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बार-बार मकान बदलने वाले पुराना बूथ याद रखें

परदेश से आए लोगों को पहले से तैयारी करना होगी, मदद के लिए भटकते मतदाता

जबलपुर (जयलोक)। मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण में सिर्फ  विवाहित महिलओं को ही माथापच्ची नहीं करनी है बल्कि बार-बार किराए का मकान या नया मकान खरीदने कर कालोनी शहर या राज्य बदलने वालों को जागरूक रहने की जरूरत है। उनको 2003 के विधानसभा क्षेत्र के वार्ड व बूथ याद करना होंगे।

रिश्तेदार की भी वोटर आईडी लगेगी
एसआईआर के तहत बीएलओ या आंगबड़ी कार्यकर्ता घर घर पहुंच रहे हैं। अधिकतर कार्यकर्ता कागजी कार्रवाई कर रहे हैं। अधिकतर घरों में 2-3 बार जाना पड़ रहा है। एक बार जाकर पूरी प्रक्रिया बताई जा रही है तो दूसरी बार पुरानी वोटर लिस्ट में नाम होने पर किसी भी रिश्तेदार की वोटर आईडी मांगी जा रही है।

किराएदार को नहीं मिल रहे नाम
एक परिवार वर्ष 2000 तक जबलपुर की पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के आमनपुर में रहता था। उसके बाद राइट टाउन, स्नेह नगर, टेलीग्राफ  फैक्ट्री के गेट नंबर चार और यादव कालोनी में किराए के मकान में रहा। पिछले 25 साल में उस परिवार का नाम मतदाता सूची में भी स्थान बदलता रहा। अब उनको वोटर लिस्ट में नाम खोजने के लिए लम्बी प्रक्रिया करना पड़ रही है।

मकान मालिक को आसानी
मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण में उन मतादाताओं को परेशानी नहीं होगी जिनका अपना स्वयं का मकान है या वे किराएदार जिन्होंने 2003 से मकान नहीं बदले हैं। जो रहवासी किराए के मकान में रहते हुए 3-4 मकान या क्षेत्र बदल चुके हैं। उनको कठिनाई का सामना करना पड़ेगा। जिनका कभी वार्ड बदला तो कभी विधानसभा क्षेत्र, उनको मतदाता सूची में नाम खोजना पड़ेगा।

दूसरे राज्य से आए लोगों की जाँच होगी, देना होगी जानकारी
आईएसआर के बाद वाली मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए 2003 की मतदाता सूची में नाम के साथ नाम कटवाना जरूरी है। यदि नाम कट गया है तो प्रमाण देना होगा। ऐसे लोगों को जबलपुर में रहने का कारण के साथ नौकरी या व्यापार का भी दस्तावेज देना होगा। यदि मकान खरीदा है तो रजिस्ट्री की फोटो कॉपी तैयार रखें। किराएदार हैं तो रेंट एग्रीमेंट या अन्य प्रमाण देने पर ही मतदाता सूची में नाम जुड़ेगा।

पीडीएफ  फाइल ऐसे करें डाऊनलोड
निर्वाचन आयोग ने 2003 की मतदाता सूची पीडीएफ  फार्मेट में ऑनलाइन दी। जो व्हीओटीईआरएस. ईसीआई. जीओव्ही. आईएन पर जाकर मध्य प्रदेश की सूची जिला और विधानसभा अनुसार है। विधानसभा में जाने पर वार्ड के अनुसार ही वोटर लिस्ट है। जिसे 10-10 बूथ नंबर से चयन कर डाऊनलोड किया जा सकता है। एसआईआर के दौरान 2024 की मतदाता सूची में नाम होना तभी प्रमाणित माना जाएगा जब 2003 की सूची में मतदाता का नाम हो और इसने एसआईआर का फार्म भरा हो। अन्यथा अपील का विकल्प रहेगा।

राजनीतिक कार्यकत्र्ता स मिलेगा पुराना बूथ
घर घर पहुंच रहे कार्यकत्र्ता को 2003 के निर्वाचन क्षेत्र की सीमाओं की जानकारी नहीं है। इस पूरी प्रकिया में अभी राजनीतिक दल अभी बहुत रूचि लेते नहीं दिख रहे हैं। बूथ लेवल के कार्यकत्र्ता बनाने की प्रकिया ही चल रही है। कुछ खास क्षेत्रों के पार्षद जरूर मतदाता तक पहुंच रहे लेकिन जिस तरह से बिहार का एसआईआर चर्चा में था अभी जबलपुर में वह माहौल देखने नहीं मिल रहा है। 2003 की सूची देखते समय विधानसभा, वार्ड व बूथ की पहचान आवश्यक है। नए बने वार्ड या परिसीमन में विधानसभा क्षेत्र बदलने से मतदाता को नाम खोजना आसान नहीं है। उसे राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता या पार्षद से ही संपर्क करने पर पुराने वार्ड का नाम व बूथ संख्या मिलेगी। जब तक राजनीतिक दलों के कार्यकत्र्ता सक्रिय नहीं होंगे तब तक यह शासकीय प्रक्रिया ही बनी रहेगी।

1950 बंद है
निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं की सहायता के लिए टोल फ्री नंबर दिया है। वह बंद है। उसको डायल करने पर सूचना मिलती है कि 1950 अस्थाई तौर पर बंद किया गया है। अत: अब बीएलओ या रसजनीतिक दल के कार्यकत्र्ता ही मतदाता की सहायता कर सकेंगे।

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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