
जबलपुर (जय लोक)
पिछले दो-तीन दिनों से विजय नगर बिजली विभाग डिविजन और भाजपा के नेताओं के बीच में तनातनी चली आ रही है। भाजपा नेताओं ने बिजली विभाग के कार्यपालन यंत्री इमरान खान पर बदसलूकी करने और उपभोक्ताओं को परेशान करने अनाप-शनाप बिजली बिल देने के आरोप लगाए। इसके पलटवार में अधीक्षण यंत्री शहर संजय अरोड़ा और कार्यपालन अभियंता इमरान खान ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए भाजपा पार्षद के पति पुष्पेंद्र सिंह पर विजयनगर में अवैध कॉलोनी के निर्माण और उसमें चोरी की बिजली पकड़े जाने के बाद 20 से 25 लाख रुपए की दंड की राशि वसूली के मामले को दबाने के लिए आरोप लगा दिया। बिजली विभाग के अधिकारियों द्वारा इस बात का खुलासा किए जाने के बाद कोतवाली थाने के सामने किए गए 4 घंटे के भाजपा नगर सत्ता के प्रदर्शन पर सवाल उठ गए हैं। प्रदर्शन में तीन विधायक भी मौजूद थे। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या बिना हकीकत जाने कोतवाली थाने के सामने केवल पुलिस पर दबाव बनाने के
लिए नगर भाजपा द्वारा यह धरना प्रदर्शन किया गया। पुलिस ने विद्युत मंडल के अधिकारियों की लिखित शिकायत पर भाजपा के पदाधिकारी और पार्षद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। भाजपा के पदाधिकारी के ऊपर चार पांच बिजली चोरी के मामले भी दर्ज होने की बात कही गई है। विद्युत मंडल के अधिकारियों ने कहा कि अवैध कॉलोनी पर निकाली गई रिकवरी के संबंध में दबाव बनाने के लिए यह पूरा हंगामा किया गया। अब अगर ऐसा था तो नगर भाजपा की पदाधिकारियों और प्रदर्शन में पहुंचे विधायकों ने मामले की हकीकत को पहले क्यों नहीं जान लिया। पूरे प्रदेश में इस प्रदर्शन को लेकर चर्चाएं हो रही हैं। कोतवाली थाने के सामने धरना देते हुए भाजपा के नेताओं ने पूरा मामला पुलिस के ऊपर डाल दिया और उन पर दबाव बनाकर विद्युत मंडल के अधिकारियों के ऊपर भी काउंटर केस दर्ज करवाया। वायरल वीडियो में भाजपा के नेता पार्षद तोडफ़ोड़ करते साफ नजर आ रहे हैं। लेकिन भाजपा नेताओं ने चार घंटे हंगामा कर ऐसा दबाव बनाया की मजबूरी में पुलिस को विद्युत मंडल के अधिकारी कर्मचारियों पर एससी एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करना पड़ा। जिसके कारण इस पूरे मामले पर जातिगत रंग भी चढ़ गया।
सोशल मीडिया में भी भाजपा के नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रिया सामने आ रही है। उत्तर मध्य विधानसभा के एक पूर्व मंडल अध्यक्ष ने सोशल मीडिया में पोस्ट डालते हुए लिखा कि ना भूतों ना भविष्यति उनके द्वारा लिखी गई इस पोस्ट पर विभिन्न प्रकार के मत देखने को मिले। यह भी देखने को मिला कि इस मामले में भाजपा में स्थानीय स्तर पर काफी मनभेद और मतभेद है।
अब सवाल यह उठता है कि जब हंगामा करने विद्युत मंडल के दफ्तर में पहुंचे भाजपा के मंडल अध्यक्ष और पार्षद पर पहले ही बिजली चोरी के मामले दर्ज हैं और अभद्रता के आरोप लग चुके हैं तो ऐसे में पूरी बीजेपी को इस मुद्दे पर सडक़ पर आने की आवश्यकता क्यों पड़ी। अगर कार्यकर्ता से संबंधित सीधी बात होती तो यह आंदोलन सुपरहिट हो जाता। लेकिन, इतने गंभीर आरोप लगने के बाद आरोपियों के पक्ष में भाजपा के दिग्गजों का खड़ा हो जाना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।
वरिष्ठ नेता खुश नहीं
इस हंगामा, धरना, प्रदर्शन, रिपोर्टबाजी की पूरी जानकारी प्रदेश भाजपा से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक बैठे पदाधिकारी तक पहुंच गई है। शुरू में तो इस मामले में धरने का नेतृत्व कर रहे भाजपा नेताओं की वाहवाही हो रही थी। जब मामले का दूसरा पक्ष उभरकर सामने आया तो भाजपा की वरिष्ठ नेता इस पूरे प्रकरण को लेकर खुश नहीं है। विद्युत मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों ने जो गंभीर आरोप लगाए उन आरोपों ने भाजपा के पूरे धरना प्रदर्शन और हंगामे पर सवाल खड़ा कर दिया। वर्तमान में स्थिति यह है कि इस पूरे हंगामा, धरना प्रदर्शन, पुलिस रिपोर्ट के मामले में सारी बातें खुलकर सामने आ जाने के बाद कोई भी वरिष्ठ नेता इस मामले में बोलने से बच रहा है और बगलें झांक रहे है। कुछ लोग तो प्रदर्शन में ऐसे भी पहुंच गए थे जैसे सामान्य रूप से आए हों उन्हें न मामले की जड़ पता थी ना सर पता था। शायद उनका उद्देश्य केवल पुलिस प्रशासन पर अपना रौब स्थापित करना था।

तो विधुत कर्मी करेंगे जेल भरो आंदोलन

बिजली कर्मियों ने पैदल मार्च निकाला और कलेक्टर दीपक सक्सेना को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। जिसमें विद्युत कर्मियों के खिलाफ दर्ज मामले को निरस्त करने की माँग की गई है। बिजली कर्मियों ने साफ कहा कि यदि दर्ज मामले वापस नहीं लिए गए तो आज 22 जून को जेल भरो आंदोलन के साथ कार्य का बहिष्कार भी करेंगे। प्रदर्शन करने वालों में संजय अरोरा, कार्यपालन अभियंता नगर संभाग पश्चिम एसके सिन्हा, कार्यपालन अभियंता अभिषेक विश्वकर्मा सहित अन्य बिजली कर्मचारी अधिकारी उपस्थित रहे।

Author: Jai Lok







