
नई दिल्ली। लोकसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का समुचित तरीके से लाभ मिले इसके लिए केंद्र की मोदी सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। संसद के मौजूदा सत्र में महिला आरक्षण को लागू करने के लिए महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश करने की तैयारी कर रही है। इस ऐतिहासिक कदम के तहत आगामी लोकसभा और उसके बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई यानी 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की जाएंगी। सरकार की इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू लोकसभा की कुल सदस्य संख्या में भारी वृद्धि करना है।
वर्तमान में लोकसभा की 543 सीटों को बढ़ाकर 816 किए जाने का प्रस्ताव है, जिसका अर्थ है कि सदन में 273 नई सीटें जोड़ी जाएंगी। इन नई सीटों में से अधिकांश महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, जिससे मौजूदा पुरुष सांसदों की स्थिति पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह पिछले पांच दशकों में पहली बार होगा जब सीटों की संख्या में इस स्तर का इजाफा किया जाएगा। इसके साथ ही संसद में बहुमत का आंकड़ा भी बढक़र 409 हो जाएगा। महिला आरक्षण की राह में सबसे बड़ी बाधा परिसीमन और नई जनगणना को माना जा रहा था। नारी शक्ति वंदन अधिनियम में पहले इसे नई जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन से जोड़ा गया था, लेकिन अब सरकार इस प्रावधान को अलग करने पर विचार कर रही है। नई जनगणना में होने वाली देरी को देखते हुए सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर ही नया परिसीमन कराने की योजना बना रही है, ताकि 31 मार्च 2029 के बाद होने वाले चुनावों में महिला कोटा प्रभावी रूप से लागू किया सके।
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Author: Jai Lok






