
मुंबई,(एजेंसी/जयलोक)। भारतीय शेयर बाजार 28 फरवरी को खुलते ही धड़ाम हो गया। सेंसेक्स 1100 अंकों से अधिक क्रैश होकर 73,469.11 अंक पर आ गया। वहीं निफ्टी-50 भी 350 अंकों का गोता लगाकार 22,188.50 के स्तर पर आ गया। गिरावट इतनी तेज थी 30 मिनट के अंदर बीएसई में लिस्टेड कंपनियों की मार्केट वैल्यू करीब 6.1 लाख करोड़ रुपये कम हो गई। इसके साथ निफ्टी अब अपने 9 महीने के निचले स्तर पर आ गया है। फरवरी में अब तक निफ्टी 5 प्रतिशत तक गिर चुका है। इसके साथ ही निफ्टी अब 29 सालों में पहली बार लगातार 5वें महीने गिरावट के साथ बंद होता हुआ दिख रहा है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह हैं कि आज बाजार के टूटने का कारण क्या था। हम आपकों इस खबर में उन कारणों के बारे में बताने जा रहे है। बाजार के टूटने का प्रमुख कारण ट्रेड वार की आशंका अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा और मैक्सिको पर 4 मार्च से ही 25 प्रतिशत टैरिफ लागू करने की घोषणा की है। जबकि इसके पहले उन्होंने टैरिफ को 2 अप्रैल से लागू करने का संकेत दिया था। ट्रंप ने यह भी कहा कि चीन से आने वाले सामानों पर भी 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगेगा, जिससे ग्लोबल ट्रेड वार छिडऩे की आशंका बढ़ गई है। बाजार जानकार बताते हैं कि शेयर बाजार अनिश्चितता को पसंद नहीं करते हैं, और जब से ट्रंप राष्ट्रपति चुने गए हैं, तब से अनिश्चितता बढ़ती जा रही है। ट्रंप के टैरिफ ऐलानों का शेयर बाजार पर असर पड़ रहा है। साथ ही चीन पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत टैरिफ की नई घोषणा से शेयर बाजार के इस नजरिए की पु्ष्टि हो रही है कि ट्रंप अपने नए कार्यकाल में टैरिफ का इस्तेमाल देशों का धमकाने और फिर अमेरिका के अनुकूल समझौते करने के लिए करने वाले है। उन्होंने कहा, मार्च में इकोनॉमी से जुड़ी अच्छी खबरों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली की रफ्तार धीमी होने के चलते शेयर बाजार में एक रिकवरी देखने को मिल सकती है। लंबी अवधि के निवेशक बाजार में कमजोरी का फायदा उठाकर धीरे-धीरे वाजिब भाव पर कारोबार कर रहे क्वालिटी लार्जकैप शेयरों को जमा कर सकते हैं। एशियाई शेयरों में कमजोरी ने भी शुक्रवार को निवेशकों के सेंटीमेंट पर असर डाला। हांगकांग के शेयरों में शुक्रवार को गिरावट के साथ ही पिछले 6-हफ्तों से जारी तेजी का सिलसिला टूट गया। ट्रंप का चीनी सामानों पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने के फैसले के बाद वहां जमकर मुनाफावसूली देखने को मिली। हांगकांग के बेंचमार्क हैंग सेंग में 2.3 प्रतिशत की गिरावट आई। जापानी शेयरों में विदेशी निवेशकों की ओर से करीब 5 महीनों की सबसे बड़ी बिकवाली देखने को मिली। यह कुल 1.04 ट्रिलियन येन की निकासी थी। जापानी येन में मजबूती, बढ़ती मंहगाई से जुड़ी चिंताएं और ट्रंप की टैरिफ नीतियों से जुड़ी अनिश्चितताओं के चलते एफआईआईएस ने बिकवाली की।एआई चिप्स इंडस्ट्री की सबसे बड़ी कंपनी एनवीडिया के उम्मीद से कमजोर तिमाही नतीजों ने भी बाजार में भूचाल लाने में अहम भूमिका निभाई।
एनवीडिया के शेयर रातों रात 8.5 फीसदी तक गिर गए। कंपनी ने ग्रॉस मार्जिन के मोर्चे पर खासतौर से उम्मीद से कमजोर प्रदर्शन किया। हालांकि एनवीडिया ने अपनी ग्रोथ को लेकर मजबूत अनुमान जताए हैं, लेकिन यह निवेशकों के मनोबल को उठा पाने में नाकाम रहा।

4. अमेरिकी इकोनॉमी में मंदी की आशंका
अमेरिका में साप्ताहिक बेरोजगारी दावों में उम्मीद से अधिक बढ़ोतरी हुई है। इस आंकड़े से दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी में सुस्ती की चिंता को बढ़ दिया है। ट्रंप के टैरिफ ऐलानों के चलते पहले ही वह महंगाई दर में बढ़ोतरी का अनुमान जताया चा चुका है। इसकारण आईटी शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली, जिनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा अमेरिका से आता है।
आशीष दुबे / 28 फरवरी 2025

Author: Jai Lok







