
जबलपुर (जय लोक)। दमोह नाका के पास कंजर बस्ती में रहने वाली एक महिला ललिता चौधरी जिसकी उम्र 28 से 30 वर्ष होगी। विक्षिप्त हालत में विगत कुछ दिनों से क्षेत्र में घूमती हुई नजर आ रही थी। हमारे प्रतिनिधि ने जब इस महिला की दुर्दशा को देखा और पाया कि इसके साथ न्याय नहीं हो रहा, इसका साथ नहीं दे रहे और प्रशासन की तरफ से भी इसको ध्यान नहीं दिया जा रहा था।

जय लोक ने इस विषय को प्रमुखता से उठाया प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में यह मामला आया। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया।
कल शनिवार को महिला बाल विकास विभाग के सदस्य महिला प्रधान आरक्षक पिंकी रजक, कोतवाली थाने का स्टाफ खबर के संज्ञान के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर महिला को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से मिलने पहुंचा। महिला और उसके परिजनों से चर्चा करने के बाद उक्त महिला को इंदिरा मार्केट के पास स्थिति सुधार गृह ले जाया गया। कुछ घंटे सुधार गृह में रहने के बाद महिला का परीक्षण किया गया। महिला का कोई भी परिजन उसके इलाज और भर्ती हेतु आगे नहीं आया। महिला से वहां भोजन किया और अपनी आप बीती सुनाई। सुधार ग्रह की व्यवस्था का निर्देशन कर रहे श्री अंशुमान शुक्ला ने बताया कि महिला से पूछताछ के संबंध में मानसिक रूप से विक्षिप्त नहीं पाई गई।

उसे हर बात की जानकारी है। महिला ने काफी देर तक चर्चा के दौरान बताया कि उसे उसकी कुछ परिजनों द्वारा गलत दवाइयां देकर मानसिक संतुलन बिगडऩे का प्रयास किया गया। महिला के पिता सरकारी मुलाजिम थे जिसकी पेंशन भी उन्हें मिलती है, लेकिन पैसा पूरे परिजन निकाल कर खा जाते हैं। ललिता को दर दर भटने मजबूर होना पड़ता है। अब उसके पैतृक घर को उसके रिश्तेदारों की नजर है। महिला ने चर्चा में सुधार गृह के अंशुमान शुक्ला को उक्त बातों की जानकरी दी । उसके माँ बाप नहीं है और उसकी जीजा एवं अन्य लोग उसको मानसिक बीमार बनाकर उसके स्वयं के मकान को हड़पना चाहते हैं।

पूरी बातें प्रशासन के संज्ञान में आ चुकी है। महिला की बात का सत्यापन करने के लिए सुधार ग्रह के वरिष्ठजन महिला को लेकर उसके घर पहुंचे वहां पर भी उसे चर्चा की महिला अपने घर पर ही सामान्य रूप से रहती है। इधर उधर घूम कर खाना मांगती है क्योंकि उसके परिवार में कोई नहीं है। महिला की बताई बातों पर मोहल्ले के कई लोगों ने भी सहमति व्यक्ति की। महिला ललिता चौधरी से संबंधित सारी जानकारियां प्रशासन के संज्ञान में है। जल्दी उसके परिजनों को बुलाकर भी समझा इश्क दी जाएगी।
ललिता को मदद की दरकार, माता-पिता की मौत के बाद रिश्तेदारों ने भी छोड़ा साथ
Author: Jai Lok







