
जबलपुर (जय लोक)
माफिया चाहे किसी भी क्षेत्र का हो वह सिर्फ अवसर की तलाश में रहता है। चुनाव के समय शराब माफिया का समय आया तो उन्होंने मनमाने दाम पर शराब बेचकर लूट मचाई और शासन को भी करोड़ों का चूना लगा दिया। शराब माफिया के खिलाफ खूब आवाज उठी लगातार विरोध हुआ लेकिन ना तो जनप्रतिनिधि आगे आए और ना ही प्रशासन ने कोई सख्त कदम उठाया और लगभग दो महीने तक शराब माफिया को मनमानी करने की खुली छूट दे दी गई। अब मौका आया है दुग्ध माफिया का, गर्मी का मौसम आते ही बहाना बनाकर दूध के दाम आसमान पर पहुँचाने की साजिश की जा रही है। पहले ही दुग्ध माफिया ने सिंडिकेट बनाकर 60-62 और कहीं-कहीं तो 65 रुपए लीटर तक दूध बेचने का काम किया है। यह दाम जबलपुर में ही आसमान छू रहे हैं। आसपास के अन्य जिलों और महानगरों में दूध के दामों में ऐसी आग नहीं लगी है। जबलपुर दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाता है। यहाँ से हजारों लीटर दूध रोजाना नागपुर और अन्य जिलों में बड़ी-बड़ी फैक्ट्री को सप्लाई होता है। दुग्ध माफिया शहर में कृत्रिम अभाव बनाकर एवं उत्पादन की लागत अधिक बताकर जब चाहे मनमानी का रेट बढ़ा देता है। एक बार फिर इस प्रकार की साजिशें प्रारंभ हो गई और इस पर रोक नहीं लगाई गई तो यह निश्चित है कि गरीब और मध्यमवर्गीय बच्चों के मुँह से दूध दूर हो जाएगा। जनप्रतिनिधि और प्रशासन अभी तक दुग्ध माफिया की हरकतों पर मौन है। सभी जानते हैं कि दुग्ध आवश्यक वस्तु की श्रेणी में माना जाता है। ऐसी स्थिति में जब एक बार फिर सिर्फ आम जनता को लूटने के उद्देश्य से दूध के दाम बढ़ाए जाने की साजिश प्रारंभ हुई है तो क्या जनप्रतिनिधि और प्रशासन को इस दिशा में पहल कर इस लूट को रोकने के प्रयास नहीं करना चाहिए। जिस प्रकार से दूध के दाम बढ़ाने की साजिश चल रही है, उस हिसाब से तो जल्द ही एक समय ऐसा आ जायेगा कि जबलपुर में डीजल और दूध के रेट एक समान हो जाएंगे। हर साल गर्मी में दूध के दाम बढ़ाने का सिलसिला बदस्तूर जारी हैं। इस साल सीजन में फिर दूध के दाम बढ़ाने कि साजिश शुरू हो गई है कुछ दूध विक्रेताओं ने दम बढ़ा भी दिए है। कहीं 68 रुपए तो कहीं 70 रुपए लीटर के भाव से दूध बेचा जा रहा हैं।
केमिकल वाला जहरीला दूध, अवैध डेरियाँ भी आबाद
जबलपुर प्रशासन ने कई बार दावा किया कि वो दूध में मिलावटखोरी रोकने के लिये जाँच दल बनाएगी, जाँच केन्द्र बनाएगी, प्रभावी कार्यवाही करेगी। लेकिन आज की तारीख तक दूध में मिलावट खोरी कम होने की बजाए बढ़ती चली गई। आज स्थिति यह है कि 65-70 रुपये चुकाने के बाद भी शहरवासी सिंथेटिक, पानी और कैमिकल मिला जहरीला दूध पी रहे हैं। जिले में बड़ी संख्या में अवैध डेयरियों का संचालन किया जा रहा है। जहाँ सारे नियमों का उल्लंघन कर दूध निकाला जा रहा है। भैंसों को प्रतिबंधित ऑक्सोटिशीन इंजेक्शन लगाने से लेकर दूध सिंथेटिक और केमिकल मिलाने तक के सारे गोरखधंधे संचालित हो रहे हंै।
कृत्रिम अभाव का खेल
जिले में सालों से दूध के उत्पादन को लेकर कृत्रिम अभाव का खेल-खेला जा रहा है। एक दशक का आंकड़ा उठा कर देखा जाए तो जबलपुर में दूध के उत्पादन में लगातार वृद्धि हुई है। सरकारी दुग्ध संघ भी अपना कार्य कर रहा है। दूध का उत्पादन बढ़ा है लेकिन इसकी अधिकांश सप्लाई नागपुर और अन्य जिलों में लगी बड़ी बड़ी नामी फैक्ट्रियों को कर दी जाती है जो अपने उत्पाद में इसका उपयोग करती है । इस कारण से जबलपुर शहर में दूध की कमी बताई जाती है और आपूर्ति रोकी जा रही है, जिससे महँगा दूध खरीदने की मजबूरी बने। यह माफिया का मुनाफे का खेल है, इसमें कई लोग शामिल हो सकते हंै। भाजपा सरकार माफियों के खिलाफ लगातार कार्यवाही कर रही है। लोगों को आशा है की जल्द ही दुग्ध माफिया के खिलाफ भी कार्यवाही होगी।

मुख्यमंत्री से गुहार
जबलपुर प्रशासन ने अभी हाल में शिक्षा माफिया पर लगाम कसी है, यह देख कर पूरे शहर के लोग आशान्वित हुए हैं कि प्रशासन अगर चाह ले तो कोई भी माफिया हो उस पर नकेल कसने का काम किया जा सकता है, बशर्ते राज्य सरकार की मंशा और अनुमति प्रशासन के साथ हो। अब जबलपुरवासियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से राज्य के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से दूध माफिया पर लगाम लगाने की गुहार लगाना शुरू किया है। वहीं जिला प्रशासन से भी उम्मीद की जा रही है कि वो दूध माफिया पर कार्यवाही करें।

Author: Jai Lok







