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भारत-चीन को प्रतिद्वंदी नहीं साझेदार बनना चाहिए: वांग यी

बीजिंग। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भारत और चीन के संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे को प्रतिद्वंदी के बजाय साझेदार और खतरे के बजाय अवसर के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि एशिया के विकास और वैश्विक संतुलन के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग और विश्वास बेहद जरूरी है।
बता दें कि पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में सैन्य गतिरोध के कारण दोनों देशों के संबंध लगभग पांच वर्षों तक तनावपूर्ण रहे। हालांकि हाल की उच्च स्तरीय बैठकों के बाद संबंधों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई है। दोनों देशों ने वीजा और उड़ान सेवाओं को फिर से शुरू करने सहित कई कदम उठाए हैं, जिससे आपसी संबंधों में धीरे-धीरे सुधार देखा जा रहा है। बीजिंग में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा तय किए गए मार्ग पर चलकर ही दोनों देशों के संबंधों को स्थिर और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है। वांग यी ने कहा कि हाल के वर्षों में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई बैठकों ने रिश्तों को सुधारने में अहम भूमिका निभाई है।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष अगस्त में तियानजिन में मोदी और शी जिनपिंग की सफल मुलाकात हुई थी। इसके साथ ही वर्ष 2024 में कजान में हुई उनकी बैठक से शुरू हुई सकारात्मक पहल को आगे बढ़ाते हुए तियानजिन शिखर सम्मेलन ने दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूती दी है। वांग ने कहा कि इन बैठकों के बाद सभी स्तरों पर संवाद फिर से सक्रिय हुआ है और द्विपक्षीय व्यापार ने नया रिकॉर्ड भी बनाया है। साथ ही लोगों के बीच संपर्क और आदान-प्रदान भी बढ़ा है, जिससे दोनों देशों की जनता को ठोस लाभ मिल रहा है।
वांग यी ने कहा कि भारत और चीन को भविष्य के संबंधों को लेकर सही रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को अच्छे पड़ोसी की तरह संबंध बनाए रखना चाहिए और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति तथा स्थिरता बनाए रखने के लिए संयुक्त रूप से काम करना चाहिए। उनके अनुसार, विकास और आर्थिक सहयोग पर ध्यान केंद्रित करना दोनों देशों के हित में है।
चीन के विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और चीन दोनों ही तथाकथित ग्लोबल साउथ का हिस्सा हैं। उन्होंने बताया कि यह शब्द उन देशों के लिए प्रयोग किया जाता है जो मुख्य रूप से एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के विकासशील या उभरते देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं। वांग ने कहा कि दोनों देशों के बीच गहरे सभ्यतागत संबंध हैं और उनके कई साझा हित हैं।
उन्होंने कहा कि आपसी विश्वास और सहयोग दोनों देशों के विकास के लिए लाभकारी है, जबकि विभाजन और टकराव एशिया के पुनरुत्थान के लिए हानिकारक हो सकते हैं। वांग ने यह भी कहा कि दोनों पक्षों को बाहरी हस्तक्षेप से दूर रहते हुए नेतृत्व द्वारा तय किए गए मार्ग का पालन करना चाहिए।
ब्रिक्स में सहयोग की उम्मीद
वांग यी ने भारत और चीन से ब्रिक्स मंच पर भी एक-दूसरे का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस वर्ष भारत शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने वाला है, जबकि चीन वर्ष 2027 में इसकी मेजबानी करेगा। इस समूह में मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे, लेकिन बाद में कई अन्य देशों को भी इसमें जोड़ा गया।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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