
जबलपुर (जय लोक)। छिंदवाड़ा से लाए गए चूजों की देखरेख में लापरवाही के कारण मौत हो गई। प्रदेश सरकार की मुर्गी पालन योजना के तहत जबलपुर ेजिले में वितरित करने के लिए लाया गया था। जाने वोल कडक़नाथ और देशी नस्ल के चूजों की मौत के मामले में जाँच की जा रही है। इन चूजों को ग्रामीण क्षेत्रों में वितरित किया जाना था। लेकिन अब इन चूजों को लेने के लिए ग्रामीणों ने आनाकानी शुरू कर दी है।

बताया जा रहा है कि छिंदवाड़ा से करीब 28 सौ चूजों को ग्रामीण क्षेत्रों में वितरित किया जाना था। लेकिन इस मामले में बड़ी लापरवाही ये सामने आई कि चूजों की मौत के बाद भी पशु पालन विभाग ने इन्हें ग्रामीणों को वितरित करने के आदेश दे दिए। जब इन मृत चूजों को बरेला और चरगवां में वितरित किया जा रहा था तो ग्रामीणों ने इन्हें लेने से इंकार कर दिया। जिससे विवाद की स्थिति बन गई। बताया जा रहा है कि देशी नस्ल की 130 यूनिट चूजे भेजे गए थे। जिसमें प्रत्येक यूनिट में 45 चूजे थे। इनमें से 38 यूनिट के सभी चूजों की मौत हो गई। जबकि केवल 92 यूनिट ही सुरक्षित बच पाए। इसी प्रकार कडक़नाथ नस्ल की 78 यूनिट में 29 यूनिट के सभी चूजों की मौत हो गई। इनमें केवल 49 चूजे ही वितरित किए जा सके। इस लापरवाही से शासन को लाखों रूपये का नुकसान हुआ। कहा जा रहा है कि कडक़नाथ नस्ल के मुर्गे का माँस पौष्टिक और महंगा होता है जिसे शासन द्वारा हितग्राहियों को निश्ुाल्क दिया जाता है। वहीं चूजों के साथ दिए जाने वाले दाने में भी अनियमितता पाई गई है। 58 किलोग्राम प्रति बोरी के स्थान पर कई बोरियों में केवल 30 से 32 किलोग्राम दाना ही पाया गया था। अब यह लापरवाही किसने की इस मामले की जाँच की जा रही है।

वहीं पशुपालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गर्मी और सप्लायर द्वारा देरी से ही चूजों की मौत हुई है।
हितग्राहियों के यहां मृत चूजों को छिंदवाड़ा फार्म को वापस कर दिया गया है। उसके बदले में हितग्राहियों को दूसरे चूजें उपलब्ध कराए जाएंगे।

इनका कहना है
परिवहन में देरी और गर्मी के कारण चूजों की मौत हुई है। जो चूजें मृत हुए हैं उन्हें पोल्ट्री फार्म को वापस कर दिया गया है अब उनकी जगह दूसरे चूजे लिए जाएंगे।
डॉ. प्रफुल्ल मून, डिप्टी डायरेक्टर पशुपालन विभाग
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Author: Jai Lok






