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पानी की तरह बहा पैसा फिर भी शुद्ध पेयजल नसीब नहीं

भोपाल (जयलोक)। गला तर करने से लेकर प्राण रक्षा तक का एकमात्र सर्वोत्तम साधन शुद्ध पेयजल है। लेकिन, मप्र के शहर ही नहीं गांवों में भी शुद्ध पेयजल की कोई गारंटी नहीं है। इंदौर में दूषित पानी पीने के बाद हुई 15 मौतें इस बात की गवाही दे रही हैं। लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए सरकार द्वारा पानी की तरह पैसे बहाए गए हैं, उसके बाद भी शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हो रहा है।
इंदौर में दूषित पेयजल के कारण 15 लोगों की जान चली गई। कई बीमार हैं और उनका उपचार चल रहा है। दूषित पेयजल की यह स्थिति केवल शहरी क्षेत्र में नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी है। शहरी पेयजल की जो व्यवस्था है, उससे लोगों को शुद्ध पेयजल मिलना मुश्किल है। शहर की आधी से भी अधिक आबादी सरकारी पानी से दूर हैं। जिन्हें पानी मिलता भी है उन्हें उसकी शुद्धता की गारंटी नहीं मिलती। कारण वर्षो पुरानी पाइप लाइन जर्जर व कई जगहों पर टूटी हुई हैं। टूटे पाइप में कचरा व गंदगी भी जाने से पानी पीने योग्य नहीं रह जाता।
वाटर सप्लाई मॉनिटरिंग को लेकर सीएम डॉ. मोहन सख्त
इंदौर में दूषित पानी पीने से मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। वहीं सैंकड़ों लोग अब भी अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। इस बीच पूरे प्रदेश में पानी वितरण की मॉनिटरिंग को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सख्त हो गए हैं। सीएम ने सभी नगरीय निकायों में जांच के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल प्रदाय के तहत पानी के शुद्धिकरण की जांच की जाए। लापरवाही मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अफसरों को हर महीने की सैंपल रिपोर्ट हर हाल में स्थानीय निकाय को भेजनी होगी। सीएम ने नगरीय प्रशासन विभाग को ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार करने के भी निर्देश दिए हैं।
जल स्त्रोतों की जाँच ही नहीं होती
दरअसल, पेयजल की शुद्धता को यहां कोई गारंटी नहीं है क्योंकि वर्षों तक जल स्रोतों की जांच ही नहीं होती है। 45,712 ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों को जांच के लिए प्रशिक्षण देने के साथ किट भी दिए गए लेकिन इनका उपयोग कम ही हो रहा है। जल स्रोतों की जांच नियमानुसार प्रतिमाह होनी चाहिए लेकिन ऐसा होता नहीं है। रस्म अदायगी के लिए मानसून के पहले और बाद में जांच कर ली जाती है। सैंपल लेने की जिम्मेदारी हैंडपंप मैकेनिकों के साथ आउटसोर्स एजेंसियों को दी गई है मगर ये मौके पर पहुंचते ही नहीं हैं। प्रदेश में साढ़े छह लाख हैंडपंप, हजारों कुओं और 16,115 एकल ग्राम योजना के माध्यम से जलापूर्ति हो रही है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत 27,999 एकल ग्राम योजनाएं स्वीकृत हैं। समूह नलजल योजनाएं वर्ष 2027 तक प्रारंभ हो जाएंगी। जल गुणवत्ता की जांच के लिए राज्य स्तर और प्रत्येक जिले में एक-एक के साथ उपखंडों को मिलाकर 155 प्रयोगशालाएं संचालित हैं। प्रत्येक जिले में मोबाइल वैन भी संचालित हैं, जो आउटसोर्स की गई हैं। 45,712 ग्राम समितियों को भी जांच के लिए समक्ष बनाया गया है। 800 हैंडपंप मैकेनिक हैं। आउटसोर्स के माध्यम से भी मैकेनिक काम कर रहे हैं।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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