
जबलपुर (जय लोक)। कटनी की नगर पुलिस अधीक्षक नेहा पच्चीसिया इन दिनों गंभीर आरोपों और विभागीय जांच के चलते सुर्खियों बनी हुई हैं। उन पर ट्रांसपोर्ट व्यवसायी से कथित अवैध वसूली करने के साथ ही विभागीय लापरवाही के आरोप लगे हैं। उनकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। एएसपी अनु बेनिवाल को सौंपी गई जाँच के बाद चार बार सीएसपी नेहा पच्चीसिया को नोटिस जारी किया जा चुका है। लेकिन ना तो उन्होंने किसी नोटिस का जवाब दिया और ना ही बयान दर्ज कराने जबलपुर आईं। अब इस मामले में एएसपी अनु बेनिवाल आगे की कार्रवाही कर सकती हैं।

कटनी की सीएसपी नेहा पच्चीसिया पर एक ट्रांसपोर्टर से कथित तौर पर अवैध वसूली करने और हत्या के एक मामले में कोर्ट में समय पर चालान पेश न करने (विभागीय लापरवाही व सौदेबाजी) के दो गंभीर आरोप लगे हैं, जिसकी जांच जबलपुर की एडिशनल एसपी अनु बेनीवाल को सौंपी गई है। जाँच में यह बातें सामने आई हैं कि विवादित जमीन खरीदने के लिए रकम सीएसपी के करीबी बताए जाने वाले एक व्यक्ति ने उपलब्ध कराई थी। इस मामले की पुष्टि के लिए भी जाँच की जा रही है।

रविवार तक पूरी हो सकती है जाँच
सूत्रों का कहना है कि सीएसपी नेहा पच्चीसिया द्वारा जाँच अधिकारियों की मदद नहीं की जा रही है। बार बार नोटिस जारी होने के बाद भी नोटिस की अनेदखी की जा रही है। वहीं यह भी पता चला है कि दो दिनों में जाँच रिपोर्ट तैयार हो जाएगी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सौंप दी जाएगी।


फुटेज आए सामने
जाँच कर रही टीम को एक सीसीटीवी फुटेज भी मिला है। जिसमें यह देखा जा रहा है कि सीएसपी नेहा पच्चीसिया सरकारी वाहन में बैठी है और उनका चालक केशव रूपये लेते हुए नजर आ रहा है। इस मामले में करीब 20 लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।
कटनी जेल में बंद रमेश के दर्ज हुए बयान
मामले में आरोपी रमेश कटनी जेल में बंद है, जिससे पूछताछ के लिए जाँच अधिकारी अनु बेनिवाल ने न्यायालय से अनुमति लेने क ेबाद कटनी जेल पहुंचकर उससे उससे पूछतांछ कर उसके बयान दर्ज किए हैं।
आरक्षक पर कार्रवाह अब सीएसपी की बारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए कटनी पुलिस अधीक्षक ने प्रारंभिक जांच के बाद चालक आरक्षक केशव सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही प्रशासनिक फेरबदल करते हुए नेहा पच्चीसिया के अधिकार क्षेत्र से कुठला, माधवनगर और रंगनाथ नगर थाना हटाकर उनका प्रभार अन्य अधिकारी को सौंप दिया गया। वहीं एएसपी अनु बेनिवाल द्वारा चार बार नोटिस जारी करने के बाद भी उपस्थित ना होने पर अब उनके खिलाफ भी इस मामले में कार्रवाही की जा सकती है।
सुशासन की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगा जन विश्वास अभियान
Author: Jai Lok






