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असम के ‘गैंडे’ को अब नई जगह नई गृहस्थी जमाना पड़ेगी…

चैतन्य भट्ट

आजकल एक्सचेंज आफर्स का जमाना है। पुरानी कार, पुराने बर्तन, पुराने ऐसी, पुराने फ्रिज, पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के अलावा झडऩे वाले बालों के बदले बर्तन तक मिल रहे हैं कहां तक गिनाएं, हर चीज पर एक्सचेंज आफर उपलब्ध है। बाजार गुलजार हैं। जिसे देखो कबाड़ लेकर एक्सचेंज वाली दुकान ढूंढ रहा है। पुराने कपड़ों तक पर एक्सचेंज ऑफर है गनीमत है कि लोग ‘नेकी की दीवार’ से पुराने कपड़े बटोरकर नए कपड़ों की जुगत नहीं लगा रहे।
पता चला है कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी असम के मुख्यमंत्री के लिए एक एक्सचेंज आफर पटक दिया है। जंगली भैंसे और ‘एक सींग वाले गैंडों’ का जोड़ा दें और बदले में बाघ और तेंदुआ ले लें। इसके पहले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह भी असम सरकार को ऐसा ही एक ऑफर दे चुके हैं मगर असम सरकार को ऑफर लुभावना नहीं लगा। जंगली भैंसों के लिए तो प्रदेश में प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध है मगर एक सींग वाले गैंडे के लिए जरूरी वातावरण उपलब्ध होगा या नहीं, पता नहीं है। गेंडों का यह जोड़ा भोपाल वन विहार राष्ट्रीय उद्यान और चिडय़िाघर के लिए मांगा जा रहा है। बदले में इस चिडय़िाघर के बाघ, तेंदुए या अन्य जानवर देने का ऑफर है।

जब से यह खबर सामने आई है असम के गैंडों का जोड़ा भारी परेशान हैं कि ट्रांसफर हो गया तो क्या करेंगे? ट्रांसफर की पीड़ा आसान है भी नहीं। सरकारी कर्मचारी दस बारह मील दूर तबादला होने पर ही छाती पीटने लगते हैं। फिर यहां तो बात सुदूर प्रदेश की है। गैंडों  का जोड़ा भारी चिंतित है कि क्या करें अब नई जगह जाना पड़ेगा तो वहां अपनी नई गृहस्थी भी जमाना पड़ेगी पता नहीं सरकारों को ट्रांसफर करने में करने में क्या मजा आता है।

असम के गैंडे और भोपाल की चिडय़िाघर के जानवरों में चर्चा है है कि इस ट्रांसफर को रुकवाने के लिए किसका जुगाड़ लगाया जाए ? क्या पैसे देकर ट्रांसफर कैंसिल हो सकता है? इस बात पर भी विचार विमर्श किया जा रहा है गैंडे ने अपने बूढ़े बाप की बीमारी का सर्टिफिकेट देकर उनकी हालात पर तरस खाने की बात कही है यानी कुल मिलाकर ये जानवर ट्रांसफर से भयभीत हैं कि  अगर जुगाड़ नहीं लग पाया तो फिर तो जाना ही पड़ेगा। उस गैंडे ने भी अपने बीवी और बच्चों से कह दिया है कि मैं कोशिश तो कर रहा हूं लेकिन अगर मामला जम नहीं पाया तो फिर चलना पड़ेगा। अभी से अपना समान आमान पैक कर लो क्योंकि जॉइनिंग के लिए भी ज्यादा टाइम नहीं मिलेगा। अपना कहना तो ये है कि जब पूरे प्रदेश की गली गली में हर तरह के  गैंडे घूम रहे हैं तो फिर असम में सेटिल हो गए मासूम जानवर को लाकर यहां बसाने की जरूरत क्या है। एकाध को पकड़ कर चिडिय़ाघर में रख दिया जाए। काम डल जाएगा।

वे मंत्री है भैया

एक खबर आई है कि ‘पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क’ में अपने प्रदेश के कुछ मंत्रियों को टाइगर के दर्शन करवाने के लिए ‘एलिफेंट राइड’ करवाई गई। यानी दो हाथियों ने बाघ का रास्ता रोक लिया और फिर इस बाघ का दर्शन इन मंत्रियों ने बहुत देर तक किया, वैसे तो यह करना कानूनी रूप से गलत है लेकिन जिनको बाघ दिखाया गया वे मंत्री हैं और फिर मंत्री तो मंत्री होता है बाघ की क्या हैसियत है कि उन्हें दर्शन ना दे। आम आदमी के लिए ये सब व्यवस्थाएं थोड़ी होती हैं और फिर दूसरी बात मंत्रियों के लिए यदि दो हाथियों ने अगल-बगल खड़े होकर बाघ का रास्ता रोक भी दिया तो ऐसा कौन सा पहाड़ टूट पड़ा कि अखबारों में खबरें छप गई। अपना मानना तो ये है कि बाघ को तो वैसे भी मंत्रियों के काफिले को देखकर खुद-ब-खुद रोक कर उनकी तरफ  ‘फ्लाइंग किस’ उछाल  देना  था और कहना था कि हुजूर आप बताओ मैं कितनी देर यहां खड़ा रहूं जब तक आपका मन ना भर जाए तब तक मैं यही खड़ा रहूंगा। इन बेचारे हाथियों को क्यों तकलीफ  देते हो। वन विभाग में इसको लेकर बड़ी चर्चा है लेकिन अपने को मालूम है कि लाख चर्चा होती रहे कानून कायदे आम आदमी के लिए हैं नेताओं और मंत्रियों के लिए नहीं।

बहन जी अलसेट में

प्रदेश की नगरीय विकास राज्य मंत्री ‘प्रतिभा बागरी’ इन दिनों भारी पंचायत में हैं। उनके भाई और बहनोई दोनों गांजा तस्करी में पुलिस ने पकड़ रखे हैं। अब चूंकि वे मंत्री हैं और उनका सगा भाई यदि गांजे की तस्करी कर रहा है तो मीडिया का काम तो पूछने का है सो एक रिपोर्टर ने पूछ लिया अब बेचारी मंत्री करती तो क्या करती कह दिया कि पहले पता लगाओ वास्तविकता क्या है। मीडिया वालों ने पता लगा लिया कि गांजे की तस्करी में पकड़े गए  अनिल बागरी मंत्री जी के सबसे बड़े भाई हैं?। इधर बीजेपी मुख्यालय में भी मंत्री जी को बुलाकर उनसे जवाब सवाल किया जा रहा है। कहते हैं उनको फटकार भी लगाई गई है कि आपके कारण पार्टी की छीछालेदर हो रही है। लेकिन अपना मानना ये है कि बहन का भाई कुछ भी कर रहा है तो उसमें बहन जी का दोष कैसे हो सकता है, बहन तो वैसे भी पराया धन होती है शादी ब्याह हो जाती है तो उसका तो मायके से नाता वैसे भी कम हो जाता है और फिर भाई साहेब क्या कर रहे थे, कहां से गांजा ला रहे थे, किसको बेच रहे थे, ये बेचारी मंत्री क्या जाने लेकिन कहते हैं ना कि किसी का करम किसी को भोगना पड़ता है इधर कांग्रेसियों को तो एक अच्छा खासा मौका मिल गया। बहन जी के भाई ने प्लेट में सजाकर मुद्दा दे दिया कि लो कर लो राजनीति, वैसे भी इस्तीफा मांगना तो आज का नाम बात हो गई है ये बात अलग है कि कोई इस्तीफा देता नहीं है अपने को भी मालूम है कि किसी का कुछ नहीं बिगड़ेगा उन्हें ताकीद दे दी गई है और उन्होंने भी उसे स्वीकार कर लिया है। लेकिन उसके पहले अपनी उनको एक सलाह है कि उनके जो और दूसरे भाई हैं वे लोग क्या कर रहे हैं इसका पता भी जरूर लगा लें। क्या पता कुछ दिन बाद किसी दूसरे भाई के चक्कर में बहन जी की अलसेट हो जाए।

सुपरहिट ऑफ  द वीक

श्रीमती जी से परेशान होकर श्रीमान जी एक दिन पंडित के पास गए और बोले
‘पंडित जी एक बात बताइए ये जनम जनम का साथ वाली बात सच है क्या?’
‘सौ फीसदी सच’
‘इसका मतलब है कि मुझे अगले जन्म में भी यही पत्नी मिलेगी’ श्रीमान जी ने पूछा
पंडित जी ने कहा ‘बिल्कुल’
‘हे भगवान फिर तो खुदकुशी करने से भी कोई फायदा नहीं’ श्रीमान जी बड़बड़ाए।

 

गौरीघाट पहुँचे आयुक्त निराश्रितों व्यापारियों से की चर्चा

Jai Lok
Author: Jai Lok

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