
जाँच में शिकायत की हुई पुष्टि, दर्ज हुई एफआईआर
जबलपुर (जय लोक)। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था और पुलिस प्रशासन से जुड़े मामलों में लापरवाही, दबाव या पद का दुरुपयोग बर्दास्त नहीं किया जाएगा उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को निष्पक्ष जाँच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाही करने को कहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कटनी के चर्चित जमीन घोटाले में नगर पुलिस अधीक्षक नेहा पच्चीसिया को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर कटनी स्थित सीएसपी कार्यालय के दस्तावेज सुरक्षित कर लिए गए हैं तथा सीएसपी कार्यालय को सीज कर दिया गया है ताकि रिकार्ड और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जा सके और जाँच प्रभावित ना हो। निलंबन आदेश के साथ ही गृह विभाग ने विभागीय और एसआईटी जाँच की प्रक्रिया भी तेज कर दी है।
कटनी जिले की नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) नेहा पच्चीसिया पर कटनी के कुठला थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। जमीन के 1.07 करोड़ रुपये के सौदे में कथित गड़बड़ी के आरोपों के बाद कुठला थाना पुलिस ने सीएसपी नेहा पच्चीसिया समेत तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस अब बैंक ट्रांजेक्शन, रजिस्ट्री, नामांतरण और जमीन के भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच करेगी। खास बात यह है कि इससे पहले भी नेहा पच्चीसिया वसूली और हत्या के मामले में चालान में देरी के आरोपों को लेकर जांच के दायरे में आज चुकी हैं।
कटनी के कुठला थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 61, 198, 199, 308(7) और 318(4) के तहत नगर पुलिस अधीक्षक नेहा पच्चीसिया के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता आकाश उर्फ रमेश लोधी का आरोप है कि उनके पिता रमेश लोधी पर दबाव बनाकर ग्राम कन्हवारा की जमीन की रजिस्ट्री 15 अप्रैल 2026 को मारूफ अहमद हनफी के नाम करा दी गई। वहीं शिकायत के मुताबिक जमीन का सौदा 1.07 करोड़ रुपये में तय हुआ था, लेकिन रजिस्ट्री 18.20 लाख रुपये में कराई गई। आरोप है कि 15 लाख रुपये का चेक और 3.20 लाख रुपये नकद दिए गए, जबकि बाकी की राशि का भुगतान नहीं किया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि रमेश लोधी के जेल में रहने के दौरान खरीदार के पक्ष में जमीन का नामांतरण भी करा दिया गया।

बैंक खाते की जाँच से खुला राज
जाँच अधिकारी एएसपी अनु बेनिवाल ने जब जमीन खरीदी में पैसों के लेनदेन की जाँच की तो आरोप सही पाए गए। इसके साथ ही इसमें दो अन्य लोगों की भी मिलीभगत पाई गई। बैंक खातों की जाँच के बाद यह साबित हो गया कि सीएसपी नेहा पच्चीसिया ने हत्या के आरोपी की जमानत के बदले जमीन का सौदा किया था। जिसमें नेहा पच्चीसिया ने एक करोड़ 7 लाख रूपये में जमीन खरीदने का सौदा किया लेकिन इसके बदले महज 18 लाख रूपये ही दिए गए। इसके साथ ही अन्य जाँचों से इस बात की पुष्टि हो गई। जिसके बाद एएसपी अनु बेनिवाल ने अपनी रिपोर्ट आईजी को सौंप दी। इन रिपोर्टों के आधार पर सीएसपी नेहा पच्चीसिया के खिलाऊ कुठला थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।

एएसपी अनु बेनीवाल ने की शिकायतों की जाँच
मामले की जांच का जिम्मा जबलपुर रेंज के आईजी प्रमोद कुमार वर्मा की ओर से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनु बेनीवाल को सौंपा गया था। जांच अधिकारी ने सीएसपी नेहा पच्चीसिया समेत संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए और अपनी रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी। इसी रिपोर्ट के आधार पर अब आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है।


हाईकोर्ट भी पहुँचा था मामला
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान नेहा पच्चीसिया ने थानों का प्रभार वापस लिए जाने और अपने सरकारी ड्राइवर के निलंबन को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था। एकलपीठ ने सुनवाई के बाद इसे पुलिस विभाग के आंतरिक प्रशासन और कार्य-विभाजन से जुड़ा विषय माना और हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी थी।
हाइवा छोडऩे के बदले 30 हजार लेने की शिकायत
महिला सीएसपी के खिलाफ एक ट्रांसपोर्टर की ओर से भी शिकायत की गई थी। इसमें आरोप लगाया गया कि हाइवा वाहन छोडऩे के एवज में 30 हजार की रिश्वत मांगी गई थी। इन शिकायतों के सामने आने के बाद पुलिस विभाग ने विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की थी। पहले सीएसपी से दो और बाद में तीन थानों का प्रभार वापस लिया गया था। उनके सरकारी ड्राइवर केशव सिंह को भी निलंबित किया गया था।
Author: Jai Lok






