही है ताकि विपक्ष की भूमिका और उसकी बात जनता तक मजबूती से पहुँच सके ना की ऐसे पार्षद इस पद पर बने रहें जो सिर्फ अपने पद का उपयोग खुद की ब्रांडिंग में करके पार्टी की कम और खुद की राजनीतिक जमीन मजबूत करने में लगे हुए हैं। नगर निगमों के कुछ नेता प्रतिपक्ष तो अगला विधानसभा चुनाव लडऩे के भी सपने देख रहे हैं।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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