
संदर्भ : मुख्यमंत्री के नेतृत्व में कामयाबी

सच्चिदानंद शेकटकर, समूह संपादक
जबलपुर (जयलोक)
विधानसभा के चुनाव के बाद डॉक्टर मोहन यादव को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाकर भारतीय जनता पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व ने सभी को चौंका दिया था। भाजपा ने मुख्यमंत्री पद पर आखिर मोहन यादव को क्यों लाया इसको लेकर भी सवाल उठते रहे और चर्चाओं का बाजार भी सरगर्म रहा। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व इस बार यह तय कर चुका था कि डॉक्टर मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाकर पिछड़ा वर्ग का एक सशक्त चेहरा भाजपा की ओर से देश भर में पेश किया जाएगा। उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के बेटे अखिलेश यादव तथा बिहार में लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव जैसे बड़े स्थापित चेहरों के मुकाबले में भाजपा का भी एक बड़ा यादव चेहरा होना चाहिए, इसी रणनीति के तहत भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने डॉक्टर मोहन यादव को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद की जिम्मेदारी सौंप दी। विधानसभा के चुनाव के तत्काल बाद ही लोकसभा के चुनाव की तैयारी को ध्यान में रखकर ही भाजपा के केंद्रीय ने यह तय कर लिया था कि इस बार के लोकसभा के चुनाव में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का पूरे देश में पिछड़े वर्ग के नेता के रूप में उपयोग किया जाएगा।
भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की मंशा के अनुरूप मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस बार के लोकसभा के चुनाव में देश के 11 राज्यों में जाकर चुनाव प्रचार किया इन राज्यों में मुख्यमंत्री ने पाँच रोड शो भी किया। वहीं 41 आम सभाएं भी भाजपा के प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार के लिए की, इसके अलावा उन्होंने बैठकर भी की मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 17 लोकसभा सीटों पर चुनाव प्रचार किया वहीं उन्होंने दिल्ली की 6 लोकसभा सीटों पर वही प्रभावी चुनाव प्रचार अभियान चलाया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हरियाणा की एक तथा झारखंड की सात सीटों पर चुनाव प्रचार किया और महाराष्ट्र की दो लोकसभा सीटों पर वह चुनाव प्रचार करने के लिए पहुँचे। बिहार में भी डॉक्टर मोहन यादव को भाजपा के प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार के लिए भेजा गया। जहां उन्होंने तीन लोकसभा क्षेत्र में प्रचार किया। छत्तीसगढ़ की एक और पंजाब की दो लोकसभा सीटों में भी चुनाव प्रचार करने के लिए गए।

दक्षिण के तीन राज्यों में भी किया प्रचार
सबसे बड़ी बात यह रही कि मुख्यमंत्री मोहन यादव को दक्षिण के राज्य आंध्र प्रदेश तेलंगाना और कर्नाटक में भी चुनाव प्रचार के लिए केंद्रीय नेतृत्व द्वारा भेजा गया। इससे यह साबित होता है कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लोकसभा के चुनाव प्रचार अभियान में कितना अधिक महत्व दिया। मुख्यमंत्री मोहन यादव की चुनाव प्रचार के लिए मांग निरंतर बढ़ती भी रही।

मध्य प्रदेश में भी प्रचार का मोर्चा मुख्यमंत्री ने संभाला
आज भारतीय जनता पार्टी को जो 242 सीटें पूरे देश भर में मिली हैं उनमें मध्य प्रदेश की पूरी की पूरी 29 सीटें भी पहली बार भाजपा के खाते में गई है। एनडीए के बहुमत को बनाने में मध्य प्रदेश की 29 सीटों का बड़ा योगदान माना जा रहा है। देश भर में चुनाव प्रचार अभियान चलाने के साथ ही साथ मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मध्य प्रदेश में भी सभी 29 सीटों पर प्रभावी चुनाव अभियान चलाया। उन्होंने 142 जनसभाएं भी पूरे प्रदेश में कीं तथा 55 रथ सभाएं और 66 रोड शो भी किये। सबसे बड़ी बात यह रही कि प्रदेश की किसी भी सीट को मुख्यमंत्री ने अपने प्रचार अभियान में कम महत्व नहीं दिया वे एक बार से लेकर चार बार तक प्रदेश की सभी लोकसभा सीटों में चुनाव प्रचार के लिए पहुँचे और भाजपा के चुनाव प्रचार अभियान को मुकाम तक पहुंचा।
छिंदवाड़ा ने बढ़ाई मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा
प्रदेश ही नहीं देशभर में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र का शुरू से ही महत्व रहा है। छिंदवाड़ा में आजादी के बाद से लेकर 2019 तक के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने लगातार चुनाव जीतकर इसे अपना सबसे बड़ा और मजबूत गढ़ बना कर रखा। लेकिन इस बार के चुनाव में कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ के किले को ढहाने में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। छिंदवाड़ा के सभी विधानसभा क्षेत्र में उन्होंने जमकर प्रचार किया। छिंदवाड़ा की सीट पहली बार भाजपा के खाते में आई है और भाजपा पहली बार प्रदेश की सभी 29 सीटों पर जीती है। इससे मुख्यमंत्री मोहन यादव की प्रतिष्ठा और बढ़ी है। अब यह स्पष्ट हो गया है कि अब जहां-जहां भी चुनाव होंगे भाजपा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का उपयोग प्रचार अभियान के लिए किया जाएगा।
Author: Jai Lok







