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चरणों का रज हो गया, भावनाओं का ध्वज हो गया कृष्ण राधा हुए एक यों, प्रेम का नाम ब्रज हो गया : कवियों ने श्रोताओं का खूब किया मनोरंजन

महापौर अन्नू की पहल पर आयोजित हुआ कवि सम्मेलन

जबलपुर (जय लोक) महापौर जगत बहादुर सिंह की पहल पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन संस्कारधानी के मानस भवन प्रेक्षागृह में आयोजित हुआ। जिसमें आगरा, इटावा, मैनपुरी, ललितपुर, शाजापुर, मांडवा, एवं जबलपुर के कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं का खूब किया मनोरंजन, आनंदित हुए लोग, कवियों की एक-एक पंक्ति पर श्रोताओं ने कवियों का तालियों की गडग़ड़ाहट से किया सम्मान। कवि सम्मेलन का शुभारंभ सांसद जबलपुर आशीष दुबे की अध्यक्षता में महापौर जगत बहादुर सिंह ‘‘अन्नू’’, निगमाध्यक्ष रिकुंज विज, विधायक पाटन विधानसभा क्षेत्र अजय विश्नोई, विधायक केन्ट विधानसभा क्षेत्र अशोक ईश्वरदास रोहाणी, विधायक पनागर विधानसभा क्षेत्र सुशील तिवारी इन्दू, विधायक बरगी विधानसभा क्षेत्र नीरज सिंह लोधी, विधायक उत्तर विधानसभा क्षेत्र डॉं. अभिलाष पाण्डेय, विधायक सिहोरा विधानसभा क्षेत्र संतोष बरकड़े, समस्त एम.आई.सी. सदस्य एवं समस्त पार्षदगण आदि ने मां सरस्वती प्रतिमा पर दीप प्रज्जवलन के साथ किया।
नवरंग कत्थक कला केंद्र के कलाकार मोती शिवहरे ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इस दौरान सदस्य मेयर इन काउंसिल डॉं. सुभाष तिवारी, दामोदर सोनी, विवेकराम सोनकर, अंशुल राघवेन्द्र यादव, श्रीमती कैलाश साहू, समस्त पार्षदगण, संभागयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, उप-महानिरीक्षक, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, निगमायुक्त, एवं अन्य गणमान्यजन, तथा भारी संख्या में श्रोतागण आदि मौजूद रहे।
आगरा से आईं कोकिल कंठी कवयित्री डॉक्टर रुचि चतुर्वेदी ने बेहतरीन तरन्नुम के साथ कविता में प्रेम और ब्रज को परिभाषित किया। उन्होंने कहा पुण्य चरणों की रज हो गया। भावनाओं का ध्वज हो गया। कृष्ण राधा हुए एक यों, प्रेम का नाम ब्रज हो गया।, इटावा से आए अग्निधर्मा कवि राम भदावर ने कविता में तार्किक समावेश करते हुए देर तक श्रोताओं को बांधे रखा। उन्होंने कहा जिनकी धडक़न में कुलाँचे देश मारेगा नहीं, वह कभी खुदको किसी रण में उतारेगा नहीं। मैनपुरी से आए गीतकार सतीश मधुप ने तिरंगे का मान बढ़ाते हुए श्रोताओं का मन मोह लिया उन्होंने कहा केसरिया पावक सा पावन, अग्नि नहीं फूंकने देना। हरा रंग हरियाली वाला, चक्र नहीं रुकने देना। मां की चादर श्वेत वर्ण की, इस पर दाग न लग जाए, मंदिर मस्जिद के झगड़े में, झंडा मत झुकने देना। ललितपुर से पधारे इंद्रधनुषी रचनाकार पंकज अंगार ने विभिन्न रसों में काव्य पाठ करते हुए भारतीय नारी के त्याग पर कविता पढक़र वाह वाही लूटी उन्होंने कहा बहिन राखी के धागों के सभी दस्तूर दे आई। कि इक मां अपनी आंखों का चमकता नूर दे आई। जरा सी कम नजर आई वतन के भाल पर लाली। सुहागिन झट से अपनी मांग का सिंदूर दे आई। शाजापुर के दिनेश देशी घी अपनी रचनाओं से श्रोताओं को हंसा-हंसा कर लोटपोट कर दिया। मांडव से पधारे गीतकार पंकज प्रसून ने राष्ट्र भक्ति से भाव विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि वतन पे मरने की औकात नहीं चाह मगर। तिरंगा ओढ़ूँ तन से जाये जब ये जान मेरी। एवं पारिवारिक और सामाजिक मसलों पर करारी चोट करने वाले जबलपुर की शान सूरज राय सूरज ने भाइयों के बीच भ्रम की स्थिति से पर्दा उठाया तो लोग वाह वाह करने लगे।

Jai Lok
Author: Jai Lok

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