
प्रकृति की सबसे बड़ी देन है जल, पेड़ और वायु

12 लाख पेड़ लगवाने का संकल्प
संदर्भ : पर्यावरण और जल संवर्धन

जबलपुर (जयलोक)। वर्तमान समय में हम सिर्फ प्रकृति से कुछ ना कुछ ले रहे हैं उसे लौटा कुछ नहीं रहे, बल्कि प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर प्रकृति का कुछ ना कुछ बिगाड़ ही रहे हैं। ऐसी स्थिति में अब प्रकृति से हमारा संतुलन बिगडऩे पर उसके नुकसान और खामियाजे भी हमको ही भुगतने पड़ रहे हैं। अभी भी वक्त है जिम्मेदारी हमारी है कि हमें इस दिशा में सकारात्मक सोच के साथ गंभीरता और जिम्मेदारी का परिचय देते हुए कदम भी बढ़ाने होंगे और प्रयास भी करने होंगे। केवल फोटो खिंचवाने वाला पौधारोपण हमारे सोशल मीडिया में तो वहवाही करवा सकता है लेकिन प्रकृति से हमारे संतुलन बनाने की जिम्मेदारी को पूरा नहीं कर सकता।
वर्तमान समय में पूरी दुनिया में पर्यावरण संरक्षण को लेकर और जल संरक्षण को लेकर बड़ी मुहिम चल रही है। जबलपुर के महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू ने भी आने वाले कुछ महीनों में 12 लाख पौधे लगाने का संकल्प लिया है। साथ ही यह निश्चित भी किया है की हर हाल में इस प्रक्रिया के दौरान प्राथमिकता के तौर पर इस बात को सुनिश्चित किया जाएगा कि लगाए जाने वाला हर पौधा जीवित रह सके।
अब इस बात का संकल्प हम सभी जबलपुरवासियों को भी लेना चाहिए। 52 ताल-तालाब के जबलपुर को हरियाली की चादर से ढक़े रखने के लिए हमें ही मजबूत संकल्प लेने होंगे। गंभीरता और ईमानदारी से प्रयास करने होंगे। आखिर ये शहर हमारा घर है इसकी चिंता हम सब को करनी होगी।
वर्तमान में यह बहुत ही उचित अवसर है जब हम पर्यावरण की रक्षा और जल संवर्धन का यह कार्य कर सकते हैं। यह बात भी बिल्कुल सत्य है कि मनुष्य जब भी कोई काम भावनाओं के साथ जोडक़र करता है तो निश्चित रूप से वह कार्य में सफल होता है। प्रकृति पूरे विश्व की माँ है इस बारे में कोई दो मत नहीं है। इसी माँ की गोद को फिर हरियाली से परिपूर्ण कर देने के लिए हम सभी को इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए एकजुट होकर प्रयास करना होगा।
संयुक्त रूप से किए गए प्रयास कभी असफल नहीं होते और उनके सकारात्मक और सुखद परिणाम ही सामने आते हैं। महापौर, नगर निगम, अन्य विभागों और सरकारी संस्थाओं के साथ मिलकर अगर कोई अच्छा प्रयास कर रहे हैं तो जबलपुर संस्कारधानी वासियों को भी कदमताल मिलानी चाहिए। क्योंकि यह शत प्रतिशत शहर के भले के लिए और हमारी आनेवाली पीढिय़ों और पर्यावरण की सुरक्षा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम होगा।
हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि आज हम अपने माता-पिता की स्मृति में एक पौधा लगाएंगे। जिनके माता-पिता का आशीर्वाद उन पर बना हुआ है वह उनकी लंबी उम्र की दुआ के साथ यह संकल्प उठा सकते हैं। प्रकृति की सेवा सीधे तौर पर ईश्वर की सेवा से जोडक़र देखी जाती है। दोनों ही विकल्प में आप अपने माता-पिता के लिए सुख शांति की मनोकामना को सीधे ईश्वर के चरणों तक पहुंचा सकते हैं।
हम सभी ये मानकर चलें कि जैसे-जैसे वह पौधा वृक्ष के रूप में आकर लेता जाएगा ईश्वर इस सेवा का फल आपके माता-पिता को सुख के रूप में प्रदान करेगा चाहे वह इस धाम में हो या ईश्वर के धाम में।
संकल्प का दूसरा सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि आज हम अपने माता-पिता की याद में या उनके स्वस्थ जीवन की लंबी आयु के लिए यह संकल्प लेते हैं तो आपका यह संकल्प भविष्य में आपके बच्चों को ही शुद्ध प्राण वायु, संतुलित पर्यावरण, सामान्य तापमान के रूप में आपके पूर्वजों के नाम से बच्चों को आशीर्वाद स्वरूप प्राप्त होगा।
हमारे पूर्वजों हमारे माता-पिता के द्वारा जो पेड़ पौधे लगाए गए उनका लाभ आज हम उठा रहे हैं। आज भी बहुत से लोग यह बात स्वीकार कर लेंगे की उन्होंने कभी अमरूद, आम, बैर, सीताफल, शहतूत जैसे फलों को खरीद कर बहुत कम ही खाया होगा। इसकी प्रमुख वजह यह थी कि यह हर स्थान पर सुलभ उपलब्ध थे। यह आशीर्वाद हमें हमारे पूर्वज दे गए थे। अब हमारी बारी है कि हम अपने बच्चों के लिए क्या दे कर जाएंगे। पेड़ बढ़ेंगे तो जल स्तर बढेगा और शुद्ध वायु भी मिलेगी।
जैसे-जैसे कंक्रीट को हमने स्थान अधिक देना प्रारंभ किया यह सभी सुख सुविधा और प्रकृति के वरदान स्वरुप प्राप्त देन हमसे दूर होती चली। अब अगर हम अपने बच्चों को इस आशीर्वाद की प्राप्ति करवाना चाहते हैं तो निश्चित रूप से हमें पेड़ लगवाने संकल्प लेकर कदम आगे बढ़ाना होगा।
जब तलक जिंदा रहेगा आशियां दे जायेगा।
कत्ल होगा पेड़ तो लकडिय़ां दे जायेगा।

Author: Jai Lok







