
@चैतन्य भट्ट
ऐसा माना जाता है की गैर कभी अपने नहीं होते और जो अपने होते हैं वही वक्त पर काम आते हैं, गैरों से वैसे भी कोई उम्मीद नहीं रखी जाती लेकिन अपनों से उम्मीद का दामन नहीं छूटता। लेकिन अपने एमपी की राजनीति में सब उलट पलट हो गया है विरोधियों को तो छोड़ो अब अपनी खुद की पाटीज़् के नेता पार्टी और सरकार के खिलाफ अभियान छेड़े पड़े हैं। पार्टी के बड़े नेता चाहे वो प्रदेश अध्यक्ष हो या मुख्यमंत्री इन अपनों द्वारा दी जा रही अलसेठ से भारी हलाकान हैं और कोई एक अपना हो जो परेशान कर रहा हो तो उसे सेट भी किया जा सकता है लेकिन यहां तो ऐसे अपनों की लंबी लिस्ट है जो जब चाहे ऐसे बयान दे देते हैं कि विरोधी भी शर्मा जाएं। अपने हिसाब से तो अब विरोधियों को इन पार्टी के अपनों से शिक्षा लेनी चाहिए कि कौन-कौन से मुद्दे उठाए जाएं ताकि सरकार और पार्टी को बगलें झांकना पड़ जाए, अब देखो ना एक विधायक जी हैं उन्होंने एक डॉक्टर के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया और जब कुछ नहीं हुआ तो सीधा-सीधा विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा ही भेज दिया कि जब सरकार और अधिकारी उनकी नहीं सुन रहे तो फिर उनका विधायक रहना फालतू ही है। एक और विधायक है नरियावली के पार्टी के ही हैं लेकिन शराब की अवैध बिक्री से परेशान होकर कई बार अफसरों से शिकायत कर चुके कि अवैध शराब की बिक्री रोकी जाए लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई, इसी तर्ज पर पार्टी के एक और विधायक जो हाल ही में बने जिला मऊगंज से विधायक हैं उन्होंने तो कमाल ही कर दिया सीधे-सीधे एक पुलिस अफसर के सामने दंडवत हो गए और बोलने लगे मुझे गुंडो से मरवा दो क्योंकि आप लोग कुछ सुनने वाले नहीं हो अवैध शराब का धंधा लगातार बढ़ता जा रहा है। इधर एक और वरिष्ठ विधायक जो मंत्री भी रह चुके हैं अक्सर अपनी सरकार को कटघरे में खड़ा करते रहते हैं उन्होंने फौरन से पेशतर उनके पक्ष में बयान दे दिया कि ये सरकार शराब सिंडिकेट के सामने नतमस्तक है, वैसे बात सही भी है कि सरकारें शराब से होने वाली आय से ही तो चलती है प्रदेश में जितने ज्यादा दारूखोर होंगे उतनी ज्यादा दारू रुकेगी और जितनी ज्यादा दारू बिकेगी उतनी रेवेन्यू सरकार के खजाने में आएगी, तो जो सरकार के खजाने में रेवेन्यू ला रहा है उसके सामन नतमस्तक होना तो कोई बड़ी बात नहीं है तमाम सरकारों को तो दारू पीने वालों का शुक्रगुजार होना चाहिए कि अगर वे ना होते तो दारू कैसे बिकती और जब दारु न बिकती तो सरकारें पाई पाई को मोहताज हो जाती, ये भी तो उन विधायकों को समझना चाहिए था। एक और विधायक है सबसे ज्यादा धनवान माने जाते हैं, उन्होंने भी कह दिया कि मुझे जान का खतरा है मेरे आधार कार्ड में गड़बड़ी कर दी गई है अब पार्टी भारी परेशान है इन सबको कैसे सेट किया जाए, सुना है कि पार्टी के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री जी ने इन तमाम , ‘एंग्री यंग मैन विधायकों’ को भोपाल बुलाया है किसी को डांटा है तो किसी को पुचकारा है कि भैया अपनी सरकार है यार, कुछ तो ख्याल रखा करो ये विरोधियों का काम है पर आप लोग भी उन्हीं की रास्ते पर चल पड़े हो। एम पी में जो कुछ भी हो रहा है उसको देखकर जगजीत सिंह की एक गज़़ल का मिसरा याद आता है जो सरकार गा रही है ‘वो जो अपने हैं क्या वो अपने हैं, कौन दुख झेले आजमाने कौन’ इधर असंतुष्ट विधायक एक ही गाना गा रहे हैं ‘गैरों पर करम अपनों पे सितम ए जाने वफा ये जुल्म ना कर’
मुफ्त खोरी अमेरिका तक पहुंची
पूरे देश में तमाम राजनीतिक दल सत्ता पाने के लिए मुफ्तखोरी की ऐसी बाढ़ लाए हुए हैं जिसमें तमाम मतदाता बहे जा रहे हैं। इन राजनीतिक दलों को ये समझ में आ गया है कि मुफ्त में माल दो और उसके बदले में वोट हथिया लो और फिर जो भी मुफ्त दिया जा रहा है वो अपनी जेब से तो जा नहीं रहा सरकार का खजाना खाली होता है तो होता रहे अपने वोटो का खजाना तो भरता रहेगा। कोई भी प्रदेश कोई भी पार्टी इस मुफ्तखोरी की स्कीमों से अछूती नहीं बची लेकिन अब तो गजब हो गया ये मुफ्तखोरी की छुआछूत वाली बीमारी भारत की सीमा पार अमेरिका तक जा पहुंची। वहां होने वाले राष्ट्रपति के चुनाव में पुराने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा कर दी है कि अगर वो जीत गए तो बिजली के बिल आधे हो जाएंगे। यानी अब वहां भी मुफ्त खोरी का आलम शुरू हो चुका है हो सकता है कि ट्रंप के खिलाफ खड़ी हुई भारतीय मूल की कमला हैरिस भी ऐसी कोई घोषणा कर दें क्योंकि कहीं ना कहीं खून तो उनके अंदर भारतीयों का ही है और जब भारत में मुफ्तखोरी की बयार बह रही हो तो फिर वे कैसे उससे किनारा कर सकती हैं। सबसे पहले मुफ्तखोरी की स्कीम चलाने के लिए बदनाम हुए दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तो अपनी छाती चौड़ी कर ली और कहा देखा मेरी स्कीम अमेरिका तक जा पहुंची। अपने को तो लगता है कि ये तमाम सरकारें जब तक एक-एक पैसे के लिए मोहताज नहीं हो जाएंगी तब तक वे सरकारी खजाने को ऐसे ही लुटाती रहेंगी और फिर जनता का क्या है आप दोगे तो हम लेते रहेंगे और फिर किसी को भी फ्री में कोई चीज मिलती है तो वो कोई बेवकूफ थोड़ी है जो इससे इनकार कर देगा। अब भारत की सीमा पार अमेरिका में मुफ्त की स्कीम शुरू होने वाली है कुछ दिन में और दूसरे देशों में भी जब चुनाव होंगे तो वहां भी यही सब होगा इसमें कोई संदेह अब बचा नहीं है।
मोदी जी की बात तो सुन लो
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोर-जोर से चिल्ला चिल्ला कर कहा है कि दागी और भ्रष्टाचारी अफसरों और कर्मचारियों की छुट्टी करो, उनके खिलाफ कार्यवाही करो, उन्हें जबरन रिटायर भी कर दो। अगर मोदी जी की बात अपने प्रदेश के कर्ताधर्ताओं ने भी सुन ली तो आधे से ज्यादा अफसरों और कर्मचारियों की तो छुट्टी हो जाएगी यही कारण है कि जिन पर भी भ्रष्टाचार का आरोप लगता है उनके खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति देने की जिम्मेदारी जिस सरकार पर है वो अपने आंख, मुंह, नाक सब बंद करके बैठ जाती है और जब तक अभियोजन की स्वीकृति नहीं मिलती तब तक भ्रष्ट अफसर हो या कर्मचारी उस पर कोई कार्यवाही नहीं हो सकती, लोकायुक्त हो या ईओडब्ल्यू आप पकड़ते रहो किसी को भी, लेकिन जब तक सरकार अभियोजन की स्वीकृति नहीं देगी तब तक उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा, अब देखो ना एक महिला पटवारी आज से चार-पांच साल पहले घूसखोरी में पकड़ी गई थी लेकिन उसका कुछ नहीं बिगड़ा और एक बार फिर वो रिश्वतखोरी में पकड़ी गई। अफसर और कर्मचारियों को भी लगता है कि जब सरकार अपने साथ है तो फिर काहे का डर। खूब भ्रष्टाचार करो अभियोजन की स्वीकृति देना तो सरकार के हाथ में है और वो स्वीकृति देगी नहीं, इसलिए जमकर भ्रष्टाचार करो और सरकार का जिंदाबाद करो, इधर मोदी जी कह रहे हैं की भ्रष्ट अफसर और कर्मचारियों को हटाओ लेकिन अपने को तो लगता है कि ये सरकार मोदी जी की भी बात सुनने के लिए तैयार नहीं है अब जब ऊपर से बत्ती पड़ेगी तभी कुछ हो पाएगा वरना ये भ्रष्टाचारी ऐसे ही भ्रष्टाचार करते रहेंगे और जनता ऐसे ही पिसती रहेगी।
सुपरहिट ऑफ द वीक
‘शादी से पहले तुम मुझे होटल, सिनेमा, पिकनिक, प्रदर्शनी और न जाने कहां-कहां घुमाने ले जाते थे लेकिन जब से शादी हुई है घर के बाहर तक नहीं ले जाते’ श्रीमती जी ने गुस्से में श्रीमान जी से कहा ‘पगली तुमने कभी चुनाव के बाद प्रचार देखा है’ श्रीमान जी ने उत्तर दिया।

Author: Jai Lok







