
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों ने कांग्रेस को करारा झटका दिया है, जहां पार्टी महागठबंधन के हिस्से के बावजूद मात्र 6 सीटें ही हासिल कर सकी। इस हार के बाद पार्टी में शुरू हुआ असंतोष अब खुले टकराव का रूप ले चुका है। प्रदेश अनुशासन समिति द्वारा सात वरिष्ठ नेताओं को छह वर्ष के लिए प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित करने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। ये नेता पार्टी-विरोधी गतिविधियों, भ्रामक बयानबाजी और संगठनात्मक फैसलों की अवहेलना के आरोप में दोषी ठहराए गए। निष्कासन के तुरंत बाद बागी गुट ने दिल्ली का रुख किया, जहां वे राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खडग़े से मिलकर प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की तैयारी में हैं। जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम कांग्रेस के लिए एक बड़े संगठनात्मक तूफान का संकेत हो सकता है, जो पार्टी की एकता को और चुनौती देगा।
प्रदेश कांग्रेस अनुशासन समिति ने सोमवार को जारी आदेश में स्पष्ट किया कि इन नेताओं ने लगातार पार्टी मंच के बाहर बयान देकर टिकट वितरण पर भ्रामक आरोप लगाए, प्रिंट और सोशल मीडिया पर कांग्रेस की छवि को धूमिल किया।
समिति के अनुसार, इनकी स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं था और उन्होंने राज्य कांग्रेस समिति, पर्यवेक्षकों, चुनाव पैनल तथा एआईसीसी के निर्देशों की जानबूझकर अवहेलना की। निष्कासित नेताओं में आदित्य पासवान (पूर्व उपाध्यक्ष, कांग्रेस सेवा दल), शकीलुर रहमान (पूर्व उपाध्यक्ष, राज्य कांग्रेस), राजकुमार शर्मा (पूर्व अध्यक्ष, किसान कांग्रेस), राजकुमार राजन (पूर्व अध्यक्ष, राज्य युवा कांग्रेस), कुंदन गुप्ता (पूर्व अध्यक्ष, अत्यंत पिछड़ा वर्ग विभाग), कंचना कुमारी (बांका जिला कांग्रेस अध्यक्ष) और रवि गोल्डन (नालंदा जिला कांग्रेस नेता) शामिल हैं।
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Author: Jai Lok







