
जबलपुर (जयलोक)। संसद में पेश हो रहे इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2025 के खिलाफ पूरे देश में विद्युत कर्मी आज हड़ताल पर हैं। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश विद्युत मंडल अभियंता संघ के आह्वान पर प्रदेश के अभियंताओं ने मिलकर मध्यप्रदेश में धरना व प्रदर्शन का निर्णय लिया। पूरे दिन मध्यप्रदेश के कर्मचारी एवं अधिकारी भी आंदोलन में शामिल रहे। निजीकरण के विरुद्ध एवं अभियंताओं के मुद्दे के निराकरण हेतु मध्य प्रदेश के अभियंता शांतिपूर्वक धरना, विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

विद्युत विभाग के मुख्यालय में शक्ति भवन गेट के सामने सभी अधिकारी कर्मचारी दोपहर 1:30 बजे एकत्रित हुए और यहंा उन्होंने विरोध दर्ज कराया।
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि देश के लगभग 27 लाख बिजली कर्मचारी और अभियंता आज एक दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर हैं। यह हड़ताल पावर सेक्टर के निजीकरण के विरोध में, इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 एवं प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 को वापस लेने तथा पावर सेक्टर के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग को लेकर की जा रही है। श्री दुबे ने बताया कि पहली बार बिजली कर्मचारियों की मांगों के समर्थन में संयुक्त किसान मोर्चा और दस केंद्रीय ट्रेड यूनियन भी आंदोलन में शामिल हुए हैं। बिजली कर्मचारी, इंजीनियर, मजदूर संगठनों और किसानों की संयुक्त भागीदारी से आज हड़ताल स्वतंत्र भारत के इतिहास की सबसे बड़ी औद्योगिक कार्रवाई में से एक होगी।

उन्होंने कहा कि पावर सेक्टर में नियमित प्रकृति के कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर आउटसोर्सिंग की जा रही है। हड़ताल की प्रमुख मांगों में आउटसोर्सिंग पर रोक लगाना, नियमित पदों पर सीधी भर्ती करना तथा आउटसोर्स कर्मियों का नियमितीकरण भी शामिल है। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने चिंता व्यक्त की है कि बिजली क्षेत्र का निजीकरण वितरण, उत्पादन और टीबीसीबी के जरिए ट्रांसमिशन गरीब उपभोक्ताओं, छोटे एवं मध्यम उद्योगों तथा आम जनता के हितों के विरुद्ध है। इसलिए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 को तत्काल वापस लिया जाना आवश्यक है।

Author: Jai Lok






