
जबलपुर (जयलोक)
बारिश ने जहाँ शहर में जल निकासी की पोल खोल दी तो वहीं निर्माण कार्य में हुए भ्रष्टाचार की पोल भी खोल दी। ताजा मामला पनागर के ग्राम पटरी का है। जहां तालाब के पानी को रोकने के लिए बनाई गई दीवार पानी में ही बह गई। दीवार टूटने के बाद जिसने भी दीवार का नजारा देखा वह ठेकेदार और अधिकारियों को कोसता नजर आ रहा है। ग्रमीणों का कहना है कि दीवार में सिर्फ मिट्टी और सीमेंट का ही उपयोग किया गया है। जबकि दीवार को मजबूती देने के लिए लोहे के सरिया का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन दीवार निर्माण कार्य में बंदरबांट के कारण लोहे की सरिया नदारत है। जिसके कारण दीवार भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। ग्रामीणों ने बताया कि इस तालाब की दीवार का निर्माण अमृत सरोवर योजना के तहत किया गया था। करीब तीस लाख की लागत से बनाई गई इस निर्माण में बड़े-बड़े दावे किए गए थे। लेकिन दावों की पोल उस वक्त खुल गई जब दीवार पानी का बहाव नहीं झेल पाई और कुछ महिनों में ही गिर गई। इस बात की जानकारी जब अधिकारियों तक पहुँची तो उन्होंने भी दीवार निर्माण की जाँच के आदेश दिए हैं।
तीस लाख का बंदरबांट
इस मामले में सीईओ जनपद पंचायत पनागर सैयद अजहर अली ने बताया कि कल रात यह जानकारी सामने आई है कि तालाब की दीवार टूटी है। जिसकी जाँच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि करीब तीस लाख रूपये की लागत से इस तालाब की दीवार का निर्माण किया गया था। दीवार का निर्माण होने के बाद संबंधित अधिकारियों ने इसका निरीक्षण किया है कि नहीं इसकी भी जांच की जाएगी। जिसके बाद दोषी अधिकारियों पर कार्रवाही की जाएगी।
निरीक्षण के बाद ही होता है पेमेंट
खास बात यह है कि निर्माण कार्य के बाद संबंधित अधिकारी द्वारा उसका निरीक्षण किया जाता है। सबकुछ ठीक होने पर ही ठेकेदार को पेमेंट के लिए स्वीकृति की जाती है। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित अधिकारी भी ठेकेदार के साथ मिले हुए हैं। जिसके कारण यह दीवार भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई।
इनका कहना है
दीवार निर्माण में हुई गड़बड़ी की जाँच की जा रही है। इसमें जो भी दोषी होंगे कार्रवाही की जाएगी।
जयति सिंह, सीईओ जिला पंचायत

Author: Jai Lok







