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‘लीक’ की समस्या आज की नहीं बरसों पुरानी है हुजूर…

(जय लोक)।इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चा यदि किसी चीज की तो है तो वो है ‘लीक’ की। तरह-तरह की परीक्षाओं के पेपर लीक हो गए जिससे लाखों छात्र प्रभावित हुए एक ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ भी बन गई जिसके आंदोलन से घबरा कर शिक्षा मंत्री ‘धर्मेंद्र प्रधान’ को इस्तीफा देना पड़ गया। अब तो नौजवान छोड़ो बच्चे भी आंदोलन करने लगे हैं। लोग बाग कह रहे हैं कि लीक होने का काम अभी से शुरू हुआ है लेकिन अपने को मालूम है कि लीक का इतिहास बहुत पुराना है। याद करिए जब स्याही वाले पेन चला करते थे तब पेन के आगे का हिस्सा लीक करने लगता था बच्चों के हाथ पैर मुंह सब नीली स्याही के कारण नीले  हो जाते थे। फिर उसके आगे का हिस्सा खोलकर उसमें ‘वैसलीन’ लगाया जाता था तब जाकर वो लीक बंद होता था, आज भी जो लोग स्याही वाले पेन  का यूज  करते होंगे वे इस समस्या से दो-चार होते ही होंगे। लीकेज कहां नहीं है ऐसी कौन सी जगह है जहां लीक नहीं होता। आप कितनी मजबूत छत डलवा लो, स्लैब डलवा लो कभी भी छत लीक हो जाती है, चमचमाती टाइल्स का बाथरूम और बड़ी से बड़ी कंपनी का ‘श्रिंक’ लगवा लो उसमें भी लीकेज हो जाता है, पाइप लाइनों में लीकेज तो आम बात है, घरों में रसोई के लिए जो एलपीजी के सिलेंडर होते हैं उसमें भी कभी-कभी गैस लीक हो जाती है जो बड़ी बड़ी दुर्घटना को जन्म दे देती है। आपके पास कार है कभी भी आपका ऑयल लीक कर सकता है या पेट्रोल टंकी कमजोर हो गई है तो उसमें से पेट्रोल लीक कर सकता है, घर के बेडरूम में गर्मी से मुक्ति के लिए ‘एसी’ लगवा कर रखा है उसकी गैस भी कभी-कभी लीक हो जाती है और तो और नाली से भी गैस लीक हो जाती है। इलेक्ट्रिक व्यवस्था में शॉर्ट सर्किट होता है यानि बिजली तार में लीकेज है जिससे बड़ी दुर्घटना हो जाती है आग लग जाती है। महिलाओं की किसी भी ‘किटी पार्टी’ में चले जाइए किसी एक महिला की जो उपस्थित ना हो उसकी बुराई हो रही हो और यह कहा जा रहा हो कि ये बात उस तक नहीं पहुंचना चाहिए लेकिन 2 घंटे बाद जैसे ही किटी पार्टी खत्म होगी उस महिला तक ये बात लीक हो जाएगी कि पार्टी में उसकी बुराई की जा रही थी। देश की सुरक्षा मे कई बातें लीक कर दी जाती हैं कुछ देश विरोधी लोग पैसे के लालच में देश की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी चीजें लीक कर देते हैं, जो लोग रिश्वतखोरी में पकड़े जाते हैं उनकी खबर भी कहीं ना कहीं से लोकायुक्त या ईओडब्लू के पास लीक होकर पहुंचती है और बेचारे रंगे हाथ पकड़े जाते हैं। जब कभी ‘प्रोस्टेड ग्लैंड’ बढ़ जाता है तो मूत्र नलिका भी लीक करने लगती है। यानी लीक का इतिहास आज का नहीं बरसों पुराना है फिर पता नहीं क्यों पेपर क्या लीक हो गए इतना हल्ला मच गया। अरे भाई हर चीज अगर लीक हो रही है तो पेपर उससे अछूते कैसे रह सकते हैं। इसलिए अपना तो कहना इन लोगों से यही है कि लीक को लेकर इतना ऊधम मचाने की जरूरत नहीं है यह तो परंपरा है बरसों से चली आ रही है और आगे भी चलती रहेगी। इसलिए इस गाने पर बिल्कुल भरोसा मत करना ‘इशारों को अगर समझो राज को राज रहने दो’ अगर राज राज ही बना रहा तो लीक की तो जिंदगी बेकार चली जाएगी।

मटन में भी भ्रष्टाचार

एक खबर आई है कि कूनो पार्क में चीतों के लिए जो मटन आता था उसमें भी भारी भ्रष्टाचार सामने आ गया है। बताया जाता है कि जिन बकरों का मटन कूनो पार्क में चीतों के लिए आता था उन बकरों का वजन 70 से 80 किलोग्राम तक बताया जाता था और बाकायदा उसका पेमेंट उसी हिसाब से हो भी जाता था, लेकिन जो लोग ‘बकरा एक्सपर्ट’ हैं उनका साफ  कहना है कि इतने ज्यादा वजन वाले बकरे बहुत कम होते हैं। 70, 80 किलो वजन वाले बकरे ढूंढने पर भी नहीं मिलते तो फिर कूनो पार्क में चीतों के लिए जो मटन लाया जा रहा था उन बकरों का वजन इतना कैसे हो सकता है? अरे भाई ये कौन सी बड़ी बात है जब हर चीज में भ्रष्टाचार चल रहा है। 10 करोड़ की सडक़ एक करोड़ में बन जाती है, करोड़ों में बनने वाले पुल उससे आधी राशि में तैयार हो जाते हैं। ये बात अलग है कि वो चार छह महीने में ढह जाते हैं लेकिन किसी का कुछ बिगड़ता नहीं। यदि किसी सप्लाई करने वाले ने बकरे के वजन में 10, 20 किलो बढ़ा भी दिए तो ऐसा कौन सा गुनाह कर दिया। एक चीता कितने बकरों का मटन खाता होगा दो चार बकरे और दे दिए जाएंगे और कह दिया जाएगा कि ‘झंडू पंचारिष्ट’ पीने से उनकी भूख खुल गई है, इससे एक तरफ  सप्लायर का तो भला हो जाएगा जो 50 किलो के वजन वाले बकरे का वजन 70 से 80 किलोग्राम बता रहा है। कुछ कमीशन अफसरों तक भी पहुंच जाएगा, दोनों की दोस्ती बाकायदा चलती रहेगी लेकिन कहते हैं ना कि विघ्नसंतोषियों की कमी नहीं है अच्छा भला काम चल रहा था लेकिन एक अड़ंगा लगा दिया कि बकरे का वजन इतना नहीं होता, अब हर बकरे का वजन लेना पड़ेगा और बहुतों की दुकान बंद हो जाएगी।

अचानक ये क्या हो गया
दुनिया भर को सिर्फ  योग से रोग मुक्त करने का दावा करने वाले ‘बाबा रामदेव’ इस वक्त हर रोग की दवा बनाये पड़े हैं और करोड़ों रुपया कमा रहे हैं अपने को तो ये बात आज तक समझ में नहीं आई कि जब योग से ही सारे रोग दूर हो जाते हैं तब बाबा जी को इतनी दवाइयां बनाने की जरूरत क्यों पड़ी। लेकिन कहते हैं कि बिजनेसमैन वही सफल होता है जो वक्त की नज़ाकत को पहचानता है। पहले योग की लत लगा दो और फिर दवाइयां शुरू कर दो, लेकिन पिछले दिनों पता नहीं बाबा जी को क्या हो गया स्वतंत्रता दिवस पर सारे मीडिया वालों के सामने जोर जोर से चिल्ला कर बोलने लगे कि सरकारी नौकरियों में भारी भ्रष्टाचार मचा हुआ है, भाई भतीजा वाद चल रहा है। 100 में से 90 फीसदी भर्तियां भ्रष्टाचार के आधार पर होती हंै और अगर ये सब कुछ बंद नहीं हुआ तो मैं भी आंदोलन पर बैठ जाऊंगा। पता नहीं बाबा जी को एकदम से ब्रह्म ज्ञान कहां से आ गया। ये  कोई नई बात तो है नहीं कि नौकरियों में भ्रष्टाचार और भाई भतीजावाद नहीं होता। ये सिलसिला तो तब से चल रहा है जब से सरकारी नौकरी में भर्तियां शुरू हुई हैं। सरकार कोई भी रही है लेकिन यह परंपरा हमेशा से चली आई है, लेकिन पता नहीं अचानक बाबा जी को क्या हो गया एकदम सिस्टम के खिलाफ  खड़े हो गए। लगता है अभी तक सरकार से जो कुछ सहयोग मिल रहा था उसमें कुछ कमी आ गई वरना बाबा रामदेव तो 35 रुपए प्रति लीटर पेट्रोल भी बिकवाने वाले थे। खैर बाबा जी कुछ करें ना करें आंदोलन पर बैठें ना बैठें और महिलाओं के कपड़े पहनकर आंदोलन स्थल से भाग खड़े हों या ना भागें लेकिन भ्रष्टाचार और भाई भतीजा वाद के खिलाफ  आवाज उठा दी यही बड़ी बात है।

सुपर हिट ऑफ  द वीक
डाक्टर ने श्रीमान जी का चेकअप करने के बाद उनसे कहा
‘आपकी किडनी फेल हो गई है’
कुछ देर तक रोने और आंसू पोंछने के बाद श्रीमान जी ने डाक्टर से पूछा
‘इतना और बता दीजिए कि कितने नंबर से फेल हुई है किडनी’
और तब से डाक्टर बेहोश पड़ा है।

 

मजाक में हुए विवाद में महिला पर चाकू से किए 4 वार, ली जान

Jai Lok
Author: Jai Lok

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