
रायपुर (जयलोक)।
श्री शंकराचार्य आश्रम बोरिया कला रायपुर में चल रही चातुर्मास प्रवचन माला के क्रम को गति देते हुए शिव पुराण की कथा के प्रसंग में परम पूज्य डॉ.स्वामी इन्दुभवानन्द तीर्थ में बताया कि भगवान शिव के नैवेद्य के दर्शन करने मात्र से व्यक्ति के पाप नष्ट हो जाते हैं और शिव के नैवेद्य को ग्रहण करने से करोड़ पुण्य की प्राप्ति स्वत: हो जाती है। हजार यज्ञ करने की बात कौन करें? करोड़ यज्ञ करने के पश्चात भी वह फल प्राप्त नहीं होता है जो फल भगवान शंकर के नैवेद्य ग्रहण करने से प्राप्त हो जाता है।
भगवान शंकर के नैवेद्य विधिवत् ग्रहण करने मात्र से व्यक्ति को शिवलोक की प्राप्ति हो जाती है। जिस घर में शिव जी का नैवेद्य लगाया जाता है या अन्यत्र से शिवजी की पूजन के पश्चात कहीं अन्यत्र से प्रसाद के रूप में नैवेद्य उसके घर आता है,आते ही व्यक्ति का घर पवित्र हो जाता है, तथा आए हुए अन्य अतिथियों को भी पवित्र कर देता है। आए हुए नैवेद्य को बड़ी प्रसन्नता के साथ तत्काल ग्रहण कर लेना चाहिए विलंब करने से पाप लग जाता है।
जो मनुष्य शिव नैवेद्य ग्रहण करने में विलंब करता है उसे पाप लग जाता हैद्य जो शिव की दीक्षा से दीक्षित है अथवा नहीं है सभी को शिव नैवेद्य खाने का अधिकार है।
यदि ब्रह्म हत्या करने वाला महान पापी भी शिव नैवेद्य को ग्रहण करता है शिवनिर्माल्य को धारण करता है तो वह ब्रह्म हत्या जैसे पाप से भी मुक्त हो जाता है। जहां चण्ड का अधिकार होता है वहां शिवलिंग के लिए समर्पित नैवैद्य का ग्रहण मनुष्यों को नहीं करना चाहिए और जहां चण्ड का अधिकार नहीं होता है वहां शिवलिगं का नैवेद्य बड़ी भक्ति पूर्वक ग्रहण करना चाहिए है।
जो नैवेद्य शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है, इस पर चण्ड का अधिकार होता है, और जो शिवलिंग के बाहर रखा जाता है वह चण्ड के अधिकार से मुक्त होता है इसलिए उसको सबको ग्रहण करना चाहिए।कथा के पूर्व शंकराचार्य आश्रम के वैदिक विद्वानों ने मंगलाचरण किया तथा आरती करके भगवान शिव की पूजन की तत्पश्चात स्वामी जी महाराज ने कथा प्रारंभ की।

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Author: Jai Lok







