
जबलपुर (जयलोक)
श्री बगलामुखी सिद्ध पीठ शंकराचार्य मठ सिविक सेंटर मढ़ाताल में श्रावण मास पावन पर्व में चल रहे श्री शिव महापुराण एवं असंख्य रुद्री (पार्थिव शिवलिंग) के समापन दिवस पर पूज्य ब्रह्मचारी श्री चैतन्यानंद जी महाराज श्री के करकमलों से भगवान देवाधिदेव महादेव भगवान शिव महारुद्राभिषेक, दिव्य श्रृंगार एवं आरती किया गया। आज की कथा में पूज्य महाराज श्री ने बताया कि शिव महापुराण में गुरु की महिमा का विस्तृत रूप से वर्णन है। क्योंकि गुरु ज्ञान का भंडार होते हैं और वे अपने शिष्यों को ज्ञान प्रदान करते हैं। शिव महापुराण में कहा गया है कि गुरु के बिना ज्ञान प्राप्त करना असंभव है।गुरु ही शिष्य को सही मार्ग दिखाते हैं।

गुरु ही शिष्य को मोक्ष के मार्ग पर ले जाते हैं। भगवान शिव को आशुतोष भी कहा जाता है, आशुतोष का अर्थ है जो शीघ्र प्रसन्न हो या जो तुरंत इच्छाएँ पूरी करे. यह नाम भगवान शिव के लिए एक लोकप्रिय विशेषण है, जो उनके दयालु और शीघ्र प्रसन्न होने वाले स्वभाव का प्रतीक है।
भगवान शिव को प्रसन्न करना बहुत मुश्किल नहीं है, वे सहजता से प्रसन्न हो जाते हैं।

भगवान शिव एक लोटा जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं सोमवार, मासिक शिवरात्रि, प्रदोष व्रत और महाशिवरात्रि जैसे विशेष दिनों में भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल मिलता है.
आज शिवमहापुराण के समापन में श्री मति पद्मा मेनन, श्रीमति नीता पटेल, श्री घनश्याम मिश्रा, श्री अमित प्रतिक्षा सिंह, श्री रमेश चित्रा महावर, श्री आलोक तिवारी, श्रीमति स्नेहा ठाकुर, श्री राजू कुमारी सृष्टि दुबे मनोज सेन आदि भक्तगण उपस्थित रहे।

Author: Jai Lok







