Download Our App

Home » अपराध » मेरी हत्या की साजिश रची गई थी- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

मेरी हत्या की साजिश रची गई थी- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

प्रयागराज (जयलोक)। कल प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दौरान गंगा नदी के संगम घाट पर स्नान करने जा रहे  ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी  श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के साथ हुई घटना के बाद आज उन्होंने सार्वजनिक तौर पर बड़ा बयान दिया है और कहां है कि कल उन्होंने अपनी आंखों से जो माहौल देखा जिस प्रकार से शासन और पुलिस के लोग उन्हें पालकी से नीचे उतारने पर आड़े हुए थे, यह पूरी साजिश उनकी हत्या के लिए की गई थी। प्रशासन के लोग भगदड़ का रूप देकर उनकी हत्या करना चाहते थे।  शंकराचार्य जी ने कहा कि सुबह 9:00 वे अपने पंडाल से स्नान के लिए निकले थे। क्षेत्र के एक थाना प्रभारी उनके पास आए और बताया कि उनको स्नान करवाने की व्यवस्था की जिम्मेदारी उन्हें सौंप गई है। थाना प्रभारी अपने सिपाहियों के साथ नेतृत्व करते हुए आगे चल रहे थे। उन्होंने संगम तक जाने के लिए बेरीकेट को खुलवाया था। इसके बाद 9.37 मिनट पर उनकी पालकी को प्रशासन ने रोक दिया। उनके शिष्य मंडल, बुजुर्गों और महिलाओं के साथ मारपीट की गई, ब्रम्हचारी को चोटी पकड़ के खींचा गया, जमीन पर गिराया गया। इसके बाद से शाम 5:00 तक प्रशासन ने जिस प्रकार से व्यू रचना की बार-बार मजबूर किया गया कि वे पालकी से नीचे उतरें, यह सब एक साजिश का हिस्सा था। शंकराचार्य जी ने कहा की भीड़ में वर्दी में डेढ़ दो सौ लोग मौजूद थे। प्रशासन के अधिकारी बार -बार पालकी से उतरने का दबाव बना रहे थे। उनकी योजना का हिस्सा था कि वह जैसे ही पालकी से उतरते यह डेढ़ दो सौ लोग भीड़ की शक्ल बनाकर धक्का मुक्की शुरू करते और इसी बीच उनकी हत्या कर दी जाती और कहने के लिए हो जाता कि शंकराचार्य जी के कारण भगदड़ मची  और लोग मारे गए।

गंगा स्नान के लिए संत नहीं लेंगे अनुमति

शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने कहा कि प्रशासन यह तर्क दे रहा है कि साधु-संतों को मां गंगा के स्नान के लिए अनुमति लेना होगी। इस पर स्वामी जी ने कहा कि मां गंगा मेंं स्नान करना हर साधु संत के साथ ही हर भारतवासी का जन्म सिद्ध अधिकार है। इसके लिए प्रशासन से कोई अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है और ना ही हम कभी लेंगे। गंगा नदी को हम अपनी मां मानते हैं और इसलिए इस लिहाज से मां के आंचल में स्नान के लिए पुुत्र को किसी की भी अनुमति की जरूरत नहीं पड़़ेगी। यह जरूर है कि हम स्नान के जाने के पूर्व प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों को और व्यवस्था देख रहे लोगों को अपनी दिनचर्या और अपने आवागमन की सूचना पूर्व से जरूर देते हैं। ताकि उनकी और हमारी व्यवस्था का तालमेल बना रहे।

शंकराचार्य पालकी में ही जाते हैं स्नान करने

स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने कहा कि  पालकी में स्नान करने जाना शंकराचार्य जी की ही परंपरा है। कुंभ मेला हो या फिर मौनी अमावस्या का मेला हो हर धार्मिक आयोजन के समय देश की धार्मिक व्यवस्था संभाल रहे सभी शंकराचार्य पालकी में ही स्नान करने जाते हैं। यह उनकी परंपरा का हिस्सा है और इसका उल्लेख 1000 साल पूर्व के ग्रंथों और दस्तावेजों में भी प्राप्त होता है।

दंडी संन्यासी और बुजुर्गों को भी घसीटा गया जूता से मारा गया

स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने कहा कि दंडी संन्यासी के साथ साथ बुजुर्गों और महिलाओं को भी बेरहमी से बाल पकड़ कर मारा गया उन्हें जमीन  पर पटका गया और जूते से मारा गया। 14 साल के सबसे छोटी उम्र के दंडी संन्यासी और 94 साल के बुजुर्ग को भी अमानवीय घटना में शिकार बनाया गया। हमारे साथ मौजूद 35 लोगों को जबरदस्ती बलपूर्वक पकड़ा गया। साजिश के तहत हमें अकेला किया गया, बार-बार जोर डालकर पालकी से नीचे उतरने का प्रयास किया गया, लेकिन साजिश का अंदेशा होने पर हम पालकी से नीचे नहीं उतरे।

 

बजट 2026 में शादीशुदा जोड़ों के लिए जॉइंट टैक्सेशन की तैयारी

Jai Lok
Author: Jai Lok

RELATED LATEST NEWS

Home » अपराध » मेरी हत्या की साजिश रची गई थी- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद