
नरसिंहपुर (जयलोक)। द्वारका शारदापीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद जी सरस्वती ने कहा कि धन धन भोलेनाथ तेरे कौड़ी नहीं खजाने में ।भगवान् शिव तीन बार शिव-शिव-शिव बोलने से सब कुछ दे देते हैं । महाराजश्री जी -महादेव, महादेव महादेवेति यो वदेत् । इस तरह 3 बार भगवान का नाम उच्चारण करने से भगवान् सदा के लिए उसके ऋणी हो जाते हैं ।संसार में ऐंसा कोई पाप नहीं है जो शिव का नाम लेने से से नष्ट न हो जाये इतने पाप कोई कर नहीं सकता जितने महादेव नष्ट कर सकते हैं इसका मतलब यह नहीं है कि पाप करके नाम लें यह अर्थवाद है ।महाजनो येन गत: स पन्था:।। जो गुरु बताये वही करना चाहिये गुरू की आज्ञा लेकर जो साधना करेंगे तो उसका फल मिलेगा ।महादेव के सम्बन्ध में यही बात है । नवधा भक्ति आपने अभी सुनी इनके नौ प्रकार होते हैं ये हैं: श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य और आत्मनिवेदन । इन नौ में से एक भी आ जाए तो कल्याण हो जाता है ।मतंग ऋषि जी गुरु की आज्ञा से सबरी ने भगवान् की प्रतीक्षा की गुरु ने कहा भगवान् आयेंगे । लो भगवान् आये और सबरी का कल्याण हुआ निष्ठा ही फल प्रदान करती है ।गुरु की शक्ति और चेला की भक्ति ।ऋषि विश्वामित्र जी के साथ राम-लक्ष्मण दुसरे दिन उठकर संध्या वंदन करके गुरु से पूछा हम कैंसे राक्षसों से आपके यज्ञ की रक्षा करें । शिष्यों ने कहा गुरूजी संकल्प ले चुके हैं अब वह मौन रहेंगे और शिष्यों ने सारी बात दोनों भाइयों से कहा 6 दिन तक आपको रात में रक्षा करनी है । 6 दिन बीत गये 6वे दिन राम ने लक्ष्मण से कहा पूर्णता में विघ्न आ सकता है वही हुआ कुंड से ज्वाला में भडक़ी खून की धारा बहने लगी, मांस के लोथड़े गिरने लगे, लक्ष्मण से कहा तुम यहाँ देखो मैं राक्षस को मारूंगा । भगवान् ने मानवास्त्र का प्रयोग कर मारीच को मारा वह सौ योजन समुद्र पार गिरा, सुबाहु को आग्नेपास्त्र का प्रयोग कर उसका वध किया ।गुरूजी का यज्ञ संकल्प पूर्ण हुआ रात्रि विश्राम किया । श्रीराम के प्राप्त होते ही सारी अतुलता प्राप्त हो गई शिव जी कहते हैं उमा ! भगवान् जब जिससे जहां जैंसा चाहते हैं करवा लेते हैं ।
‘तुलसी’ जस भवितव्यता, तैसी मिलै सहाय ।
आपु न आवै ताहि पै, ताहि तहाँ लै जाय ।।
ईश्वर कृपा, आत्म कृपा और गुरु कृपा इन तीनों की कृपा चाहिये ।
एक सेठ जी थे उनके यहाँ पर एक महात्मा आये वह ज्योतिषी भे थे माहात्मा ने कहा कुच्छ समय बाद सारी प्रजा और तुम्हारी भी संपत्ति नष्ट होगी सेठ ने नया घर बनाया पाये में लकड़ी के खम्बों में रत्नाभूषण, सोना, चांदी भर दिया कहा मेरी संपत्ति नष्ट नहीं होगी ।किनारे नदी थी बाढ़ आयी सब कुछ बह गया सेठ का मकान भी बह गया दोनों पति पत्नी निर्धन हो गये । लकड़ी नदी में बह कर कई मील दूर गयी घरोइया ने सारे मकान की लकड़ी पकड़ी । बाढ़ई से वही लकड़ी का घर गाँव पटेल ने बनवाया । सेठ सेठानी उसी गाँव में मांगते मांगते आ गये और पूंछा हमें यहाँ कहीं भोजन मिलेगा तो उसी घरोइया का घर बताया की वह गाँव में सबसे बड़ा आदमी है ।लकड़ी सेठ सेठानी पहचान गये पूंछा तो बताया नदी में लकड़ी मिली उसी से मकान बनाया पर हम अभी भी नाव चलाते हैं । सेठ ने कहा हम जानते हैं तुम गरीब नहीं हो अरबपति हो कहाँ कैंसे सेठ ने सारी बात बतायी घरोइया ने कहा हम अपनी झोपडी में जाते हैं यह घर आपका है । धर्म वाला था सेठ ने कहा हमारे भाग्य में होता तो घर क्यों बहता ।
घरोइया और उसकी पत्नी ने विचार किया इनकी गरीबी कैंसे दूर करें । बूंदी के बड़े-बड़े लड्डू बनाये अन्दर हीरे मोती भर दिये जाते समय रास्ते के नाश्ता के लिये दे दिया । दुसरे दिन सेठ से सेठानी ने कहा 4 लड्डू है इन्हें बेच कर हलवाई से आटा ले आयें खाकर सो गये ।
दुसरे दिन घरोइये के बेटे का जन्मदिन था नगरभोज कराया भोजन कम पड गया, हलवाई की सारी मिठाई खरीद ली, उसमे वह लड्डू भी आ गये वह पहचान गये जिसके भाग्य के वह लड्डू थे उसी के पास पहुँच गये । ‘तुलसी’ जस भवितव्यता…….।।
श्रावण मास के तृतीय सोमवार में पूज्य द्वारकाशारदापीठाधीश्वर महाराजश्री जी ने स्वयंभू श्री ज्योतिरीश्वर महादेव का पूजन अभिषेक किया । यह वही स्थान है जहाँ पर भगवान् शिव स्वयं प्रकट होकर अनगिनत भक्तों को फल प्रदान कर रहें हैं यहाँ की बड़ी महिमा है । आज भी ऐसे अनेक भक्त हैं जिनकी अनेक कामनायें चाहे स्वास्थ्य हो या बाहरी बाधा या पुत्रादि संतान की कामना रिद्धि सिद्धि प्राप्त की है । हम सभी लोग भी ऐंसे सिद्ध दिव्य दरबार का लाभ लें और अपने कष्टों से मुक्ति पायें ।

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Author: Jai Lok







