
जबलपुर (जयलोक)। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज महाराष्ट्र शिक्षण मंडल के सौ वर्ष पूर्ण होने पर मानस भवन में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि सौ साल पहले 1925 में महाराष्ट्र शिक्षण मंडल की स्थापना की गई थी। समय के साथ-साथ महाराष्ट्र समाज ने शिक्षा के क्षेत्र में विस्तार किया और स्कूल के बाद कॉलेज की भी स्थापना की। आज महाराष्ट्र समाज के इन शैक्षणिक संस्थाओं से युवा शिक्षित और भविष्य की ओर अग्रसर हो रहे हैं। उन्होंने बंटवारे के पूर्व के दिनों को याद करते हुए कहा कि आजादी के पूर्व पाकिस्तान के लाहौर में भी महाराष्ट्र सेवा शिक्षण संस्थान के पाँच स्कूल संचालित हुआ करते थे। इसके साथ ही आज देशभर में जहां जहां भी मराठीभाषी पहुंचे उन्होंने महाराष्ट्र शिक्षण संस्थान की स्थापना की और आज वहां स्कूल कॉलेज संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने महाराष्ट्र शिक्षण मंडल की सराहना करते हुए कहा कि सौ साल पहले जिन लोगों ने इसकी स्थापना की उनका उद्देश्य यहीं था कि शिक्षा को जन-जन तक पहुँचाना है। आजादी के पूर्व जहां अंगे्रजों और उनकी सरकार द्वारा संचालित स्कूल संचालित हुआ करते थे। लेकिन उस दौरान महाराष्ट्र समाज ने उस दौर में संस्था की नींव रखी और उन कठिन दिनों में भी शिक्षा के कार्य को आगे बढ़ाया। श्री फण्डवीस ने कहा कि शिक्षा संस्कृति दोनों ही मराठी के प्रिय हैं। इसलिए मराठीभाषी ने शिक्षा के साथ संस्कृति को भी अपने पाठ्यक्रम में रखा। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री ने शिक्षा निति में बदलावा किया है जिससे अब उस क्षेत्र प्रदेश के निजी पाठ्यक्रमों को उनकी भाषा में स्थान दिया गया है। उन्होंने मप्र में मराठी शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए कहा कि मप्र में मराठी भाषा सीखने पढऩे के लिए जो भी निधि की आवश्कता होगी वह महाराष्ट्र सरकार उठाएगी।

मराठाओं ने देश के बारे में सोचा- मुख्यमंत्री देवेन्द्र फण्डवीस ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने ना सिर्फ महाराष्ट्र के बारे में बल्कि पूरे देश के हित के बारे में सोचा। पानीपत की लड़ाई इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

वीडियो कॉलिंग से शामिल हुए मुख्यमंत्री- कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल होने वाले थे लेकिन किसी कारणवश वे जबलपुर नहीं आ सके। लेकिन उन्होंने वीडियो कॉलिंग के माध्यम से कार्यक्रम में अपनी उपस्थित दर्ज कराई।

जबलपुर से पुराना नाता
श्री फण्डवीस ने कहा कि जबलपुर से उनका पुराना नाता है। वे पहले जबलपुर आ चुके हैं और यहां की सडक़ों पर घूम चुके हैं। उन्हें पहले से पता था कि जबलपुर में विकास की सभी संभावनाएं हैं।
मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र का रिश्ता पुराना-राकेश सिंह
कार्यक्रम में शामिल लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र का रिश्ता पुराना है। महाराष्ट्र के विकास से प्रदेश को काफी कुछ सीखने को मिला। इसके पहले भी श्री फण्डवीस शहर आ चुके हैं और साथ में शहर की गलियों में घूम चुके हैं। उन्होंने ही जबलपुर के विकास की संभावना तलाशी थी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय कार्य किए हैं। पीएमश्री स्कूल, कॉलेज संचालित किए जा रहे हैं। वहीं अच्छे अंक हासिल करने वाले छात्र छात्राओं को स्कूटी, लेपटॉप, साइकिल सहित कई ईनाम देकर प्रोत्साहित किया जा रहा है।
मेरी भी शिक्षा महाराष्ट्र स्कूल में हुई-राव उदय प्रताप सिंह
शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि कब महाराष्ट्र शिक्ष संस्था के सौ वर्ष पूरे हो गए पता ही नहीं चला। उन्होंने भी महाराष्ट्र स्कूल से शिक्षा ग्रहण की है और आज इसी संस्था के सौ वर्ष पूर्ण होने पर कार्यक्रम में शामिल होना गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र शिक्षण मंडल ने युवाओं के जीवन को नया आकार दिया। एक समय था जब जबलपुर में ज्यादा स्कूल नहीं थे और अच्छी शिक्षा के लिए महाराष्ट्र जाना पड़ता था। लेकिन महाराष्ट्र शिक्षण मंडल ने शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करते हुए शहर में ही छात्रों को अच्छी और उच्च शिक्षा उपलब्ध कराई है।
रामायण प्रदर्शनी का हुआ उद्घाटन
मानस भवन में ही विश्व रामायण कान्फ्रेंस के अवसर पर इंद्रा गांधी राष्ट्रीय कला केंन्द्र एवं भोपाल के संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित रामायण से संबंधित विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फण्डवीस द्वारा किया गया। उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस अवसर पर आयोजन समिति की सलाहकार ज्ञानेश्वरी दीदी, आयोजन अध्यक्ष अजय विश्नोई, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, सचिव अखिलेश गुमाश्ता ने विश्व रामायण कांन्फ्रेंस के संबंध में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को जानकारी दी।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, सांसद आशीष दुबे, सुमित्रा बाल्मिक, विधायक अजय विश्नोई, अभिलाष पांडे, नीरज सिंह, निगम अध्यक्ष रिकुंज विज, भाजपा नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर, आयोजन समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र जामदार, कार्यकारी अध्यक्ष प्रशांत पोल, महाराष्ट्र शिक्षण मंडल के अध्यक्ष डॉ. जयंत तन्खीवाले, सचिव प्रमोद पाठक आदि मौजूद रहे।
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Author: Jai Lok







