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क्या इस बार भी कान फोड़ू डीजे मचाएंगे शोर हर साल उड़ रही डीजे पर प्रतिबंधों की खुलेआम धज्जियाँ ….डीजे वालों को मानना पड़ेंगे यह नियम-एएसपी सोनाली दुबे

जबलपुर (जयलोक)
बड़ी विडंबना की बात है कि हमारे जबलपुर शहर में पिछले कई सालों से कान फोडू डीजे त्योहारों के समय और जलसों में उपयोग करने पर प्रतिबंध तो लगता है वह सिर्फ  कागजों में ही नजर आता है। हर बार शांति समिति की बैठक होती है प्रबुद्ध जनों को बुलाया जाता है। जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा बड़ी बड़ी बातें और बड़े बड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन उसी दिन शाम को सडक़ों पर लगने वाले सार्वजनिक पंडालों और भंडारे स्थलों पर ही 12 से लेकर 24 स्पीकर वाले डीजे खुलेआम बंद कमरे में तय होने वाले इन नियम कानून की धज्जियां उड़ाते नजर आ जाते हैं। इस बार भी गणेश उत्सव की तैयारी के पूर्व प्रशासन और समिति सदस्यों के बीच में हुई बैठक में यह तय हुआ था कि प्रशासन ने डीजे पर इस बार भी प्रतिबंध लगा के रखा है इसका उपयोग न किया जाए लेकिन कहीं भी इसका असर नजर नहीं आया बल्कि इसकी धज्जियां डीजे की तेज आवाज के साथ दूर तक उड़ती नजर आईं।
अब सभी के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार भी नवदुर्गा में होने वाले उत्सव में डीजे पर प्रतिबंध कारगर साबित हो पाएगा। क्या जिला प्रशासन इस पर प्रतिबंध लगाने में कामयाब साबित होगा। या फिर इस बार भी खुले आम इस नियम की धज्जियां उड़ेंगी और कुछ लोग दो स्पीकर के बजाए साउंड बॉक्स की दीवार खड़ी करके आमजन का निकलना वहां से मुश्किल कर देंगे।
अधिकांश स्थानों पर देखा गया है कि पंडालों के आसपास होने पर उनके बीच में तेज आवाज में गाने बजाने की प्रतिस्पर्धा प्रारंभ हो जाती है। इस वजह से वहां से गुजरने वाले लोगों को बहुत परेशानी होती है। यहां तक की आसपास रहने वाले लोग भी बहुत परेशान हो जाते हैं। विगत वर्ष भी पुलिस कंट्रोल रूम में बड़ी संख्या में इस प्रकार की शिकायतें प्राप्त हुई थी जिसमें तेज आवाज में डीजे बजाने की शिकायतें अधिक थी।
 झगड़े का कारण बनता है
पूर्व में हुए कई विवादों में यह भी देखने में आया है कि तेज आवाज में बजने वाला डीजे कई बार झगड़े का कारण भी बनते है और बेवजह तनाव के माहौल निर्मित हो जाते हैं जो त्यौहार की सांस्कृतिक परंपरा के लिए खतरनाक साबित होते हैं। इन्हीं सब स्थितियों से निपटने के लिए प्रशासन ने यह निर्णय लिया था कि तेज आवाज में बजने वाले डीजे का उपयोग पूर्णत: प्रतिबंधित रहेगा। लेकिन इसका परिपालन कहीं भी होते नजर नहीं आता।
 डीजे संचालकों की भी होती है बैठक, नहीं मानते नियम
विगत वर्षों में भी त्योहारों के पूर्व में पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन के अधिकारी डीजे संचालकों की भी बैठक बुलाकर उन्हें इस नियम के बारे में समझाइश देते हैं। लेकिन यह समझाईश सिर्फ  कागजों पर और मौखिक रूप से सिमटकर रह जाती है। हालांकि पूर्व की कई कार्रवाई में पुलिस ने डीजे जप्त भी किए हैं। इसी प्रकार की सख्त कार्यवाही से ही प्रशासन और पुलिस विवाद का कारण बनने वाले डीजे पर प्रतिबंध लागू कर पाएगी।
दो बॉक्स की अनुमति लेकर खड़ी कर लेते हैं साउंड की दीवार
कई स्थानों पर यह भी देखने को मिला है कि समितियां अपने क्षेत्र के अनुविभागीय दंडाधिकारी से दो साउंड बॉक्स की विधिवत अनुमति प्राप्त करती हैं। इसकी आड़ में नियमों की अवहेलना की जाती है और पूरे साउंड बॉक्स की दीवार खड़ी कर आम जनता के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर दी जाती। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अनुमति देने के बाद कोई भी जिम्मेदार अधिकारी उसकी जांच करने मौके पर नहीं जाते हैं।
डीजे वालों को मानना पड़ेंगे यह नियम-एएसपी सोनाली दुबे
पुलिस कंट्रोल रूम जबलपुर में दुर्गोत्सव पर्व को दृष्टिगत रखते हुये अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) श्रीमति सोनाली दुबे, द्वारा पुलिस कन्ट्रोल रूम में डी.जे संचालको की बैठक ली गयी। बैठक में समस्त नगर पुलिस अधीक्षक तथा लगभग 40 डीजे संचालक उपस्थित थे। बैठक में सभी को बताया गया कि डी.जे पूर्णत: प्रतिबंधित रहेगा। साउंड सिस्टम की अनुमति प्राप्त करते हुये अनुमति में उल्लेखित शर्तों के अनुसार ही साउड सिस्टम लगायें। समस्त डीजे-साउंड बाक्स संचालक झांकियों, स्वागत मंचो, चल समारोह आदि के दौरान किसी भी प्रकार से 2 से अधिक बॉक्सों का प्रयोग नही करेंगे एवं प्रयोग किये जा रहे स्पीकर बॉक्स 12 इंच व्यास से अधिक के नहीं होगे तथा उनका वॉल्यूम 50 डेसिमल से ज्यादा न रखा जावें, एवं ध्वनि प्रदूषण अधिनियम के प्रावधानों के तहत ही उनका उपयोग किया जावें। बॉक्सों के साथ चोंगों का प्रयोग बिल्कुल भी नही किया जावेगा। ऐसे गाने नहीं बजाये जायें जिससे किसी की धार्मिक भावना आहत हों।

Jai Lok
Author: Jai Lok

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