
जबलपुर (जयलोक)। नगर निगम कर्मचारी की हाजिरी को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। नगर निगम में 7200 कर्मचारी पंजीकृत हैं। इनका पंजीकरण स्थापना विभाग के अंतर्गत हुआ है। जिसमें नियमित और संविदा कर्मचारियों की संख्या 2504 है।

1 सितंबर 2025 से नगर निगम आयुक्त ने चेहरे की पहचान पर आधारित ई-अटेंडेंस की व्यवस्था लागू करवाई। शासन के आदेश के परिपालन में स्थिति यह निकल कर सामने आई की अब केवल 5700 लोगों की ई-अटेंडेंस नगर निगम के पंजीकृत कर्मचारियों के रूप में लग रही है। 1500 कर्मचारियों की अटेंडेंस 4 महीने से नहीं लग रही।

अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इन 1500 कर्मचारियों की करोड़ों रुपए की राशि का वेतन आखिर कहां जा रहा था। इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारी अगर नदारत थे या केवल दस्तावेजों में दर्ज थे तो यह बात जिम्मेदार अधिकारियों ने पहले क्यों नहीं पकड़ी। हर महीने नगर निगम के खजाने से करोड़ों रुपए कैसे इतनी बड़ी धोखाधड़ी के तहत निकले जा रहे थे।

अगर 4 महीने से जो 1500 कर्मचारी अटेंडेंस नहीं लगा रहे हैं उनमें से अधिकांश आउटसोर्स के कर्मचारी हैं। सूत्र के अनुसार एक से डेढ़ करोड़ रुपए का वेतन प्रतिमाह उनके नाम से निकाला जा रहा था। अब जब यह बात निकाल कर सामने आ गई है तो इस बात की गहराई से जाँच होनी चाहिए कि आखिर इतने लंबे समय से इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों के नदारत होने पर भी किसी ने ध्यान क्यों नहीं दिया और उनका वेतन कैसे निकलता रहा।
4 माह से आयुक्त ने रोका वेतन
नगर निगम में अपर आयुक्त का दायित्व संभाल रहे आईएएस अधिकारी अरविंद शाह ने जय लोक से चर्चा करते हुए बताया कि विगत 4 महीना से जिन लोगों की अटेंडेंस नहीं लग रही है उनके वेतन का भुगतान आयुक्त के निर्देश पर रोक दिया गया है।
Author: Jai Lok







