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बड़ा सवाल क्या पाँच चरणों में बढ़ेगा मतदान: कम मतदान किसे फायदा किसे नुकसान

संदर्भ : मतदान बढ़ाने की कवायद
सच्चिदानंद शेकटकर
समूह संपादक
जयबलपुर (जय लोक)
लोकसभा के चुनाव के दो चरण पूरे हो चुके हैं और अब पाँच चरणों के चुनाव अभी बाकी हैं। तीसरे चरण के चुनाव के लिए अब कुछ ही दिन बाकी रह गए हैं। दो चरणों में मतदान का प्रतिशत घटने से सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही चिंतित नजर आए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि दो चरणों में जो कम मतदान हुआ है उसका फायदा किसे होने जा रहा है और नुकसान किसे होने जा रहा है। वैसे इस बात का अंदाजा लगाने का कोई पैमाना तो नहीं है कम मतदान से किस दल को फायदा होगा और किस दल को नुक्सान होगा। लेकिन फिर भी कम मतदान की चिंता तो सभी दलों को बराबरी से सता रही है। कम मतदान जो दो चरणों में हुआ है इसके बाद बाकी के चरणों में मतदान बढ़ाने के लिए लगातार कोशिश भी शुरू हो चुकी हैं। अब सबसे बड़ा सवाल है उठ रहा है कि क्या बाकी बचे पाँच चरणों में मतदान का प्रतिशत बढ़ेगा या पहले दो चरणों की तरह ही आसपास मतदान का प्रतिशत रहेगा। कम मतदान को लेकर तरह-तरह के आकंलन किये जा रहे हैं और कारण भी गिनाये जा रहे हैं। एक कारण सबसे बड़ा यह माना जा रहा है इतनी गर्मी की वजह से कम मतदान हुआ है लेकिन जब 2014 और 2019 के लोकसभा के चुनाव हुए तब भी वह ऐसे ही भीषण गर्मी में हुए थे। गर्मी के कारण मतदान कम होने की बात को ज्यादा इसलिए तवज्जो नहीं मिल रही है क्योंकि गर्मी में ना लोगों का कहीं आना जाना बंद होता है और ना कारोबार बंद हो जाते हैं सब कुछ यथावत चलता रहता है तब फिर मतदान गर्मी के मौसम में लोग क्यों नहीं कर सकते।
भाजपा का अतिआत्मविश्वास भी मतदान कम होने की वजह
मतदान कम होने का दूसरा कारण इस बार के चुनाव में भाजपा के कार्यकर्ताओं का अतिआत्मविश्वासी हो जाना बताया जा रहा है। भाजपा एक केडर बेस पार्टी है। भाजपा का निचले स्तर तक संगठन है और यह संगठन चुनावी दृष्टि से ही बनाया गया है। लेकिन कम मतदान ने भाजपा की संगठन क्षमता पर भी प्रश्न चिन्ह लगा दिए हैं।
किसी काम नहीं आए भाजपा के पंच परमेश्वर
भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव को लेकर पंच परमेश्वर बनाए हुए हैं । इन पंच परमेश्वरों में एक बूथ अध्यक्ष होता है और एक बूथ का महामंत्री भी होता है। वही बी एल ए 2 और एक हितग्राही प्रभारी तथा एक सोशल मीडिया प्रभारी भी बनाया गया है? लेकिन इन पाँच परमेश्वरों की चुनाव में जो भूमिका होना चाहिए थी वह नजर नहीं आई है?
चुनाव का मोदीमय हो जाना
कम मतदान को लेकर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जो कम उत्साह दिखाया है उसकी एक वजह यह भी बताई जा रही है कि इस बार का चुनाव पूरी तरह से मोदीमय  हो गया है? कार्यकर्ताओं को अति आत्मविश्वास हो गया है कि मोदी के नाम से तो पूरे भारतवर्ष में भारतीय जनता पार्टी तो वैसे ही चुनाव जीतने जा रही है। इसलिए कार्यकर्ताओं को जिस स्तर पर मेहनत करना थी वह चुनाव जीतने की मोदी की गारंटी की वजह से कहीं नजर नहीं आई।
ना कोई मुद्दे ना कोई लहर
लोकसभा का इस बार का चुनाव मुद्दा विहीन ही रहा है। पक्ष और विपक्ष दोनों की ओर से ऐसे कोई मुद्दे सामने नहीं आये जिससे की मतदाता उत्साहित नजर आयें। इसी तरह इस बार के चुनाव में किसी तरह की लहर भी चलती नजर नहीं आ रही है। इसलिए मतदाताओं की उदासीनता पक्ष और विपक्ष दोनों को लेकर ही बनी हुई है। कोई भी यह दावा नहीं कर सकता है कि मतदान किसके पक्ष में हुआ है।
विपक्ष को साँस लेने  का मौका मिला
दो चरणों के लिए जो मतदान हुआ उसमें मतदान का प्रतिशत कम होने से विपक्षी दल उत्साहित नजर आ रहे हैं। हताश और निराश विपक्षी दलों को सांस लेने का मौका मिल गया है। विपक्षी नेताओं का यह मानना है कि यह कम मतदान भाजपा के लिए नुकसानदायक और विपक्ष के लिए फायदेमंद है। राहुल गांधी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव जैसे नेता तो विपक्षी दलों की सरकार बनने और भाजपा के डिप्रेशन में जाने के दावे करने लगे हैं।
चुनाव आयोग का उबाऊ कार्यक्रम
इस बार के चुनाव को लेकर चुनाव आयोग को भी इस बात के लिए निशाने पर लिया जा रहा है कि चुनाव आयोग ने इस बार का जो चुनाव का कार्यक्रम बनाया है वह बेहद उबाऊ नजर आ रहा है। 2014 में जब लोकसभा के चुनाव हुए तब 12 मई को मतदान पूरा हो गया था। वहीं 2019 में जब चुनाव हुए तब 19 मई को मतदान हो गया था। लेकिन इस बार 1 जून तक मतदान चलने वाला है और चुनाव सात चरणों में होने जा रहे हैं। इतने लंबे चुनाव कार्यक्रम से भी मतदाता उदासीन नजर आ रहे हैं।
मतदान बढ़ाने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ट्रैक्टर पर हुए सवार
लोकसभा के दो चरणों में कम हुए मतदान को लेकर चुनाव आयोग खुद भी चिंतित है और 7 मई को होने वाले तीसरे चरण के मतदान में वोटिंग  प्रतिशत बढ़ाने के लिए चुनाव आयोग ने चलें बूथ की ओर अभियान शुरू किया है। मध्य प्रदेश में तीसरे चरण में 9 सीटों पर होने जा रहे मतदान के लिए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन ने खुद ट्रैक्टर पर सवार होकर रैली के माध्यम से जागरूकता का संदेश दिया।
प्रधानमंत्री ने भी की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पिछले दो चरणों के मतदान को लेकर जो कमी आई है उसके लिए चिंतित नजर आ रहे हैं। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी जनसभाओं में मतदाताओं से खुद ही अपील कर रहे हैं कि वह मतदान के दिन सुबह जल्दी जाकर मतदान कर आयें ताकि वह धूप से बच सकें। अब यह देखना है कि मतदान बढ़ाने की इन सारी कोशिशें का क्या नतीजा सामने आता है।

Jai Lok
Author: Jai Lok

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