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विधायक अशोक रोहाणी  सहित 6 अन्य को आज पेश होना है एमपी एमएलए कोर्ट में

जबलपुर (जयलोक)। फर्जी ‘सिन्धी सेन्ट्रल पंचायत’ और ‘फर्जी सिन्धी सेवक सभा’ के नाम से सिन्धी धर्मशाला, घंटाघर, जो एक सामाजिक संपत्ति है इसमें की गई अनियमितताओं, फर्जी नामांतरण, करोड़ों रुपये के किराये के गबन, तथा पंचायत के लेटरहेड पर किए गए दुष्प्रचार के मामले में एम.पी.-एम.एल.ए. कोर्ट (विशेष न्यायाधीश), जबलपुर ने 2 प्रकरणों में संज्ञान लिया है। अदालत ने आज दिनांक 22 मार्च को सभी संबंधित आरोपियों को न्यायालय में उपस्थित होने का आदेश दिया गया है। यह मामला जीतेन्द्र मखीजा द्वारा दायर किया गया है। इस मामले में सात लोग  आरोपी हैं जिनमें विधायक अशोक रोहाणी, करतारसिंह बठीजा, शमनदास आसवानी, मोतीलाल पारवानी, उमेश पारवानी, जयराज बठीजा और भरत रोहाणी शामिल है।
मामला वर्ष 2019 से प्रचलित है, जिसमें शिकायतकर्ता जितेंद्र मखीजा, निवासी नेपियर टाउन द्वारा की गई शिकायतों पर पुलिस ने संज्ञान नहीं लिया और कोई जाँच नहीं की। तत्कालीन थाना प्रभारी ओमती, जबलपुर नीरज वर्मा के विरुद्ध, पुलिस अधीक्षक ने उन्हें थाने से हटाने की कार्रवाई की थी। इसके पश्चात, यह मामला लगभग दो वर्षों तक कोरोना काल से प्रभावित रहा।
उसके बाद, पुलिस महानिदेशक  के आदेशानुसार, पूर्व जबलपुर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी को मामले की जाँच करने का निर्देश दिया गया था। इस आईपीएस अधिकारी ने भी कथित रूप से अपराधियों के पक्ष में जाँच रिपोर्ट तैयार करते हुए, दिनांक 12-10-2021 को फर्जी जाँच रिपोर्ट बना दी। बाद में, इस फर्जी जाँच रिपोर्ट के संबंध में लोक सूचना आयोग ने दिनांक 17-01-2025 को दंडात्मक आदेश जारी किया, जिसमें इस  अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए और उन पर 25,000 का जुर्माना भी लगाया गया। इस कार्रवाई से यह स्पष्ट हो गया कि तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी ने अपराधियों को निर्दोष घोषित करने की कोशिश की और ऐसे तथ्यों का हवाला दिया, जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं था, इसी आधार पर सभी आरोपियों को राहत प्रदान की गई।
शिकायतकर्ता की मूल शिकायत का विषय  यह है कि  अपराधियों द्वारा सामाजिक संपत्ति पर अवैध कब्जा कर, ‘सिंधी सेंट्रल पंचायत’ तथा ‘सिंधी सेवक सभा’ के नाम से फर्जी कार्यों का संचालन किया जा रहा है। इस भवन को सामाजिक भवन बताकर राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उपयोग किया जाता है, जिससे प्राप्त होने वाली आय का उपयोग इन आरोपियों द्वारा किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन दोनों संस्थाओं के पंजीयन एवं इन अपराधियों की नियुक्तियों की विधिवत जाँच होनी चाहिए, जो पुलिस द्वारा नहीं की गई। हाल ही में आरोपियों ने एसडीएम (रांझी) से ‘सिंधी सेवक सभा’ के नाम से एक ट्रस्ट पंजीकृत कराया, जिसमें एक मृत व्यक्ति को सदस्य दिखाया गया है। ऐसा ही अपराध करतार सिंह ने वर्ष 2019 में भी किया था, जिसके विरुद्ध सिविल कोर्ट में वाद लंबित है। वर्तमान में, वर्ष 2024 में एक नया अपराध किया गया है, जिसमें अभी एफ.आई.आर. दर्ज होना शेष है और यह तीसरा मामला होगा। फिलहाल, 2 मामलों में अदालत द्वारा संज्ञान लिया जा चुका है तथा इन सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश होने के आदेश दिए गए हैं।

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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