
कई राज्यों में 500 से अधिक स्थानों पर एनआईए के छापे
नई दिल्ली (जयलोक)। दिल्ली ब्लास्ट के बीच सुरक्षा एजेंसियों ने एक ऐसे आतंकी षड्यंत्र का पर्दाफाश किया है, जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। गुजरात एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) की कार्रवाई में गिरफ्तार किए गए तीन आतंकियों ने कबूल किया है कि वे भारत के कई प्रमुख मंदिरों में प्रसाद में जहर मिलाकर सामूहिक हत्या की योजना बना चुके थे। गिरफ्तार आतंकियों मोहिउद्दीन, सोहेल और आजाद सैफी ने पूछताछ में खुलासा किया कि उन्होंने लखनऊ के हनुमान सेतु मंदिर, अहमदाबाद के जगन्नाथ मंदिर और दिल्ली के कुछ बड़े धार्मिक स्थलों की रेकी की थी। वे प्रसाद वितरण प्रणाली के जरिए भक्तों तक जानलेवा केमिकल रिसिन पहुंचाने की तैयारी कर रहे थे। यह वही जहरीला पदार्थ है, जो मात्र एक मिलीग्राम की मात्रा में भी किसी इंसान की जान लेने में सक्षम है। तीनों आतंकी अफगानिस्तान में बैठे हैंडलर अबू खदीजा के संपर्क में थे। उनके मोबाइल फोन से रिसिन बनाने की विधि, मंदिरों की तस्वीरें, वीडियो और रेकी से जुड़ी जानकारी बरामद हुई है। एनआईए ने अल कायदा की आतंकी साजिश के मामले में कई राज्यों में 500 से अधिक जगहों पर छापेमारी की है। टीमों ने पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, मेघालय, हरियाणा और गुजरात में विभिन्न संदिग्धों और उनके सहयोगियों से जुड़े परिसरों की तलाशी ली। कई डिजिटल उपकरण और दस्तावेज जब्त किए गए हैं जिन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है।
जांच एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि विस्फोट के आरोपी डॉ. मुजम्मिल, डॉ. आदिल, उमर और शाहीन ने मिलकर लगभग 20 लाख रुपए जुटाए, जो उमर को दिए थे। बाद में उन्होंने गुरुग्राम, नूंह और आसपास के इलाकों से आईईडी तैयार करने के लिए 3 लाख रुपए का 20 क्विंटल से ज्यादा एनपीके फर्टिलाइजर खरीदा था। उमर और डॉ. मुजम्मिल के बीच पैसों का विवाद भी था।
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Author: Jai Lok







