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मंत्रिमण्डल विस्तार की तैयारी, सत्ता और संगठन की रिपोर्ट से तय होगा मंत्रियों का भविष्य

भोपाल (जयलोक)। मध्य प्रदेश में एक बार फिर मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजनीतिक हलचल दिखाई दे रही है। संभावना जताई जा रही है कि बिहार चुनाव परिणाम आने के बाद मप्र में मंत्रिमंडल विस्तार की कवायद शुरू हो गई है। इसकी एक वजह यह भी बताई जा रही है कि मंत्रियों की कार्यशैली और परफॉरमेंस का आकलन कर रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जा रहा है। मंत्रियों की एक रिपोर्ट सत्ता और दूसरी संगठन द्वारा तैयार कराई जा रही है। बताया जा रहा है कि इस रिपोर्ट कार्ड के आधार पर ही मंत्रिमंडल का विस्तार किया जाएगा। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार 13 दिसंबर को दो साल पूरे करने जा रही है। राजनीतिक दृष्टि से यह अहम पड़ाव है। इस बीच मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। दरअसल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सभी मंत्रियों के अलावा विधायकों की अब तक की परफॉर्मेंस रिपोर्ट पर चर्चा शुरू करने जा रहे हैं। इसमें पिछले 23 माह के दौरान मंत्रियों के परफॉर्मेंस पर चर्चा की जाएगी और इसके आधार पर मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा। मुख्यमंत्री के इस कदम को आगामी मंत्रिमंडल विस्तार से जोडक़र देखा जा रहा है, क्योंकि मंत्रिमंडल में अभी 4 पद खाली हैं। मोहन कैबिनेट में वर्तमान में मंत्रियों की संख्या 30 है। सरकार बनने के बाद कैबिनेट का सिर्फ एक विस्तार हुआ है। कांग्रेस छोडक़र भाजपा में आए विधायक रामनिवास रावत को पिछले साल जुलाई में मंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी और कैबिनेट में मंत्रियों की संख्या बढकऱ 31 हो गई थी, लेकिन नवंबर, 2024 में विधानसभा उपचुनाव हारने के बाद रामनिवास रावत कैबिनेट से बाहर हो गए। मुख्यमंत्री के अलावा कैबिनेट में अधिकतम 34 मंत्री शामिल हो सकते हैं। इस तरह मंत्रिमंडल में अभी 4 मंत्रियों की कुर्सी खाली है।
दो स्तरों पर तैयार हो रही रिपोर्ट
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक मंत्रियों की कार्यशैली और परफॉरमेंस का आंकलन दो स्तरों पर किया जा रहा है। शासन और पार्टी संगठन स्तर पर मंत्रियों का अलग-अलग रिपोर्ट कार्ड तैयार हो रहा है। मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि पार्टी की ओर से बनाई जा रही रिपोर्ट में यह देखा जा रहा है कि मंत्रियों की कार्यशैली से राजनीतिक रूप से पार्टी को कितना लाभ मिला और जनता के बीच पार्टी की कैसी छवि बनी। पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मंत्रियों का व्यवहार कैसा रहा, उनके काम हुए या नहीं। इसके लिए पार्टी कार्यकर्ताओं से फीडबैक भी ले रही है। ऐसे ही शासन की ओर से तैयार की जा रही रिपोर्ट में विभागीय उपलब्धियों, योजनाओं के लक्ष्य और जनता तक योजनाओं की पहुंच को मापदंड बनाया गया है। मुख्य सचिव स्तर पर यह प्रक्रिया तेजी से चल रही है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट कार्ड के आधार पर कुछ मंत्रियों को कैबिनेट से ड्रॉप किया जा सकता है।
नॉन परफॉर्मर मंत्री होंगे बाहर
दरअसल, पिछले महीने गुजरात में सीएम भूपेंद्र पटेल को छोडक़र सभी मंत्रियों के इस्तीफे लेने और नए मंत्रिमंडल के गठन के फैसले से भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व का रुख स्पष्ट हो चुका है कि पार्टी अब मंत्रियों की परफॉरमेंस को लेकर किसी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। मप्र में भी ऐसे संकेत हैं कि नॉन परफॉर्मर कुछ मंत्रियों को कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है, जबकि संगठनात्मक रूप से सक्रिय और मजबूत पकड़ वाले कुछ विधायकों एवं पूर्व मंत्रियों को मंत्री बनने का मौका मिल सकता है। कई विधायक और पूर्व मंत्री लगातार कैबिनेट में शामिल होने का दावा पेश कर रहे है।
मुख्यमंत्री करेंगे वन टू वन चर्चा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार का लगभग 23 महीने का समय पूरा हो गया है। मुख्यमंत्री द्वारा मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों के विभागों से जुड़े कामकाज, उनमें किए गए नवाचारों, विकास योजनाओं की प्रगति और विभानसभा क्षेत्रों में जुड़े विकास के कामों का आकलन शुरू किया जा रहा है। इसके लिए मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा सभी विभागों से रिपोर्ट बुलाई जाएगी साथ ही मंत्रियों से वन टू वन चर्चा भी शुरू की जाएगी। सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट कार्ड तैयार होने के बाद नवंबर के आखिर में मुख्यमंत्री और संगठन से जुड़े वरिष्ठ नेता मंत्रियों के साथ वन-टू-वन चर्चा कर सकते हैं।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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